Vitamin A की कमी से लेकर इसके फायदों तक, यहां मिलेगी पूरी जानकारी

आमतौर पर रोजाना के खान-पान के मामले में लोग प्रोटीन, कार्ब्स और फैट के संतुलन का ध्यान तो रखते हैं, लेकिन वे आवश्यक विटामिंस और मिनरल्स को भूल जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। विटामिन ए एक ऐसा पोषक तत्व है, जो बच्चों के शारीरिक विकास, आंखों की रोशनी और इम्यून सिस्टम की मजबूती के लिए जरूरी है। यह एनीमिया से बचाव में भी मददगार होता है। विटामिन ए से जुड़ी जानकारी के बारे में हमें फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा की न्यूट्रिशनिस्ट और डॉक्टर नमिता नाडर बता रही हैं।
विटामिन ए की कमी के प्रमुख लक्षण
अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति कैसे पहचाने कि उसके शरीर में इसकी कमी है, यहां बताए गए लक्षणों से इसकी कमी को पहचाना जा सकता है।

- बार-बार इंफेक्शन- जिनके शरीर में विटमिन ए की कमी होती है, उन्हें सामान्य स्वस्थ लोगों की तुलना में कोई भी संक्रमण, जैसे-सर्दी-खांसी या बुखार और पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं ज्यादा परेशान करती हैं, क्योंकि ऐसे लोगों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है।
- कमजोर नजर- इसकी कमी होने पर बच्चों में नाइट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) की समस्या होती है यानी ऐसे बच्चे रात के समय देखने में अक्षम होते हैं, कई बार बड़ों में भी यह समस्या देखने को मिलती है। इसकी कमी से आंखों में जलन और सूजन हो सकती है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति की आंखों में बहुत रूखापन नजर आता है। इससे पलकों के किनारों पर गंदगी जमा हो सकती है। यही रूखापन कॉर्निया और रेटिना को नष्ट कर देता है, जो नाइट ब्लाइंडनेस का कारण बन सकता है।
- त्वचा में रूखापन- विटमिन ए की कमी के कारण लोगों की त्वचा बहुत ज्यादा रूखी हो जाती है। उन्हें रैशेज और खुजली जैसी समस्याएं भी परेशान करती हैं। अक्सर उनके होंठ फटे रहते हैं। सिर में डैंड्रफ और बालों का झड़ना जैसे लक्षण भी नजर आते हैं।
- प्रजनन तंत्र संबंधी समस्याएं- यदि किसी महिला या पुरुष के शरीर में विटामिन ए की कमी हो, तो इसकी वजह से पारिवारिक जीवन की शुरुआत में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि महिलाओं के शरीर में एग्स और पुरुषों में स्पर्म काउंट को निर्धारित करने में इसकी अहम भूमिका होती है।
- विकास में रुकावट- विटामिन ए को शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और हड्डियों के विकास के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जिन बच्चों के शरीर में इसकी कमी होती है, उनका शारीरिक विकास धीमी गति से होता है। इसके अलावा मुंह में दाने निकलना, यूटीआई, सांस की नली में इंफेक्शन, कोई भी घाव देर से भरना, पेट में कीड़े होना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण भी नजर आते हैं।
विटामिन ए की कमी क्यों होती है?
शरीर में विटामिन ए की कमी का सबसे बड़ा कारण कुपोषण है, जो लोग पर्याप्त मात्रा में दूध, दही, रंग-बिरंगी सब्जियों और फलों, जैसे-गाजर, टमाटर, पपीता, आम, संतरा, लाल-पीली शिमला मिर्च, हरी पत्तेदार सब्जियों के अलावा अंडा और मछली का सेवन नहीं करते, उनमें विटामिन ए की कमी की आशंका बनी रहती है।
- किसी इंफेक्शन की वजह से भी शरीर में विटामिन ए के अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है। इससे भी शरीर में इसकी मात्रा घटने लगती है।
- नवजात शिशुओं के लिए भी विटामिन ए बहुत जरूरी होता है। मां के दूध से उन्हें यह पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। जिन शिशुओं को किसी वजह से मां का दूध नहीं मिल पाता, बाद में उनके शरीर में विटामिन ए की कमी के लक्षण नजर आ सकते हैं।
- अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या शिशु के जन्म के बाद किसी महिला के शरीर में विटामिन ए की कमी हो, तो बच्चे को भी ऐसी समस्या हो सकती है।
विटामिन ए की कमी की किन्हें होती है आशंका
बच्चों और बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, इसलिए उनमें इसकी आशंका अधिक रहती है। किसी गंभीर बीमारी से लंबे समय तक जूझ रहे लोगों को भी ऐसी समस्या हो सकती है, प्रेग्नेंट महिलाओं को सामान्य की तुलना में ज्यादा मात्रा में विटामिन ए की जरूरत होती है, क्योंकि गर्भस्थ शिशु के दिल, फेफड़ों और किडनी की संरचना तैयार करने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए, उनमें इसकी कमी की आशंका बनी रहती है। लिवर और दिल की बीमारी के बाद शरीर में इसके अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए ऐसी बीमारियों के बाद लोगों के शरीर में विटामिन ए की कमी हो सकती है।
विटामिन ए की कमी के क्या हैं नुकसान?
अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इसकी कमी से नाइट ब्लाइंडनेस के अलावा सीलिएक डिजीज यानी गेहूं से होने वाली एलर्जी, पीलिया, लिवर सिरोसिस और महिलाओं के यूट्रस में सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके कारण शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, इसलिए इसकी कमी के कारण गंभीर स्थिति में व्यक्ति को कैंसर और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।

