भारतीय महिला एंट्रेप्रिन्योर्स ने अपने कामयाब वेंचर्स से देश ही नहीं बल्कि, दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। फूड प्रोसेसिंग से लेकर एग्रो प्रोडक्ट्स, हैंडीक्राफ्ट्स, टैक्सटाइल्स, रियल एस्टेट, फार्मास्युटिकल्स, हॉस्पिटेलिटी, टूरिजम जैसे क्षेत्रों में महिला एंट्रेप्रिन्योर्स ने अपनी योग्यता साबित की है। Ministry of Statistics and Programme Implementation के 6वें Economic Census के अनुसार भारत में 58.5 मिलियन एंट्रेप्रिन्योर्स में से 8.05 मिलियन महिलाएं हैं यानी कि कुल आबादी का तकरीबन 14 फीसदी। कामयाब महिला एंट्रेप्रिन्योर्स की फेहरिस्त काफी लंबी है। इनमें Menstrupedia की फाउंडर अदिति गुप्ता, V Resorts की फाउंडर अदिति बलबीर, SocialSamosa.com की फाउंडर अंकिता गाबा, Thrillophilia की को-फाउंडर चित्रा गुरनानी डागा, Nykaa की सीईओ फाल्गुनी नायर और Yourstory की फाउंडर श्रद्धा शर्मा आदि के नाम लिया जा सकते हैं। देश के चर्चित एंट्रेप्रिन्योर Agnelorajesh Athaide का मानना है कि कामयाब महिला एंट्रेप्रिन्योर्स देश की तस्वीर को बदलने की क्षमता रखती हैं।

Agnelorajesh Athaide महिला एंट्रेप्रिन्योर्स के बारे में बताते हैं,

'महिला एंट्रेप्रिन्योर्स एक्सपर्ट मेंटर्स का सहारा ले रही हैं और कोलेबोरेशन में काम कर रही हैं, जिससे स्थितियां लगातार बेहतर हो रही हैं। घर और परिवार का सपोर्ट मिलने से महिलाएं अब पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हैं और वे दूसरी महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। पिछले कुछ सालों में हेल्ध, मेटरनिटी और वुमन हाईजीन से लेकर मेंटल हेल्थ बनाए रखने तक कई स्टार्टअप्स की शुरुआत हुई है और यह नए दौर की महिला एंट्रेप्रिन्योर्स की ही देन है।' 

कामयाब एंट्रेप्रिन्योर्स ना सिर्फ बड़ा मुनाफा कमा सकती हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूत कर देश की प्रगति में भी अहम योगदान दे सकती हैं। ऐसे में महिलाओं का एंट्रेप्रिन्योरशिप में आना बेहद महत्वपूर्ण है। आज भी देश की करोड़ों महिलाएं ऐसी हैं, जो टैलेंटेड होने के बावजूद इनीशिएटिव लेने और एंट्रेप्रिन्योरशिप में आने के बारे में नहीं सोच पातीं। इसी सोच को बदलना सबसे महत्वपूर्ण है। अगर आपको लगता है कि गरीबी, अशिक्षा, फैमिली लाइफ आदि की वजह से आप जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पा रहीं तो आपको Agnelorajesh Athaide के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 20 साल बेहद चुनौतीपूर्ण स्थितियों में बिताए, लेकिन इन्हीं चुनौतियों से आगे बढ़कर उन्होंने हर कदम पर नए इनीशिएटिव लिए और इसी की बदौलत उन्होंने अपने हर वेंचर में कामयाबी हासिल की।

गरीबी में बीता बचपन

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Agnelorajesh Athaide का बचपन बेहद मुंबई के सबसे बदनाम इलाके मालवणी की तंग गलियों में बीता। उनके मम्मी-पापा ने इंटरकास्ट मैरिज की थी, जिसका नतीजा ये हुआ था कि दोनों के परिवार वालों ने उनके सपोर्ट नहीं किया था।  Agnelorajesh Athaide के पिता एक मल्टीनेशनल कंपनी में क्लर्क थे। पिता की आमदनी बहुत कम थी और इसकी तुलना में खर्च बहुत ज्यादा। स्थिति ये थी मालवणी जैसे इलाके में रहने के बावजूद उनका परिवार घर का किराया देने में अक्षम था। जब घर से निकाले जाने की नौबत आ गई, तब Agnelorajesh की मां उन्हें लेकर एक जौहरी के पास गईं और घर का बकाया किराया चुकाने के लिए अपना मंगलसूत्र और सोने के दो कंगन बेच दिए। नन्हे Agnelorajesh के लिए यह जिंदगी का बड़ा सबक था और उसी दिन से उन्होंने ठान लिया कि अब वह अपने परिवार से अपने खर्च के लिए पैसे नहीं लेंगे।

