मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन के शरीर में कम होने के कारण कई सारे लक्षण सामने आते हैं। मतली या जी मिचलाना और पाचन संबंधित समस्याएं जैसे अधिक गैस बनना, कब्ज हो जाना, वजन बढ़ना आदि हो सकता है। पेट साफ होने में अगर कोई दिक्कत होती है तो उससे उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्या भी बढ़ती है। आंत में स्थित मांसपेशियों में एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स होते हैं। जब उन्हें एस्ट्रोजन की सही सप्लाई नहीं मिलती है तो उनका काम सही से नहीं चलता और इस वजह से ऐसे लक्षण हो जाते हैं। हेल्दी आंतों का ये काम होता है कि शरीर में आने वाले खाने का हर हिस्सा सही से इस्तेमाल हो और उससे एनर्जी जनरेट की जाए। लेकिन मेनोपॉज के समय आंतों का सही से फंक्शन नहीं होता है और इसलिए कई तरह की पाचन संबंधित समस्याएं सामने आ जाती हैं।

क्यों मेनोपॉज के समय होती है अपच और आती है उल्टी?

शरीर में जब एस्ट्रोजन लेवल ज्यादा होता है तो कॉर्टिसॉल नामक एक स्ट्रेस हार्मोन कम हो जाता है। लेकिन जब मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है तो कॉर्टिसोल बढ़ता है और ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ जाते हैं और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इसके कारण उल्टी, कब्ज या दस्त, पेट फूलना और वजन बढ़ने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। शरीर में एड्रेनालिन नामक हार्मोन भी बढ़ जाता है जिससे पाचन संबंधित समस्याएं होती हैं। इसी के साथ, आंतों से ज्यादा एसिड निकलता है जिसके कारण पेट दर्द जैसी समस्याएं होती हैं।

vomiting and nausea during menopause

मेनोपॉज के समय कैसे अपच और उल्टी की समस्या को दूर किया जाए?

जिस तरह की अपच और डाइजेशन संबंधित समस्या महिला को हो रही होगी उसी के हिसाब से डॉक्टर दवाएं भी सजेस्ट करेगा। इसके अलावा, कुछ डाइट और लाइफस्टाइल संबंधित बदलाव भी होंगे जो डाइजेस्टिव समस्याओं को कम करने में मदद करेंगे।

खाते समय जल्दबाज़ी न करें-

अगर आप जल्दी-जल्दी खाना खा रही हैं या फिर किसी व्यस्त दिन में पैक करवाकर चलते-चलते कुछ खा रही हैं तो वो आपके डाइजेस्टिव सिस्टम पर ज्यादा असर कर सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपकी एनर्जी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग काम करते हुए डाइवर्ट हो जाती है। इससे सही फंक्शन नहीं होता।

अपनी डाइट चुनते समय रखें ध्यान-

आप अगर ये सोचकर खाएं कि एक दिन में आपको कितना और क्या खाना है तो वो कई समस्याएं हल कर सकता है। ऐसी डाइट चुनें जो डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए कम काम छोड़े। कॉफी, एल्कोहॉल, शक्कर आदि डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए अच्छे नहीं हैं इसलिए ऐसी चीज़ों से दूर रहना ही सही सुझाव है।

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खाने को पूरी तरह चबाएं-

पाचन क्रिया सही रखने का एक अच्छा प्रोसेस चबाना भी हो सकता है। अगर आप अपना खाना सही से नहीं चबाते हैं तो डाइजेस्टिव सिस्टम को ज्यादा काम करना पड़ेगा और खाने को पचने में समय लगेगा। इसी के साथ, ये पाचन संबंधित कई और समस्याएं भी सामने ला सकता है क्योंकि खाना सही तरीके से टूटेगा नहीं और आंतों को ज्यादा मेहनत करनी होगी।

प्रीबायोटिक ड्रिंक-

अगर आप प्रीबायोटिक ड्रिंक्स लेती हैं तो इससे आंतों में गुड बैक्टीरिया (जो पाचन क्षमता को सही रखता है) पनपता है। इससे आपकी कई डाइजेस्टिव समस्याएं दूर हो जाती हैं।



उल्टी होना, जी मिचलाना या पाचन संबंधित समस्याएं होना मेनोपॉज से गुजर रही महिलाओं के लिए सामान्य लक्षण है। अगर आप अपनी डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतों को ध्यान में रखेंगी तो ये सारी समस्याएं अपने आप ही खत्म हो जाएंगी।

डॉक्टर प्रीती देशपांडे (M.S.(OBGY), FICOG, Endoscopy Training IRCAD (France)) को उनकी एक्सपर्ट एडवाइस के लिए धन्यवाद।

Source, Reference and Recommended Reading:
https://www.avogel.co.uk/health/menopause/symptoms/digestive-problems/