नवरात्रि को शुरू होने में अब सिर्फ 6 दिन बचे हैं। नवरात्रि पूरे विधि-विधान के साथ देशभर में मनाया जाता है, कुछ लोग इस दौरान माता रानी के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं। भारत में कई प्रसिद्ध देवी मंदिर हैं, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा लगी रहती हैं। वैष्णों माता मंदिर, कामख्या मंदिर, शक्तिपीठ आदि के अलावा देवी कई मंदिर हैं, जहां दर्शन के लिए आप जा सकते हैं। बता दें कि नवरात्रि में देवी मां के दर्शन करने के खास महत्व हैं।

अगर आप नवरात्री में देवी मां के दर्शन के लिए बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं तो इन प्रसिद्ध मंदिरों में जा सकते हैं। खास बात है कि यह सभी मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठ में से एक हैं, जहां हर वक्त श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती हैं। बता दें कि 14 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती हैं। कुछ लोग 9 दिनों तक व्रत रखते हैं। ऐसे में आप भी भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में माता के दर्शन के लिए प्लान बना सकती हैं।

मंगला गौरी मंदिर

mangala mandir temple

बिहार के गया में स्थिति 51 शक्तिपीठों में से एक मां मंगला गौरी काफी प्रसिद्ध मंदिर है। देवी सती को समर्पित इस मंदिर में मां मंगला की अदभुत प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर भस्मकुट पर्वत पर स्थित है। मां मंगलागौरी मंदिर के गर्भगृह में मां सती के स्तन का एक टुकड़ा है। नवरात्रि के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती हैं। सुबह से लोग लाइन लगाकर मां मंगला गौरी का दर्शन करने आते हैं।

कैसे जाएं: मां मंगला गौरी जाने के लिए आपको गया से कई लोकल गाड़ियां मिल जाएंगी। गया पहुंचने के लिए ट्रेन और फ्लाइट दोनों सुविधाएं मौजूद हैं। एयरपोर्ट से मां मंगला गौरी मंदिर सिर्फ 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। हालांकि, अगर आप ट्रेन से आ रही हैं तो आपको यहां तक पहुंचने के लिए 17 किलोमीटर का सफर तय करना होगा।

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महा काली देवी मंदिर

maha kali tmeple

महा काली देवी मंदिर को हरसिद्धि मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। उज्जैन में स्थित यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थिति है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती का ऊपरी होंठ हरसिद्धि मंदिर पर गिरा था। ग्रह कालिया, महालक्ष्मी और सरस्वती के साथ-साथ कई देवियों के रूपों की यहां पूजा की जाती है। नवरात्रि में उज्जैन जाने का प्लान बनाएं तो महा काली देवी मंदिर दर्शन के लिए जरूर जाएं।

कैसे जाएं: उज्जैन जाने के लिए आप फ्लाइट या फिर ट्रेन कोई भी तरीका चुन सकते हैं। वहां पहुंचने के बाद आपको महा काली देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए लोकल सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी। टैक्सी, ऑटो या फिर कैब 24 घंटे उपलब्ध होते हैं, जिसके जरिए आप मंदिर तक पहुंच सकते हैं। वहीं एयरपोर्ट से मंदिर करीब 56 किलोमीटर दूर है।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर

tripura sundari mandir

उदयपुर स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के विध्वंस के नृत्य के दौरान सती का दाहिना पैर गिरा था। अगरतला से लगभग 60 किमी दूर पुराना शहर उदयपुर में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण सन 1501 में महाराजा धन्य माणिक्य ने करवाया था। यहां भक्त मां काली की पूजा करते हैं, जो सोरोशी के रूप में विराजमान हैं।

कैसे जाएं: उदयपुर आप बस, ट्रेन या फिर फ्लाइट किसी भी तरीके से पहुंच सकते हैं। इसके बाद आपको यहां से कैब या फिर बस सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी, जिसके जरिए आप मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

महालक्ष्मी मंदिर

maha laxmi mandir

नवरात्रि में मुंबई वासी ही नहीं बल्कि दूर-दूर से लोग महालक्ष्मी मंदिर दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि में यहां अलग ही रौनक देखने को मिलती हैं। कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर प्रमुख शक्ति पीठ में से एक है, जहां माता सती का बायां हाथ गिरा था। यहां भक्त अपनी मनोकामनाएं माता के सामने रखते हैं। यहां महालक्ष्मी की छवि काले पत्थर में खुदी हुई है, यही नहीं नवरात्रि के महीनों के दौरान यहां भव्य उत्सव का आयोजन भी किया जाता है।

कैसे जाएं: कोल्हापुर पहुंचने के लिए आपको ट्रेन और बस दोनों सुविधाएं मिल जाएंगी। मुंबई से कोल्हापुर पहुंचना काफी आसान है। कोल्हापुर पहुंचने के बाद आपको रेगुलर टैक्सी और बस दोनों मिल जाएंगे, जिसके जरिए मंदिर पहुंच सकते हैं।

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अम्बाजी माता मंदिर

ambaji mandir

गुजरात में स्थित अम्बाजी माता मंदिर बेहद प्रसिद्ध होने के साथ-साथ प्राचीन भी है। मां अम्बा भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति लोगों की अपार श्रद्धा है। इस मंदिर की खासियत है कि इसमें भवानी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां पर एक श्रीयंत्र स्थापित है। जिसे बेहद खास तरीके से सजाया गया है, जिसे देखने पर लगता है मां खुद विराजमान है। नवरात्रि में जाने के लिए जगह बेहद खास है। गुजरात के इस मंदिर में लोग दूर-दूर से मां के दर्शन के लिए आते हैं।

कैसे जाएं: अम्बाजी माता मंदिर गुजरात और राजस्थान के सीमा पर स्थित है। माउंट आबू से यह 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसके लिए आप बस और ट्रेन दोनों सेवाएं मिल जाएंगी। वहीं गुजरात से आपको यहां तक पहुंचने के लिए बस और टैक्सी दोनों सेवाएं मिल जाएंगी। अगर आप माउंट आबू से जा रही हैं तो बेहतर है कि बस सेवाएं लें।

 

उम्मीद है कि आपको इन प्रसिद्ध मंदिरों से जुड़ी जानकारी अच्छी लगी होगी। साथ ही, आपको यह आर्टिकल कैसा लगा, हमें कमेंट कर जरूर बताएं और इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी के साथ।