गुरूग्राम का नाम जेहन में आते ही मॉल्स से लेकर पब और नाइटक्लब में घूमने का ख्याल मन में आता है। यह एक बिजी शहर है, जहां पर लोग अक्सर वीकेंड पर घूमना पसंद करते हैं। वहीं, दूसरी ओर पर्यटक भी यहां की जीवंत लाइफ को देखने व महसूस करने के लिए यहां आते हैं। लेकिन मॉडर्न गुरूग्राम में कुछ ऐसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जिनके बारे में अमूमन लोगों को पता ही नहीं होता है और इसलिए पर्यटक इस शहर के ऐतिहासिक महत्व को जानने से वंचित रह जाते हैं।

हो सकता है कि आपने भी गुरूग्राम घूमने का प्लॉन बनाया हो और आप वहां पर मॉल पर शॉपिंग करने के लिए जाना चाहते हों, लेकिन आपको अपनी ट्रिप में गुरूग्राम के कुछ बेहतरीन ऐतिहासिक स्थलों का दौरान भी अवश्य करना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको गुरूग्राम के कुछ  ऐतिहासिक स्थानों के बारे में बता रहे हैं-

फर्रुखनगर किला-

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फर्रुखनगर किला का निर्माण फर्रुखनगर के पहले नवाब फौजदार खान ने 1732 में एक भव्य गढ़ के रूप में करवाया था। यह एक विशाल अष्टकोणीय संरचना है जो मुगल शैली की वास्तुकला को प्रदर्शित करती है। किले की सबसे प्रभावशाली विशेषताओं में दिल्ली दरवाजा या दिल्ली गेट है। इसके अलावा, किले में झज्जरी दरवाजा और पाटली दरवाजा के साथ प्रवेश द्वार के तीन प्रवेश मार्ग बनाता है। आज इस किले का अधिकांश भाग खंडहर हो चुका है, लेकिन यह अभी भी गुरूग्राम के टॉप ऐतिहासिक स्थानों में से एक है।

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शीश महल-

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शीश महल गुरूग्राम में घूमने के लिए सबसे अच्छी ऐतिहासिक जगहों में से एक है। इस महल का निर्माण फौजदार खान ने 18वीं सदी में करवाया था। इस महल को दो मंजिला संरचना के रूप में डिज़ाइन किया गया था। इस महल में एक मंडप भी है जिसमें कम से कम 12 प्रवेश द्वार हैं। महल के अंदर कई खूबसूरत शीशों का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण इसका नाम शीश महल रखा गया। महल परिसर में फर्रुखनगर के शहीदों के लिए बनाया गया एक स्मारक भी है, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए 1857 के विद्रोह में भाग लिया था।

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जामा मस्जिद-

जामा मस्जिद गुरूग्राम के फर्रुखनगर में स्थित है। फर्रुखनगर की जामा मस्जिद फौजदार खान के बेहतरीन आर्किटेक्चर का एक और शानदार नमूना है। यह मस्जिद लाल बलुआ पत्थर से बनी है और इसमें गुंबद और मीनारें हैं। एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें लाल बलुआ पत्थर से बने दो स्लैब हैं जो 13 वीं शताब्दी के अरबी शिलालेखों को दर्शाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये दोनों स्लैब मूल रूप से यहां लाए जाने से पहले सुल्तानपुर स्थित एक प्राचीन मस्जिद के थे।

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सेठानी की छत्री-

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सेठानी की छत्री फर्रुखनगर शहर के झज्जर रोड पर दो मंजिला छतरी के आकार का एक विस्तृत स्मारक स्मारक है। यह एक स्तंभ गुंबद है। इस जगह की सबसे आकर्षक विशेषता यहां की रंगीन चित्रकला है जो स्मारक की छत पर खुदी हुई है और भगवान कृष्ण के जीवन का वर्णन करती है। सीलिंग फ्रेस्को के भीतर एक शिलालेख विक्रम संवत 1918, यानी 1861 ई. का है। इसमें प्रत्येक मंजिल पर आठ आर्च्ड शेप्ड एंट्रेस है और इन पर खूबसूरत फ्लोरल डिजाइन हैं। छत्री में एक आर्च्ड ओपनिंग भी है जो इस स्थान को अधिक ब्राइट और हवादार बनाता है। यह स्मारक एक समय में बहुत जीवंत था। लेकिन रखरखाव की कमी और लापरवाही के कारण आज इसकी वर्तमान स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि इस स्मारक पर अभी भी उस असाधारण वास्तुकला को देख और महसूस किया जा सकता है जो कभी उस पर की गई थी।

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