महाबलीपुरम को तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय और सुंदर शहरों में शुमार किया जाता है। वैसे तो महाबलीपुरम में घूमने की कई बेहतरीन जगहें हैं, लेकिन अगर आप महाबलीपुरम में हैं और आपने वहां के मंदिरों का दौरा नहीं किया तो आपका घूमना अधूरा ही रह जाएगा। महाबलीपुरम के मंदिरों की खासियत और महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर स्थित मंदिरों के कारण ही महाबलीपुरम आज एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इनमें से प्रत्येक मंदिर एक वास्तुशिल्प आश्चर्य है। अगर आप पुराने डिजाइनों और नक्काशियों के मंदिरों को देखना चाहती हैं तो आपको महाबलीपुरम के मंदिरों को जरूर देखना चाहिए। तो चलिए आज हम आपको महाबलीपुरम के कुछ बेहतरीन मंदिरों के बारे में बता रहे हैं-

शोर मंदिर

 mahableshwer inside

ग्रेनाइट से निर्मित इस मंदिर में तीन गर्भगृह हैं, जिनमें से दो भगवान शिव और एक भगवान विष्णु को समर्पित हैं। सिंगल रॉक कट स्ट्रक्चर का यह एक बेहतरीन उदाहरण है। मंदिर का वास्तविक नाम ज्ञात नहीं है, लेकिन समुद्र से निकटता को देखते हुए, इसे शोर मंदिर कहा जाता है। आकर्षक तथ्य यह है कि मौजूदा मंदिर सात मंदिरों के परिसर में से एकमात्र शेष है।

इसे जरूर पढ़ें: बेहद खूबसूरत है उत्तराखंड का हिल स्टेशन हर्षिल, जरूर जाएं यहां घूमने

कृष्णा मंदिर

 mahableshwer inside

यह समुद्र तट के पास महाबलीपुरम के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह 16 वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य तक एक ओपन-एयर मंदिर हुआ करता था। मंदिर की दीवारें लोगों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने वाली कृष्ण की कहानी को दर्शाती हैं। इस गुफा मंदिर में कई लोग दैनिक दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

इसे जरूर पढ़ें: वीकेंड पर घूमने के लिए बेस्ट हैं ये जगहें, दोस्तों के साथ बिताएं सुृकून के पल

एटिरानाचंदा गुफा मंदिर

 mahableshwer inside

इस मंदिर का वास्तुशिल्प आश्चर्यजनक तो है ही, साथ ही यह महाबलीपुरम के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मंदिर में एक ओपन एयर शिवलिंग है, जिसके ठीक सामने नंदी बैल की मूर्ति है। नंदी की मूर्तिकला के पास, जहाँ पर सीढ़ी समाप्त होती है, वहां एक पत्थर पर महिषासुरमर्दिनी का चित्रण करते हुए राक्षस महिषासुर का वध करता है। इसके बगल में दुर्लभ धरा लिंग है, जो काले, चमकदार पत्थर से तराशा गया है। इसके ठीक पीछे की दीवार पर भगवान शिव सोमस्कंद के रूप में अंकित हैं। उनके दोनों ओर उनके त्रिमूर्ति अवतार में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा हैं। (अगर भगवान शिव ने यह कहानी ना सुनाई होती तो अमरनाथ गुफा ना होती)

स्टालसयाना पेरुमल मंदिर

 mahableshwer inside

महाबलीपुरम के मंदिरों के इतिहास में, इस मंदिर का एक विशेष स्थान है। 108 विष्णु मंदिरों में से, जिसका उल्लेख प्रमुख रूप से तमिल संतों द्वारा किया गया है, यह उनमें से एक है। यह मंदिर स्टालसयाना पेरुमल अवतार और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। यहां दो अलग-अलग मंदिर हैं - उनमें से प्रत्येक के लिए एक समर्पित है। यह मंदिर भूतनाथ अज़वार का जन्मस्थान भी है। इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है। मंदिर का उल्लेख कई ऐतिहासिक पुस्तकों और लोककथाओं में किया गया है।

वराह गुफा मंदिर

 mahableshwer inside

यह एक रॉक-कट गुफा मंदिर है जो कोरोमंडल तट पर स्थित है। यह मंदिर 7 वीं शताब्दी ईसा पूर्व का है और भारतीय रॉक-कट वास्तुकला का आदर्श उदाहरण है। दक्षिण भारत का यह मंदिर एक अन्य यूनेस्को विश्व धरोहर है। पूरे मंदिर में बौद्ध डिजाइन के बहुत प्रभावशाली तत्व देखने को मिलते हैं। अपने आप में मंदिर छोटा है लेकिन फिर भी यहां की वास्तुकला आपको बेहद प्रभावित करेगी। इस कारण से, यह महाबलिपुरम में जाने के लिए बेहतरीन जगहों में से एक है।

Recommended Video

करुकाथम्मन मंदिर

 imahableshwer nside

करुकाथम्मन मंदिर सीमाओं पर स्थित है। मंदिर देवी करु कथा अम्मन को समर्पित है। उसकी मूर्ति में कुछ अनूठी विशेषताएं हैं। मूर्ति अपने पैरों के नीचे दानव को दबाए हुए बहुत सारे हथियारों के साथ बैठी हुई प्रतीत होती है। महाबलीपुरम में दूसरों की तुलना में यह एक छोटा मंदिर है। यह एक प्रसिद्ध, पुराना और पारंपरिक मंदिर है।

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: edge, rgyan, optimatravels, live.staticflickr, dianamalar, wikimedia, tripadvisor