अगर आपका नया घर बन रहा है या आप अपने पुराने किचन में नई चिमनी लगवाना चाहती हैं या आपकी पुरानी चिमनी को आप बदलना चाहती हैं और उसकी जगह नई चिमनी लगवाना चाहती हैं तो आपको चिमनी से जुड़ी कुछ बातों के बारे में पता होना चाहिए। भारतीय रसोई से जब तक तड़के की खुशबू नहीं आती तब तक इंडियन खाने का मजा नहीं आता। हमारे यहां खानों तड़के का ज्यादा इस्तेमाल होता है। इस के अलावा फ्राई चीजे बनाना, ग्रिल करना और साथ ही रेसिपीज में मसालों का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करना। ऐसे में एक सही चिमनी ही किचन से धुआं और गंध को आसानी से निकाल सकती है। किचन में वैंटीलेशन हेतु चिमनी लगवाई जाती है।

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आजकल मार्केट में कई तरह की चिमनियां मिलने लगी है और चिमनी की बनावट में पहले से काफी सुधार आया है। लेकिन ऐसे में सही चिमनी का चयन करना बहुत जरूरी है। चिमनी खरीदने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि चिमनियां दो प्रकार की होती हैं- डक्टिंग चिमनी और डक्टलैस चिमनी।

डक्टिंग चिमनी

इस चिमनी में पीवीसी पाइप्स के जरीए धुआं और गैस किचन के बाहर निकल जाती है। इन चिमनियों की खासीयत यह होती है कि इन में मैश और बफल फिल्टर लगा होता है, जो खाना पकाते समय धुएं के साथ उड़ने वाली चिकनाहट को भी सोख लेता है। लेकिन ये चिमनियां बड़े किचन के लिए होती हैं। इन में लगने वाले पीवीसी पाइप की सैटिंग के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत होती है। यदि किचन बड़ी हो तब ही इस चिमनी का चुनाव करें। वैसे बाजार में फ्लैक्सिबल डक्ट वाली चिमनियां भी उपलब्ध हैं, जिन के डक्ट को जरूरत के हिसाब से लगाया और निकाला जा सकता है। ऐसी चिमनियां छोटे किचन में भी लगाई जा सकती हैं।

डक्टलैस चिमनी

फैन और मोटर वाली चिमनी में ग्रीस फिल्टर लगे होते हैं, जिन से धुआं निकल कर चारकोल फिल्टर में जाता है। जहां ग्रीस फिल्टर चिकनाहट सोखने की क्षमता रखता है, वहीं चारकोल फिल्टर मसालों की महक को सोख कर रसोई को फ्रैश बनाए रखता है। लेकिन यह चिमनी रसोई की गरमाहट को खत्म नहीं कर पाती है और फिर इस में लगे चारकोल फिल्टर को भी समय समय पर बदलवाना पड़ता है।

आधुनिक चिमनी

पहले के समय में चिमनी अलग हुआ करती थी जैसे- डायरेक्ट बटन वाली या फिर पुश बटन वाली। लेकिन, आजकल बाजारों में गैस सेंसर वाली चिमनी ज्यादा चल रही हैं। यदि किसी वजह आपकी गैस लिक भी हो रही हो, तो यह चिमनी औटोमैटिक स्टार्ट हो जाती हैं और गैस निकल जाने के बाद औफ भी हो जाती है। इसलिए यह चिमनी आजकल ज्यादा चलन में हैं।

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चिमनी से जुड़ी इन बातों का ध्‍यान रखें

  • पहले चिमनी का आकार अलग होता था और ज्यादातर चिमनियां पुश बटन और डाइरैक्ट बटन से चलती थीं। आजकल बाजार में डिजिटल गैस सैंसर वाली चिमनी भी आने लगी है, जिस में यदि गैस किसी कारण लीक करती है, तो चिमनी औटोमैटिक चालू हो जाती है और गैस के निकल जाने के बाद बंद भी हो जाती है। आजकल यह चिमनी ज्यादा इस्‍तेमाल में लाई जाती है। अगर आप ऑनलाइन ऑटो क्लीन चिमनी खरीदना चाहती हैं तो इसका मार्केट प्राइस 12490 रुपये है, लेकिन इसे आप यहां से बहुत ही सस्‍ते दामों 6499 रुपये में खरीद सकती हैं। 
  • चिमनी लगाने की प्रक्रिया में किचन के आकार की बड़ी भूमिका है। अगर किचन बड़ा है, तो ज्यादा सेक्शन पावर वाली चिमनी लगाना ठीक रहता है। एक अनुमान के अनुसार किचन की चिमनी को एक घंटे में दस गुना शुद्ध हवा से भरने की जरूरत होती है। इसलिए चिमनी चुनने से पहले किचन की वौल्यूम को दस से गुणा करने के बाद जो क्षेत्रफल आए, उतनी ही सक्शन पावर वाली चिमनी किचन में लगाना सही होता है।

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  • चिमनी खरीदते समय चिमनी की सक्शन पावर का भी ध्यान रखें। क्योंकि यह जितना ज्यादा होती है, किचन उतनी ही गंध और धुंआ रहित होती है। यह क्षमता चिमनी में 500 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा से 1,200 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा होती है। इस में 900 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा से 1,000 मीटर प्रति घंटा सक्शन पावर वाली चिमनी है। अगर आप घर बैठे ऑनलाइन चिमनी खरीदना चाहती हैं तो इसका मार्केट प्राइस 16990 रुपये है, लेकिन इसे आप यहां से 8595 रुपये में खरीद सकती हैं
  • किचन में चिमनी को हमेशा गैस चूल्हे से ढाई फीट की ऊंचाई पर ही लगाएं।
  • एक साल से पांच साल के अलावा लाइफटाइम गारंटी वाली चिमनी भी मिलती है। चिमनी की कीमत भी उसकी वारंटी पर निर्भर करती है। चिमनी की कीमत हजारों से लेकर लाखों तक होती है, जिसे आप अपने बजट के हिसाब से खरीद सकती हैं। एक अच्छी चिमनी दस से पद्रंह साल आसानी से चल जाती है।

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चिमनी की देखभाल कैसे करें

  • चिमनी अगर अधिक चिपचिपी हो गई है और डिटर्जेंट पानी से साफ नहीं हो रही है, तो सोडियम हाइड्रो औक्साइड या कास्टिक सोडे से साफ करें।
  • वैसे तो चिमनी की सफाई उसके इस्‍तेमाल के आधार पर की जाती है, लेकिन अगर आप साधारण खाना बनाती हैं, तो पद्रंह दिन बाद उसके फिल्टर को डिटर्जेंट मिले गर्म पानी से अच्छी तरह धोकर साफ करें और सुखा कर लगा दें। इससे फिल्टर की जाली साफ हो जाती है।
  • चिमनी की सफाई के दौरान कभी भी हार्श डिटर्जेंट से फिल्टर को न धोएं।
  • चिमनी के कुछ फिल्टर ऐसे भी होते है जिन्हें धोया नहीं जा सकता। ऐसे में चार से पांच महीने बाद उसे बदलवा लें।

Photo courtesy- (amazon.in, Roccommunity)