दक्षिण भारत में प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल में ऐसे कई मंदिरों का निर्माण हुआ जो आज विश्व मंच पर प्रसिद्ध हैं। केरल का पद्मनाभ मंदिर, तेलंगाना का श्री रामप्पा मंदिर, तमिलनाडु का रामेश्वरम मंदिर और कर्नाटक में मौजूद श्री विरुपाक्ष मंदिर। ये कुछ ऐसे दक्षिण भारतीय मंदिर हैं जिनके बारे में अधिक बताने की ज़रूरत नहीं है।

तमिलनाडु में मौजूद मीनाक्षी अम्मन मंदिर इन्हीं विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। वैगई नदी के दक्षिण तट पर मौजूद यह मंदिर दक्षिण भारत के साथ-साथ समूचे भारत के लिए सबसे पवित्र जगहों में से एक है। अद्भुत वास्तुकला और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर हर भक्त के लिए बेहद ही खास है। आज इस लेख में हम आपको मीनाक्षी मंदिर के बारे में कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

मीनाक्षी मंदिर का इतिहास

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मीनाक्षी मंदिर का इतिहास लगभग 7 वीं शताब्दी से भी प्राचीन माना जाता है, एक तरह से 35 हज़ार साल से भी प्राचीन। बताया जाता है कि इस मंदिर की संरचना में सबसे पहले मदुरई के राजा विश्वनाथ नायक के द्वारा परिवर्तन किए गए थे। साल 1560 से लेकर 1655 के बीच इस मंदिर में कई बार परिवर्तन किए जाए। इसमें वसंत मंडपम, किलिकोकोंडू मंडपम और मीनाची नायकर मंडपम के गलियारों का निर्माण भी किया गया। हालांकि, इस बीच इस मंदिर पर कई बार आक्रमण भी किए गए थे।

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मीनाक्षी मंदिर की पौराणिक कथा 

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मीनाक्षी मंदिर से एक नहीं बल्कि कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। कहानी है कि इस प्राचीन और विश्व प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण इंद्रा देव ने करवाया था, क्योंकि उन्हें पापों का प्रायश्चित करना था। एक अन्य पौराणिक कथा ये है कि देवी पार्वती एक बेटी के रूप में प्रकट हुई थी, जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया। एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप में राजा मलयध्वज की पुत्री यानि पार्वती से विवाह रचाने के लिए इसी जगह प्रकट हुए थे। (दक्षिण में स्थित 4 शक्तिपीठ)

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मंदिर की वास्तुकला

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इस मंदिर की संरचना मूल रूप से लगभग 1623-1655 के बीच बनाई गई थी। इस मंदिर में लगभग 14 गेटवे टॉवर हैं, जिनकी ऊंचाई लगभग 450 मीटर है। इस टावर में सबसे ऊंचा दक्षिणी टॉवर है माना जाता है। मुख्य मंदिर तीन परिसर से घिरा हुआ है, जो देखने में बेहद ही खूबसूरत लगता है। इस मंदिर की बनावट इस कदर प्रचलित है कि कई लोग इसे सात अजूबों में से एक भी मानते हैं। इस मंदिर में भगवान गणेश जी की भी एक मूर्ति है, जो एक ही पत्थर से तराशी गई है।

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दर्शन के लिए टिप्स

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मंदिर से निकटम बस स्टैंड पेरियार है, जहां से आप टैक्सी पकड़कर जा सकते हैं। यहां से मीनाक्षी मंदिर के लिए नियमित बस चलती रहती है। मदुरै हवाई हड्डे से ही आप यहां आसानी से जा सकते हैं। ध्यान रहे कि इस मंदिर परिसर में धूम्रपान, शराब और तंबाकू करना माना है और भीड़ होने के चलते सामान की सुरक्षा का ध्यान रखना होता है। (ये हैं देवी के प्रसिद्ध मंदिर)

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