शरीर के किसी भी भाग में दर्द होना वैसे तो आम बात है। मगर, इसका सही वक्त पर इलाज होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह दर्द मामूली भी हो सकता है और खतरनाक भी है। आपको बॉडी के किसी भी पार्ट में दर्द हो सकता है। अक्सर लोग घुटने के दर्द, गर्दन के दर्द, पैर दर्द और पेट दर्द से परेशान रहते हैं। कभी यह दर्द धीरे से होता हे तो कभी यह तेज हो जाता है। ऐसा भी हो सकता है कि दर्द धीमे से तेज होता जाए। वैसे इस तरह का दर्द अक्सर कमर में होता है। इसकी शुरुआत धीरे से शुरू होती है और फिर यह तेज होता जाता है। मगर, क्या आप इसका कारण जानती हैं? अगर नहीं जानतीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है? 

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बैक पेन (कमर दर्द)

body pain increase on different Times inside

कमर दर्द दो तरह के होते हैं पहला, अचानक तेज दर्द होता है। इसे (एक्यूट पेन) एक्यूट पेन कहते हैं। इस तरह का दर्द अक्सर अधिक भार उठाने या किसी नस के खिंचने से होता है। इसमें बैक में एक चुभन-सी महसूस होती है। कई बार यह आराम करने, सिकाई करने और दवा आदि लगाने से दो-चार दिन में अपने आप सही हो जाते हैं।

क्रॉनिक पेन

क्रॉनिक पेन लंबे टाईम तक रहता है और इसका सही इलाज जरूरी है। बैक दर्द के साथ साइटिका का दर्द भी जुड़ा है। साइटिका शरीर में सबसे बड़ी नर्व होती है, जो कमर से लेकर पंजे तक जाती है। अगर यह कहीं दब जाती है, तो तेज दर्द शुरू हो जाता है। हालांकि दर्द होने के फौरन बाद अगर आप कुछ सावधानियां बरतें तो आपको दर्द में राहत मिल सकती है। जैसे वजन वाला समान न उठाएं, आगे की ओर ना झुकें। घुटनों के बल बैठें। बिस्तर से उठते हुए पहले करवट लें और फिर उठें। इससे बैक दर्द कम होगा। 

क्यों दर्द किसी भी टाईम में अधिक हो जाता है?

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दर्द सिर्फ बाहरी कारणों जैसे चोट या अधिक वर्क से नहीं होता है, बल्कि लागातार काम करने और किसी एक ही जगह पर घंटो बैढ़े होने के कारण हो सकता है। अलग-अलग रिसर्च बताते हैं कि दर्द कि स्थिति 24 घंटे की दिनचर्या का पालन करती है। इन 24 घंटे की दिनचर्या में दर्द का स्वरुप टाईम-टू-टाईम बदलता रहता है। रिसर्च से पता चलता है कि हमारा शरीर एक आंतरिक सर्केंडियन पर वर्क करता है। इसका अर्थ है कि 24 घंटे की आंतरिक घड़ी, जिसके अनुसार शरीर यह वर्क करता है। लेकिन रिसर्च यह भी बताती है कि हमारे शरीर के न्यूरॉन्स सहित अलग-अलग कोशिकाओं की अपनी खुद की सर्केंडियन क्रम (24-घंटे की दिनचर्या) हो सकता है। इसलिए शरीर के विभिन्न दर्द की स्थिति का पूरे दिन अलग-अलग पैटर्न होता है। 

दर्द का साइकल 

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किसी भी दर्द का एक साइकल (क्रम) होता है जो टाईम-टू-टाईम बदलता रहता हैं। शुरू में दर्द कम होता हैं और हम उसे इग्नोर कर देते हैं, लेकिन ऐसा करने से आगे जाकर दर्द क्रॉनिक हो जाता है। यही दर्द धीरे-धीरे सहन करने की क्षमता को कम कर देती है। दर्द आमतौर पर जोड़ों से शुरू होता है। शरीर का वो अंग जो आसानी से मुड़ता है या जिसमें अकड़न होती है जैसे कि कोहनी, कलाई, घुटना, गर्दन, कमर, उंगलियां, टखने आदि में दर्द ज्यादा होता है।

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इजरायल के शोधकर्ताओं का निष्कर्ष

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इजरायल के शोधकर्ताओं ने 2015 में एक रिसर्च किया था, जिसमें उन्होंने दिन के अलग-अलग समय पर पुरुषों के एक समूह को गर्मी और सर्दी के दर्द से अवगत कराया था। इस रिसर्च में यह पाया गया कि पुरुष सुबह के समय दर्द के प्रति कम से कम संवेदनशील थे। इसी कारण उनमें दर्द का असर रात के समय में अधिक देखा गया। हांलाकि महिलाओं में भी समान स्तर का परिणाम देखा गया। नयूरोपेथिक दर्द जैसे पोस्टहेरपेटिक न्यूरेल्जिया, डायबिटिक न्यूरोपैथी या कैंसर शाम या रात के दौरान तेज हो जाते हैं।