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जानें मध्य प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी का इतिहास और इससे जुड़े रोचक तथ्य

भारत के मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है बेतवा नदी। इस नदी के उद्गम से लेकर इसकी जलधारा में न जाने कितनी विशेषताएं समाई हुई हैं।   
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Published -29 Apr 2022, 16:39 ISTUpdated -29 Apr 2022, 16:57 IST
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betwa river history

हमारे देश भारत में नदियां अपने प्रवाह में बहती जाती हैं और उनकी अलग कहानी है। भारत के उत्तर में जहां गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का साम्राज्य है वहीं दक्षिण क्षेत्रों में कृष्णा और गोदावरी नदियों ने अपना अस्तित्व बनाया है। वास्तव में नदियों का साम्राज्य सदियों पुराना है और हर एक नदी की एक अनोखी कहानी है।

सदियां बदलती गईं लेकिन नदियों ने अपना स्थान और दिशा नहीं बदली। भारत को यदि नदियों का देश कहा जाए तो यह वास्तव में अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों के साथ इस देश में न जाने कितनी ही नदियां हैं जो अपने जल से लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती आ रही हैं। ऐसी ही एक पवित्र और खूबसूरत नदियों में से है मध्य प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी। आइए जानें बेतवा नदी के इतिहास और उद्गम की कहानी। 

बेतवा नदी का उद्गम स्थान  

betwa river origin

बेतवा नदी, उत्तर भारत में, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के उत्तर में विंध्य रेंज से निकलती है।  यह आम तौर पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों के माध्यम से उत्तर पूर्व में बहती है और 380-मील बहने के बाद हमीरपुर के पूर्व में यमुना नदी में मिल जाती है। इसका लगभग आधा हिस्सा बुंदेलखंड की ऊपरी भूमि में टूटने से पहले मालवा पठार के ऊपर से गुजरता है। बेतवा नदी की जामनी और धसान नदियां मुख्य सहायक नदियां हैं।

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मध्य प्रदेश का मुख्य आकर्षण है बेतवा नदी 

बेतवा नदी का बेसिन 77° से 81° पूर्वी देशांतर और 23°8' से 26°0' उत्तरी अक्षांश तक फैला है। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में बेतवा नदी 470 मीटर की ऊँचाई तक पहुँचती है। नदी 590 किलोमीटर की यात्रा करके 106.68 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद हमीरपुर के पास यमुना नदी में मिलती है। बेतवा नदी का कुल जलग्रहण क्षेत्र 46,580 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें मध्य प्रदेश में 31,971 वर्ग किलोमीटरऔर उत्तर प्रदेश में 14,609 वर्ग किलोमीटर। इस नदी का बेसिन एक प्लेट नुमा आकृति लिए हुए है जिसके चारों ओर बालुई पत्थर की पहाड़ियां हैं। नदी की 14 प्रमुख सहायक नदियां हैं, जिनमें से 11 पूरी तरह से मध्य प्रदेश में हैं और जिनमें से तीन आंशिक रूप से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश की फेमस जगहें )दोनों में स्थित हैं। इसलिए यदि इस नदी को मध्य प्रदेश की शान कहा जाए तो ये गलत नहीं होगा। जहां एक तरफ यह नदी मध्य प्रदेश के ओरछा की खूबसूरती में चार चांद लगाती है वहीं उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को भी अपने जल से सींचती है। 

बेतवा की सहायक नदियां 

betwa river facts

बेतवा नदी की दो प्रमुख सहायक नदियां हैं: हलाली और धसान। 180.32 किलोमीटर की लंबाई के साथ, हलाली सबसे लंबी सहायक नदी है। पूरे बेसिन में वर्षा भिन्न होती है, ऊपरी पहुंच में 100 सेमी से 140 सेमी और निचले इलाकों में 80 सेमी से 100 सेमी तक होती है। बेतवा बेसिन में औसत वार्षिक वर्षा 110 सेमी होती है। बेतवा और यमुना नदियों का संगम उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में ओरछा के पास स्थित है। नदी के सम्मान में, भारतीय नौसेना ने अपने एक युद्धपोत का नाम आईएनएस बेतवा रखा है।

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बेतवा नदी का इतिहास 

बेतवा नदी को संस्कृत में वेत्रावती के नाम से जाना जाता है।  इस नदी का उल्लेख महाभारत महाकाव्य में भी मिलता है। यह नदी यमुना की सहायक नदियों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में चेदि साम्राज्य की राजधानी इसी नदी के तट पर स्थित थी। नदी अपने स्रोत से यमुना के साथ संगम तक 590 किलोमीटर लंबी है, मध्य प्रदेश में 232 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश में शेष 358 किलोमीटर है। बेतवा नदी बोर्ड की स्थापना 1976 में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों के बीच 1973 में हस्ताक्षरित एक अंतर-राज्य समझौते के अनुसार की गई थी। 

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बेतवा नदी के समीप कई धार्मिक स्थल 

betwa river attractions

बेतवा नदी को मध्य प्रदेश की सबसे प्रमुख नदी माना होता है और इसका प्राचीन नाम वेत्रवती था। यह नदी यमुना की एक सहायक नदी है जिसे मध्यप्रदेश की पूजनीय नदी कहा जाता है। इस नदी के किनारे पर कई धार्मिक स्थल सुसज्जित हैं। यह नदी मध्य प्रदेश के भोपाल, विदिशा, गंजबासौदा, बीना कुरवाई, ओरछा जैसे जिलों से बहते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा में बहती है। बेतवा नदी उत्तर प्रदेश के झांसी, चिरगांव, हमीरपुर क्षेत्र में बहती है और हमीरपुर जिले के पास यमुना नदी से मिल जाती है। इस नदी के किनारे प्राचीन तीर्थ देखने के लिए मिलते हैं। इसके समीप प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित है जहां पर श्री राम के चरण चिन्ह देखने को मिलते हैं और ओरछा शहर में बेतवा नदी का सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। मशी प्रदेश के ओरछा से ही मुख्य रूप से बेतवा नदी के आकर्षण को देखा जा सकता है।  

वास्तव में यह नदी अपने आप में अनगिनत विशेषताओं को समेटे हुए है और देश की प्रमुख नदियों में से एक है जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कुछ जगहों को अपनी जलधारा से सदियों से लाभान्वित करती आ रही है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: wikipedia and shutterstock 

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