गांव के बारे में आपकी सोच क्या है? एक ऐसा इलाका जहां शहरी सुख-सुविधाएं नहीं होती हैं, हरियाली होती है, खेतों में लोग काम करते हैं, मिट्टी के घर होते हैं, गोबर से लीपा हुआ घरों का आंगन होता है, इंसानों से ज्यादा जानवर होते हैं और भी बहुत कुछ। जब भी गांव की बातें होती हैं तो वहां स्कूल-कॉलेज या बैंक की नहीं बल्कि देसी और साधारण रहन-सहन की बात होती है, लेकिन अगर हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएं जो देश का ही नहीं शायद दुनिया का सबसे अमीर गांव है तो आपका क्या ख्याल होगा?

आज हम बात कर रहे हैं गुजरात के मधापार गांव की जिसके अंदर 17 बैंक हैं जिनमें गांव वालों का ही 5000 करोड़ रुपया जमा है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इसे गांव क्यों कहा जा रहा है तो मैं आपको बता दूं कि इसकी आबादी सिर्फ 92000 ही है। इस हिसाब से अगर देखा जाए तो इस गांव के हर नागरिक के पास 15 लाख रुपए से ज्यादा हैं। 

madhpar and village

गांव में लगभग 7600 घर हैं जिनमें ये सभी लोग रहते हैं और यहां गांव वाले खुद ही अपने खेतों की देखरेख करते हैं। इन्हें बेचा नहीं गया है और न ही बाहरी शहरों की ओर जाने की कोशिश की जाती है। 

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कहां स्थित है मधापार गांव?

गुजरात का कच्छ जिला अपने सफेद रेगिस्तान के साथ-साथ एक गांव के लिए भी प्रसिद्ध है। ये गांव है मधापार जो इसी जिले में स्थित है। इसका ऐतिहासिक महत्व भी माना जाता है क्योंकि इसे 12वीं सदी में कच्छ के मिस्त्री कम्युनिटी द्वारा स्थापित किए 18 गांवों में से एक माना जाता है। इन्हीं मिस्त्रियों ने गुजरात के अहम मंदिर और इमारतों का निर्माण किया था। धीरे-धीरे मधापार ने तरक्की की और यहां सन 1884 में पहला लड़कों का स्कूल आया था। इसके बाद 1900 में यहां लड़कियों का स्कूल भी खोला गया था। यहां अलग-अलग कम्युनिटी ने बसना शुरू कर दिया और अब गुजरात की सभ्यता का एक अहम हिस्सा ये गांव बन गया है। 

madhpar gujarat

कैसे गुजरात का ये छोटा सा गांव बन गया शहरों से भी ज्यादा अमीर?

गुजरात का ये गांव समृद्ध बना क्योंकि यहां के लोगों ने अपने गांव की फिक्र करना नहीं छोड़ा। दरअसल, यहां के लोगों के परिवारों से कोई न कोई विदेश में जाकर बसा है जिनमें से अधिकतर अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीका, खाड़ी देशों का हिस्सा बने हैं। हालांकि, गांव के लोग बाहर चले गए, लेकिन उन्होंने अपने गांव की चिंता नहीं छोड़ी और परिवार और गांव को समृद्ध बनाने के लिए पैसों का इंतज़ाम शुरू कर दिया। 

रिपोर्ट्स के अनुसार 1968 में लंदन में यहां के लोगों ने मधापार विलेज असोसिएशन बनाई जिसे कच्छ मधापार कार्यालय भी कहा जाता है। इसे सिर्फ इसलिए स्थापित किया गया था ताकि बाहर रहने वाले मधापार के नागरिक एक दूसरे से जुड़ें और गांव के बारे में बात कर सकें। 

गांव की है अपनी वेबसाइट-

madhpar website

इस गांव की अपनी वेबसाइट है जो https://madhapar.uk/ नाम से है। इस वेबसाइट में आप गांव से जुड़ी सारी डिटेल्स भी जान सकते हैं और साथ ही साथ यहां मौजूद बहुत सारे टूरिस्ट अट्रैक्शन की जानकारी भी ले सकते हैं। इस वेबसाइट के अनुसार इस गांव में 1858 में स्थापित किया गया शंकर मंदिर भी है जिसकी मान्यता बहुत है। इस गांव में दो तालाब भी मौजूद हैं।  

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इस गांव में हर सुविधा है मौजूद- 

गुजरात के इस गांव में हर सुख-सुविधा मौजूद है और गांव वाले अपनी जमीनों का खास ख्याल रखते हैं। बाहर गए लोग यहां पैसे भेजते हैं और यहां के विकास की जिम्मेदारी भी उठाते हैं।  

मधापार में मौजूद लोगों ने खुद को इस तरह से विकसित किया जैसा कई लोग सोच भी नहीं सकते थे। आज यहां डैम, हरियाली, तालाब, कॉलेज, स्कूल, अस्पताल, बैंक सब कुछ है।  

ऐसा हर भारतीय को सोचना चाहिए कि वो अपनी जड़ों को न भूले और अपने देश की उन्नती में योगदान दे। मधापार एक अनूठा उदाहरण है जो कई लोगों को प्रेरणा दे सकता है।  

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