सदियों से भारत में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और कावेरी नदी धार्मिक आस्था के केंद्र रही हैं। ऐसी आज भी मान्यता है कि इन नदियों में डुबकी लगाने से कई पापों से मुक्ति मिल जाती है। आज भी भारत के कई राज्यों में इन नदियों की पूजा की जाती है। आप वाराणसी को ही ले लीजिए, यहां आज भी हर शाम गंगा नदी की आरती की जाती है। इसी तरह मध्य प्रदेश में भी नर्मदा नदी की पूजा की जाती है। लेकिन, क्या आपने कभी ये सोचा है कि इन का उद्गम कहां से होता है, किन-किन राज्य से होकर ये गुजरती हैं और इन्हें किस-किस नाम से जाना जाता है। ऐसी ही कुछ और दिलचस्प बातें आज हम आपको इस लेख में बताएंगे। तो फिर देर किस बात की, चलिए शुरू करते हैं इस अनोखे सफर को।

गंगा नदी

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धार्मिक आस्था से जुडी किसी नदी का नाम अगर सबसे पहले लिया जाता है तो वो है गंगा नदी का। आज भी भारत में ये मान्यता है कि इस नदी में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। आपको बता दें कि गंगा नदी हिमालय से निकलती है और वाराणसी, प्रयाग और हरिद्वार जैसे धार्मिक जगहों से होती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है। ( वो 5 जगह जहां गंगा नहीं होती है मैली) आज भी उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में हर शाम गंगा नदी की आरती की जाती है। इस नदी को 'गंगा मां' 'गंगा मईया' और 'देवी' जैसे कई उपनाम दिए गए हैं। आपको ये भी बता दें कि इस नदी की लम्बाई लगभग 2,525 किलोमीटर है और यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी नदी है।  

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यमुना नदी

धार्मिक किताबों में यमुना नदी को भगवान श्री कृष्णा की संगनी कहा जाता है। आज भी ब्रजवासी यमुना नदी को 'माता' मानते हैं। पौराणिक कथाओं में यमुना को भक्ति का प्रतीक माना गया है। यमुना नदी यमुनोत्री से निकलती है और प्रयाग में आकर गंगा नदी में मिल जाती है। यमुना नदी दिल्ली, आगरा और इटावा से होते हुए प्रयाग में मिलती है। इस नदी की लम्बाई लगभग 1,376 किलोमीटर है।  इसे 'यमुना मैया' उपनाम से भी जाना जाता है। पुराण और उपनिषद की किताब में इस नदी के बारे में आपको कई बार जिक्र सुनाने को मिल जाएगी। 

नर्मदा नदी

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नर्मदा नदी महाकाल पर्वत के अमरकंटक स्थान से निकलती है। नर्मदा भी गंगा और यमुना नदी की तरह भारत में काफी धार्मिक महत्व रखती है। भारत के मध्य प्रदेश में इस नदी की आज भी पूजा भी की जाती है। नर्मदा नदी 'रेवा नदी' की नाम से भी जानी जाती है। यह प्रमुख तौर पर मध्य प्रदेश और गुजरात में बहती है। इस नदी के बारे में ये भी मान्यताएं हैं कि इसकी परिक्रमा करने से कई पाप मिट जाते हैं, और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस नदी की लम्बाई लगभग 1312 किलोमीटर है।(विदेश में भी स्थित हैं कई प्रसिद्ध मंदिर)  यह अमरकंटक से निकलकर पश्चिम दिशा की तरफ बहती हुई खम्बात की खाड़ी में मिल जाती है। 

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ब्रह्मपुत्र नदी

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भारत में ब्रह्मपुत्र नदी को सबसे प्राचीन नदियों में से एक माना जाता है। यह नदी तिब्बत के मानसरोवर झील से निकलती है। ब्रह्मपुत्र भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम से होती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है। इस नदी को तिब्बत में 'सांपो', अरुणाचल में 'डीह' और असम में 'ब्रह्मपुत्र' नाम से पुकारते हैं। इसी तरह यह चीन में 'या-लू-त्सांग-पू', 'चियांग' और 'यरलुंग ज़ैगंबो जियांग' नाम से जानी जाती है। बांग्ला में यह जामुन नदी के नाम से भी जानी जाती है। इस नदी को असम का शोक नदी भी कहा जाता है। संस्कृत और अन्य कई धार्मिक ग्रंथों में इस नदी को ब्रह्मा का पुत्र माना जाता है। इस नदी की कुल लम्बाई लगभग 2900 किलोमीटर है  और यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।  

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कावेरी

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साउथ में सबसे प्रमुख नदी कावेरी है। यह ब्रह्मगिरि पर्वत से निकलती है। यह कर्नाटक और तमिलनाडु से होती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है। दक्षिण भारत में इसे सबसे पवित्र नदी माना जाता है। कावेरी नदी के किनारे बसा हुआ शहर तिरुचिरापल्ली हिंदुओं के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी है। (कर्नाटक की यह जगह है बेहद खूबसूरत) साउथ में इसे 'दक्षिण भारत की गंगा' नदी भी कहते हैं। इस नदी की कुल लम्बाई लगभग 800 किलोमीटर है।

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