भारत में नदियों का इतिहास काफी पुराना है। सदियों से नदियों का पवित्र जल न जाने कितने लोगों को पवित्र करता आ रहा है और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करता आ रहा है। धीरे-धीरे समय बदल गया और लोगों के रहने का तरीका भी बदल गया, लेकिन नदियों ने अपना रुख नहीं बदला और आज भी निरंतर बहती जा रही हैं। ऐसी ही पवित्र नदियों में से एक है गोदावरी नदी। जी हां, अन्य नदियों की तरह गोदावरी नदी का भी अपना एक अलग इतिहास और कहानी है।

भारत में गंगा के बाद सबसे बड़ी नदियों में से एक गोदावरी नदी दक्षिण भारत की एक सबसे प्रमुख नदी है| इसे दक्षिण गंगा भी माना जाता है। इसकी उत्पत्ति पश्चिमी घाट में त्रयंबक पहाड़ी से हुई है। मुख्य रूप से यह नदी महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है। आइए जानें इस पवित्र नदी की अनोखी कहानी और इसका इतिहास जो आपको कई रोचक तथ्यों से अवगत कराएगा। 

गोदावरी नदी का उद्गम स्थान 

origion of river godavari

गोदावरी, दक्षिण वाहिनी गंगा, महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट के ब्रह्मगिरी पहाड़ियों में 1067 मीटर की ऊंचाई पर निकलती है और पश्चिम गोदावरी जिले के नरसापुरम में बंगाल की खाड़ी से मिलने के लिए दक्षिण पूर्व में 1465 किलोमीटर से अधिक की यात्रा जारी रखती है। अन्य भारतीय नदियों की तरह, गोदावरी की उत्पत्ति एक शिव मंदिर, त्र्यंबकेश्वर से हुई है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। त्रयंबकेश्वर के बाद और नासिक से कुछ दूर पहले ही चक्रतीर्थ नामक एक कुंड है, यहीं से गोदावरी एक नदी के रूप में बहती है। इसलिए बहुत से लोग चक्रतीर्थ को ही गोदावरी का प्रत्यक्ष उद्गम स्थान मानते हैं। 

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इन राज्यों से होकर गुजरती है 

प्रायद्वीपीय भारत में सबसे लंबी नदी, तीन राज्यों, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरती है, जबकि इसके बेसिन में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से और ओडिशा शामिल हैं। यह 3 कृषि जलवायु क्षेत्रों, 6 कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों से होकर गुजरती है और जैव विविधता और समुदायों की एक आश्चर्यजनक सारणी का समर्थन करती है। गोदावरी बेसिन को 60 मिलियन से अधिक लोग अपना घर मानते हैं। बेसिन में महाराष्ट्र के नासिक, नागपुर, वर्धा, नांदेड़ और चंद्रपुर और तेलंगाना में भद्राचलम, निजामाबाद, मंचेरियल और रामागुंडम, आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी और नरसापुर और मध्य प्रदेश में सिवनी और बालाघाट जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं।

गोदावरी नदी का धार्मिक महत्व 

river godavari fact

इस नदी को अपनी पवित्रता की वजह से गंगा की बहन से कम नहीं माना जाता है और यह भारत की सबसे पवित्र 7 नदियों में से एक है।नासिक शहर धार्मिक रूप से न केवल इस दक्षिण वाहिनी गंगा के जन्म स्थान के रूप में महत्वपूर्ण है, जहां उन्होंने अरब सागर में गिरने से इनकार कर दिया था, बल्कि रामायण के साथ शहर के गहरे जुड़ाव के कारण भी यह महत्वपूर्ण है। नासिक को दंडकारण्य का एक हिस्सा माना जाता था जहां भगवान राम लगभग 14 वर्षों तक वनवास में रहे थे। नदी के किनारे तपोवन जैसे स्थानों पर आज भी पूजे जाने वाले इस प्राचीन मिथक की झलक मिल जाती है। नासिक में गोदावरी के तट पर कालाराम मंदिर भी है, जहां 1930 में, बाबासाहेब अम्बेडकर ने मंदिर में प्रवेश करते हुए कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह शुरू किया था, जो अब तक दलित वर्गों के लिए प्रतिबंधित था। वास्तव में, गोदावरी अपने मूल में ही कई उल्लेखनीय घटनाओं की साक्षी है। नांदेड़ में अपनी मध्य पहुंच में, तख्त श्री हजूर साहिब नदी के किनारे की शोभा बढ़ाते हैं जहां गुरु गोबिंद सिंह ने अंतिम सांस ली थी। यह स्थान सिख धर्म के पांच पवित्र स्थानों में से एक है।

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गोदावरी नदी का इतिहास 

गोदावरी के इतिहास की बात की जाए तो विशेषज्ञों का मानना है कि इसका नामकरण तेलुगु भाषा के शब्द ‘गोद’ से हुआ है, जिसका अर्थ मर्यादा होता है। इसकी एक कहानी के हिसाब से एक बार महर्षि गौतम ने घोर तप किया था। इससे रूद्र प्रसन्न हो गए थे और उन्होंने एक बाल के प्रभाव से गंगा को प्रवाहित किया था। गंगाजल के स्पर्श से एक मृत गाय पुनर्जीवित हो गयी थी। इसी कारण इसका नाम गोदावरी पड़ा था। ऋषि गौतम से संबंध जोड़े जाने के कारण इसे गौतमी के नाम से भी जाना जाता हैं। इस नदी में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं, इसलिए इसको “वृद्ध गंगा” या “प्राचीन गंगा” के नाम से भी जाना जाता है।गोदावरी की सात धारा वसिष्ठा, कौशिकी, वृद्ध गौतमी, भारद्वाजी, आत्रेयी और तुल्या अतीव प्रसिद्ध है। सात भागों में विभाजित होने के कारण इसे सप्त गोदावरी भी कहते हैं।(भारत की 10 सबसे बड़ी और पवित्र नदियां )

इस तरह नदियों की जब भी बात की जाती है तो गोदावरी नदी का अपना अलग स्थान और पवित्रता है जो इसे अन्य नदियों की ही तरह ख़ास बनाता है। 

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Image Credit: Pinterest and Guru Shots