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बिंदी फैक्ट्री में किया काम

Agnelorajesh ने स्कूल के बाद बचे हुए समय में बिंदी फैक्ट्री में काम करना शुरू किया, जिसका नाम था डिस्को बिंदिया। यहां से उन्हें 3 रुपये 50 पैसे मिल जाते थे, जो उस समय के हिसाब से काफी ज्यादा थे। उस समय में वड़ा पाव 15 पैसे में और सैंडविच 20 पैसे में मिल जाता था। अपने खर्च उठाने के साथ Agnelorajesh अपने भाइयों का भी खर्च उठाने लगे। लेकिन वह इतने से ही संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम्स, कपड़े, Venky's Chicken, Payal Chappals जैसी चीजें घर-घर जाकर बेचीं और अपने लिए पैसे कमाए। यह एक तरह से उनका प्रैक्टिकल एमबीए था। इस समय ने Agnelorajesh को जिंदगी के सबसे बड़े सबक दिए। उन्हें समझ में आया कि दुनिया में लोग कैसे हैं, कैसे वे सामान न खरीदने के बावजूद मदद के लिए तैयार रहते हैं। अपनी इसी समझ के चलते Agnelorajesh ने अपने नए वेंचर्स में कामयाबी हासिल की। 

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डाटा एंट्री से लेकर कंप्यूटर एजुकेशन मुहैया कराने का सफर ऐसे तय किया

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ग्रेजुएशन के दौरान Agnelorajesh को लगा कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में अच्छा भविष्य है और उन्होंने अपने पिता के दोस्त के ऑफिस में कंप्यूटर पर Dos, Lotus, Wordstar dbase, Foxpro आदि की शिक्षा ली। इसी के बाद उन्होंने अपनी कमाई से पाई-पाई जोड़कर अपने लिए PC-286 कंप्यूटर खरीदा। इसके बाद उन्होंने डाटा प्रोसेसिंग की शुरुआत की। डाटा एंट्री का उनका यह काम अच्छा चला, लेकिन बाद में किन्हीं वजहों से उनका यह बिजनेस ठप पड़ गया। ऐसी स्थिति में अपने और अपने साथ काम करने वालों की आजीविका के लिए उन्होंने कंप्यूटर कोर्स की ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया। युवाओं को कंप्यूटर ट्रेनिंग देते हुए उन्होंने  St. Angelo’s Professional Education की नींव रखी, जो देश का पहला कंप्यूटर एजुकेशन हब बना। धीरे-धीरे पूरे महाराष्ट्र में इसका विस्तार हो गया। जिस समय में हमारे देश में अशिक्षा व्याप्त थी, कंप्यूटर एजुकेशन का अभाव था, उस समय में Agnelorajesh ने अपनी अनूठी पहल से ना सिर्फ युवाओं को कंप्यूटर चलाने में दक्ष बनाया, बल्कि उन्हें आजीविका का एक बेहतर साधन भी मुहैया कराया। अब तक उन्होंने अपने सेंटर्स में 3 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को ट्रेन किया है।

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रियल एस्टेट में भी पाई कामयाबी

Agnelorajesh Athaide ने अपनी जिंदगी के 18 साल ऐसे घर में बिताए, जिसकी छत लीक करती थी, जो सड़क के लेवल से नीचे बना हुआ था और जहां बारिश में गटर और नाली का पानी आ जाता था। अपनी जिंदगी के ऐसे ही भयावह अनुभवों से Agnelorajesh ने समझा कि लोगों को अच्छे घरों की कितनी ज्यादा जरूरत है। अपनी इसी सोच के तहत उन्होंने रियल एस्टेट बिजनेस में प्रवेश किया और लोगों के अफोर्डेबल घर बनाए। 

नॉलेज शेयरिंग में रहते हैं आगे 

Agnelorajesh आज भी लर्निंग से जुड़े कई प्लेटफॉर्म्स से कनेक्टेड हैं, जहां वे युवाओं को प्रेरित करते हैं और उनके साथ अपने लाइफ एक्सपीरियंस शेयर करते हैं। Agnelorajesh युवाओं में लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए अपने की-नोट्स शेयर करते हैं और इंस्पिरेशनल टॉक्स के जरिए लोगों को मोटिवेट करते हैं।  Agnelorajesh से प्रेरणा लेकर महिलाएं बखूबी समझ सकती हैं कि अगर इरादे बुलंद हों और दिल में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं।

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