विटामिन ए के प्रमुख स्रोत
शिमला मिर्च, ब्रोकली और पालक सहित सभी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन ए मौज़ूद होता है। आप सैलेड या सूप के रूप में इनका सेवन कर सकते हैं।
- अगर आप विटामिन ए की कमी से बचना चाहते हैं, तो लाल, पीले और ऑरेंज कलर को हमेशा याद रखें। गाजर, टमाटर, चुकंदर, कद्दू और शकरकंद जैसी सभी सब्जियों में बीटा कैरोटीन नामक एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है, जो विटामिन ए के निर्माण में सहायक होता है।
- सभी मौसमी फलों को विटामिन ए का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है, साथ ही उनमें पानी के साथ घुलनशील विटामिंस और मिनरल्स की भरपूर मात्रा होती है। संतरा, आम और पपीता जैसे फलों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। इसलिए, इन्हें अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
- अगर ड्राई फ्रूट पसंद हो, तो खुबानी का सेवन भी फायदेमंद साबित होगा। हर तरह के डेयरी और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स दूध, दही, छाछ, मक्खन, घी और अंडा आदि विटामिन ए के बहुत अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इनका सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि ये चीजें बिल्कुल ताजी हों अन्यथा, इनसे स्टमक इंफेक्शन हो सकता है।
विटामिन ए से जुड़े चेकअप और ट्रीटमेंट
जब शरीर में कुछ ऐसे लक्षण नजर आएं, जो इसकी कमी की ओर संकेत देते हों, तब डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में इसके सही लेवल का पता लगाया जा सके। आमतौर पर खान-पान की आदतों में सुधार लाकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मरीज को इसकी गोलियां देते हैं। अगर बच्चों में इसकी कमी हो, तो निश्चित अवधि के अंतराल पर उन्हें ड्रॉपर से विटामिन ए की खुराक भी दी जाती है। अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में रंग-बिरंगे फलों और हरी पत्तेदार सब्जियों को प्रमुखता से शामिल करें।
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विटामिन ए की किसे है कितनी जरूरत?
विटामिन ए की जरूरत हर उम्र में अलग-अलग होती है। इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं-

नवजात शिशुओं के लिए- जन्म के बाद से छह माह की उम्र तक प्रतिदिन 400 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है।
- सात महीने से एक साल की आयु वाले बच्चों को हर रोज 500 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है।
- 4 से 8 वर्ष की आयु वाले बच्चों को 400 माइक्रोग्राम विटामिन ए दिया जाना चाहिए।
- 9 से 13 वर्ष की आयु वाले बच्चों को प्रतिदिन 600 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है।
- 14 से 18 वर्ष के लड़कों को प्रतिदिन 900 और लड़कियों को 700 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है।
युवाओं के लिए- 19 वर्ष से अधिक उम्र वाले पुरुषों को प्रतिदिन 900 माइक्रोग्राम और महिलाओं को 770 माइक्रोग्राम विटामिन ए की आवश्यकता होती है।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए- इन्हें प्रतिदिन 1200 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है। लैक्टेशन पीरियड में महिलाओं को 1300 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है।
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नोट: आमतौर पर विटामिन ए की जरूरत रंग-बिरंगे फल-सब्जियों, मिल्क प्रोडक्ट्स, अंडा, मछली और चिकन के सेवन से पूरी हो जाती है। फिर भी अगर किसी व्यक्ति के शरीर में विटामिन ए की कमी हो, तो डॉक्टर सप्लीमेंट के माध्यम से उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बगैर अपने मन से कोई दवा न लें।
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लेखक- विनीता
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