अधिकतर घरों में मैदा प्रयोग किया जाता है और इसे भले ही आप कितना भी हानिकारक मान लें, लेकिन इसका इस्तेमाल जरूर किया जाता है। पिज्जा से लेकर मुगलई पराठे तक मैदा तो भारतीय किचन का अभिन्न अंग बन चुका है और समोसे-कचोरी जैसे स्नैक्स की जान होता है। लेकिन कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि आखिर ये बनता किस चीज़ से है। 

कई लोगों को लगता है कि ये साबूदाना बनाते समय बनाया जाता है (यकीन मानिए मैंने लोगों को ऐसा कहते सुना है), कई का मानना है कि ये पूरी तरह से सिंथेटिक प्रोडक्ट है, लेकिन आपको मैं बता दूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है। मैदा असल में गेहूं से ही बनता है और इसका प्रोसेस काफी हद तक साधारण होता है। अब आप सोचेंगे कि गेहूं का आटा, दलिया, सूजी को तो फिर भी हेल्दी माना जाता है, लेकिन आखिर मैदा इतना अनहेल्दी क्यों है?

तो चलिए अपनी आज की स्टोरी में हम मैदा और उससे जुड़ी कुछ बातें करते हैं। 

कैसे बनता है मैदा?

जैसे कि हम आपको बता चुके हैं ये गेहूं से बनता है, लेकिन गेहूं का सिर्फ सफेद हिस्सा जिसे endosperm कहा जाता है उसका ही इस्तेमाल होता है। ये असल में प्रोसेस्ड और ब्लीच किया हुआ गेहूं का आटा ही होता है जिसे इतना प्रोसेस किया जाता है कि गेहूं का जरूरी फाइबर भी दूर हो जाता है। 

maida at home

इसे जरूर पढ़ें- क्या आप जानते हैं कैसे बनता है मखाना? जानें इससे जुड़े मिथक

फैक्ट्री में कैसे बनाया जाता है मैदा?

फैक्ट्री में मैदा बनाने की शुरुआत सबसे पहले गेहूं के सिलेक्शन से होती है और इसमें ये सभी स्टेप्स शामिल किए जाते हैं। 

पहला स्टेप-

सबसे पहला स्टेप होता है सही तरह के गेहूं को लेकर उसकी सफाई करना। मैदा बहुत ही रिफाइंड प्रोडक्ट है और इसलिए ये जरूरी है कि गेहूं की सफाई भी सही से हो। कई तरह के फिलटर लगाए जाते हैं और गंदगी, धूल, खरपतवार, पत्थर, हस्क सब कुछ निकाला जाता है। इस प्रोसेस में काफी समय लगता है और बिल्कुल साफ गेहूं को ही मैदा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

दूसरा स्टेप-

एक बार गेहूं साफ हो गए फिर उन्हें अलग स्टेप में लेकर जाते हैं और भूसी को पूरी तरह से हटाया जाता है। इस प्रोसेस में सिर्फ गेहूं के दानों का ही प्रयोग होता है। 

तीसरा स्टेप-

अब गेहूं को ग्राइंड किया जाता है और इसे एक बार नहीं बल्कि दो बार हाई प्रेशर रोलर से ग्राइंड किया जाता है। ऐसे में एक बहुत ही महीन पाउडर निकल कर आता है। हालांकि, ये अभी भी मैदा नहीं बनता है इसे अभी भी काफी रिफाइनिंग की जरूरत होती है। 

चौथा स्टेप-

इस स्टेप से ही मैदे की ब्लीचिंग और केमिकल प्रोसेसिंग की जाती है। यही कारण है कि इसका रंग गेहूं के आटे से अलग होता है और ये चिपचिपी कंसिस्टेंसी के साथ गूंथा जाता है जिससे ब्रेड, पिज्जा बेस, समोसा आदि बनाया जाता है। अगर इसे इतना प्रोसेस नहीं किया जाएगा तो ये सारी चीज़ें टूटने लगेंगी और ठीक तरह से नहीं बन पाएंगी। 

पांचवा स्टेप-

अब मैदा अलग-अलग फिल्टर प्रोसेस से होकर पैकेजिंग में जाता है। इस प्रोसेस में वो सभी पार्टिकल्स निकाले जाते हैं जो पहले की प्रोसेसिंग में नहीं निकल पाए। पैकिंग के बाद मैदे को बेचने के लिए मार्केट्स तक पहुंचाया जाता है।  

maida uses

इसे जरूर पढ़ें- क्या आप जानते हैं कैसे बनता है साबूदाना? ऐसे किया जाता है उसे प्रोसेस 

आखिर क्यों मैदे को माना जाता है अनहेल्दी? 

मैदे को अनहेल्दी माने जाने के पीछे कई कारण शामिल हैं- 

  • ये नेचुरल इंग्रीडिएंट से बनता है फिर भी इसमें से सारे गुण निकाल लिए जाते हैं। 
  • मैदे में फाइबर नहीं होता है इसलिए ये पचाने में दिक्कत होती है। 
  • क्योंकि इसमें गेहूं के गुण नहीं होते हैं और ये सिर्फ स्टार्च की तरह होता है इसलिए इसे ज्यादा खाने से परेशानी हो जाती है। 
  • अगर मैदा ज्यादा खाया जाए तो मोटापे की परेशानी भी होती है।  

यही कारण है कि मैदे को सिर्फ स्वाद का साथी कहा जाता है। हालांकि, अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मैदा कितना नुकसानदेह भी है। तो कोशिश करें कि इसे कम ही अपनी डाइट में शामिल किया जाए।  

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।