मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने सालों के बाद मैं अपना वजन कम कर पाऊंगी। लेकिन मैं अपने अंदर बदलाव लाई और 17 सालों के बाद मैं सही वेट और साइज में आ गई। वास्‍तव में इसके लिए evolved सही शब्‍द है। मेरा जन्‍म दिल्‍ली की एक joint family में हुआ। सभी cousins में सबसे छोटी होने के कारण, मुझे हमेशा बहुत सारा प्‍यार और दुलार मिला है। मुझे इस बात की जानकारी बिल्‍कुल भी नही थी कि 10 महीने की उम्र से मुझे Nephrotic Syndrome (किडनी संबंधी बीमारी) की समस्‍या है। Repeated relapses के कारण मुझे हमेशा स्‍टेरॉयड पर रहना पड़ता था और हालत खराब होने पर मुझे हॉस्पिटल में भर्ती भी होना पड़ता था।

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मेरे पिता ने मुझे दूसरा जीवन दिया

मां आपको इस दुनिया में लाती है, लेकिन जब चार साल की उम्र के आसपास मुझे किडनी फेल्‍योर अटैक की आशंका थी तो मेरे पिता ने मुझे दूसरा जीवन दिया था। इसके बाद मैं बहुत ही pampered child बन गई, जिसका मूड हमेशा बदलता रहता था और वह बहुत ही बातूनी बच्‍चा बन गया। मेरा स्‍कूल भी एक और घर बन गया था, जहां सभी teachers मेरी अच्‍छे से केयर और पढ़ाई में हेल्‍प करती थी। मैं अपनी किशोरावस्‍था में खुश नहीं थी क्‍योंकि मेरी बॉडी और फेस हमेशा दवाओं के साइड इफेक्‍ट के कारण फूला रहता था। मैं किसी भी तरह की फिजीकल एक्टिविटी नहीं कर सकती थी क्‍योंकि इससे मेरी किडनी पर असर पड़ सकता था।

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Gut feeling और strong will power

जब मैं 17 साल की थी और स्‍टेरॉयड पूरी तरह से बंद हो गये, तब मैंने जन्‍म के बाद पहली बार अपनी हड्डियां और बॉडी को शेप में महसूस किया। मैंने मॉडलिंग, कथक और बहुत से co-curriculum activities की और निश्‍चित रूप से डेटिंग करना भी शुरू कर दिया। इस समय के दौरान मैंने अपने पति से मुलाकात की और मेरी लाइफ बदल गई। लेकिन शादी के बाद भी मेरे में बदलाव जारी रहा और तब भी जब मैंने conceive किया था। मुझे डॉक्‍टरों ने सलाह दी थी कि अपनी लाइफ को खतरे में न लें और प्रेग्‍नेंसी के साथ जाएं क्‍योंकि ऐसी स्‍टेज आ सकती है जहां दोनों में से एक को बचाया जा सकता है। लेकिन फिर भी अपनी gut feeling और strong will power से अपनी प्रेग्‍नेंसी के 9 महीने के सफर को जारी रख पाई। भगवान की कृपा से, मैंने एक सुंदर बच्‍चे को जन्‍म दिया और उसका नाम अथर्व (भगवान गणेश) रखा।

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झगड़े कभी खत्‍म ही नहीं होते थे

मैंने अथर्व के जन्‍म के 6-7 महीनों के बाद बहुत ज्‍यादा वेट बढ़ा लिया था। मुझे हाइपोथारॉयड हो गया और एक बार फिर से very high dose स्‍टेरॉयड लेने पड़े। मेरे लिए बॉडी का 85 kgs वेट संभाल पाना बेहद मुश्किल था। इसका असर मेरी शादी पर पड़ रहा था क्‍योंकि मेरे पति यह महसूस किये बिना कि यह सिर्फ एक artificial वेट गेन है और धीरे-धीरे नीचे आ जाएगा, मुझे पब्लिक में अपमानित करते थे। इस बात को लेकर हम अक्‍सर लड़ते थे, कभी-कभी तो लड़ाई बहुत ज्‍यादा ही हो जाती थी। कुछ समय बाद हम लोगों ने अलग-अलग रहना शुरू कर दिया क्‍योंकि झगड़े कभी खत्‍म नहीं होते थे। 2015 में हम लोगों का तलाक हो गया, और जहां बच्‍चे की custody मेरे पूर्व-पति ने ले ली थी।


 
मैं पूरी तरह से बिखर गई थी और डिप्रेशन में चली गई थी, लेकिन मेरे पेरेंट्स और कुछ बेहद ही करीबी दोस्‍तों ने इन सबसे बाहर आने में मेरी मदद की। मैंने तीन महत्‍वपूर्ण्‍ चीजों के साथ शुरुआत की पहला- वेट लॉस, दूसरा एमबीए और तीसरा जॉब पाना। मैंने एमबीए पूरा करने में कामयाब रही और खुद से नौकरी ढूढ़ी। जब 2014 में स्‍टेरॉयड बंद हो गए और थायरॉयड कंट्रोल हो गया तो मेरा वजन 69 किलो हो गया।

फिट रहने की journey

फिट रहने की मेरी journey शुरू हुई। मैंने marathon के लिए खुद को trained करने के लिए running करना शुरू किया, आउट डोर वर्कआउट किया और हेल्थी डाइट प्‍लान बनाया। करीब 1.5 साल की जोरदार ट्रेनिंग के बाद मैंने अपना वजन 57 kilos कर लिया जो इन 17 वर्षों में खो गया था। मेरे डॉक्‍टरों ने कहा कि अब और weight ना घटाएं क्योंकि अब फैट नहीं bones lose होगीं। अब मैं सिर्फ पावर योग, साइकिलिंग और ब्रिस्क वाकिंग करती हूं। मैं 8-9 महीने बाद अपना वर्कआउट बदलना पसंद करती हूं क्‍योंकि इससे मैं बोर नहीं होती और मेरी बॉडी को नई मसल्‍स महसूस होती है।

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जहां चाह वहां राह

फिट रहने के लिए आपको अपने मनपसंद sports और activity को करते रहना चाहिए। लंबे समय के बाद मैंने अपने खोई हुई बॉडी और शेप को पाया और जिसे मैं बहुत पसंद करती हूं। मैं अब बहुत खुश हूं और खुद को फिट रखने की कोशिश करती हूं। मेरी लाइफ मेरे काम और मेरे वर्कआउट के आसपास घूमती है। मैं किसी से कोई उम्‍मीद नहीं रखती और मेरे पास कुछ खोने के लिए भी नहीं हैं। वह महिलाएं जिन्‍हें लगता हैं कि वह कभी वापिस शेप में नहीं आ सकती हैं, प्‍लीज फिर से सोचें क्‍योंकि यह आपके दिमाग में है। आपको खुद को पुश करना होगा और हेल्‍दी डाइट को सख्‍ती से अपनाना होगा। क्‍योंकि जहां चाह वहां राह है। आज से सोचना शुरू करें- एक बेहतर कल का मतलब हेल्‍दी कल है।

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