13वीं सदी का रुद्रेश्वर मंदिर, जिसे रामप्पा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. भारत के सबसे नवीनतम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल हुआ है। पिछले महीने ही इस 800 साल पुराने मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 44 वें सत्र में, दर्जा दिया गया था। इस मंदिर की ऐसी कुछ खासियत हैं, जो इसे अलग बनाती है। विश्व धरोहर के रूप में नाम दर्ज होना बहुत बड़ी बात है और इस मंदिर में ऐसी क्या खासियत हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं, आइए इस लेख में जानें।

40 साल में बना था मंदिर

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इस मंदिर का निर्माण काकतीय काल के दौरान 1123 से 1323 के बीच हुआ था और इसका निर्माण रेचर्ला रूद्र ने, जो कि काकती गणपति देव के जनरल थे, की देखरेख में बना था। कहा जाता है कि निर्माण 1213 सीई में शुरू हुआ था और लगभग 40 वर्षों तक जारी रहा। इस मंदिर में रामलिंगेश्वर स्वामी को देवता के रूप में पूजा जाता है। इस वॉल्ड कॉम्प्लेक्स के अंदर यह मुख्य शिव मंदिर है। यह काकतीय कला और वास्तुकला के प्रमुख उदाहरणों में से एक है।

भारत का अतीत बताती हैं इसकी नक्काशी

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मंदिर की दीवार के साथ-साथ इसके स्तंभ पर भी विस्तृत नक्काशी है। इसके अलावा, कुछ आंकड़े हैं और ये भी विस्तृत नक्काशी के साथ हैं। रामप्पा मंदिर के तीनों ओर चार आकृतियां हैं। यानी कुल बारह अंक। ये आंकड़े डांसिंग महिलाओं के हैं। यदि आप धातु की नक्काशी को अपनी उंगलियों या हाथों से बजाएंगे, तो उससे मधुर संगीत की आवाज सुनी जा सकती है।

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सांस्कृतिक परंपरा का असाधारण प्रमाण

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रामप्पा मंदिर को तीन मानदंडों के तहत नामित किया गया था, जो थे- मानव रचनात्मक प्रतिभा की उत्कृष्ट कृति, मानव मूल्यों के एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रदर्शन, समय के साथ या दुनिया के एक सांस्कृतिक क्षेत्र में वास्तुकला के विकास पर और प्रौद्योगिकी, स्मारकीय कला, नगर नियोजन या परिदृश्य डिजाइन के आधार पर, मगर इसे तीसरे मानदंड के लिए विरासत का टैग दिया गया था। वह था "एक सांस्कृतिक परंपरा का साधारण प्रमाण, जो जीवित हो या जो गायब हो गई है"। (भुवनेश्वर के प्राचीन मंदिरों के बारे में जानें)

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बनाने वाले के नाम पर पड़ा मंदिर का नाम

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जी हां, इस मंदिर का नाम किसी भगवान के नाम पर नहीं, बल्कि इसके आर्किटेक्चर को बनाने वाले के नाम पर पड़ा है। मंदिर में बीम, ग्रेनाइट और डालराइट से बने नक्काशीदार खंभे और छतों के भारीपन को कम करने के लिए विशेष रूप से झरझरा ईंटों से बना एक सीढ़ीदार टावर है। काकतीय साम्राज्य की प्रतीकात्मक नक्काशी से सुसज्जित, मंदिर 6 फीट ऊंचे तारे के आकार के मंच पर खड़ा है। इस खूबसूरत मंदिर को बनाने वाले रामप्पा थे, इसलिए इसे रामप्पा मंदिर के नाम से जाना जाता है।

सभी मंदिरों में आपने नंदी की बैठी प्रतिमा देखी होगी, लेकिन इस मंदिर में नंदी की प्रतिमा को खड़ी पोजीशन में बनाया गया है। इसकी अद्भुत और विचित्र शैली इसे खास बनाती है और इसलिए इस मंदिर को हेरिटेज का दर्जा मिला। उम्मीद है आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। ऐसे ही फेमस मंदिरों के बारे में जानने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

 

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