Close
चाहिए कुछ ख़ास?
Search

    मध्य प्रदेश में स्थित हैं मां शक्ति के ये दो शक्तिपीठ, आप भी कर सकते हैं दर्शन

    अगर आप मध्या प्रदेश में हैं, तो नवरात्रि के मौके पर देवी मां के दर्शन के लिए इन दो लोकप्रिय शक्तिपीठों की यात्रा कर सकते हैं।
    author-profile
    Updated at - 2021-10-13,13:01 IST
    Next
    Article
    famous shaktipeeth in ujjain

    भागवत पुराण के अनुसार मां शक्ति के 108 शक्तिपीठ हैं, लेकिन काली पुराण में वह 26 हैं और शिवचरित्र में 51 हैं। वहीं दुर्गा सप्तशती और तंत्र चूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। हालांकि लोग माता के 51 शक्तिपीठों को ही मानते हैं। इन शक्तिपीठों के अस्तित्व में आने की कहानी सभी को मालूम है और यह देशभर में जिन जगहों पर बने हैं, वहां लोग माता के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में जाते हैं।

    ये शक्तिपीठ जिन स्थलों में गिरे उनमें से एक भारत का दिल कहे जाना वाला मध्य प्रदेश भी है। आज इस आर्टिकल में हम आपको मध्य प्रदेश में स्थित दो खास शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं।

    शोणदेश नर्मदा शक्तिपीठ

    shondesh narmda shaktipeeth mp

    मध्यप्रदेश के अमरकंटक स्थित नर्मदा के उद्गम पर शोणदेश स्थान पर माता का दायां नितंब गिरा था। इसकी शक्ति है नर्मदा और भैरव को भद्रसेन कहते हैं। इस मंदिर के केंद्र में, मां नर्मदा की मूर्ति है और यह चारों ओर सुनहरे 'मुकुट' से घिरा हुआ है। दोनों तरफ कुछ ही मीटर की दूरी पर अलग-अलग देवी की मूर्तियां भी हैं। जिस चबूतरे पर मां नर्मदा की मूर्ति है, वह चांदी की बनी है। शोंदेश शक्तिपीठ की वास्तुकला काफी मनमोहक है। मंदिर इतने सुंदर स्थान पर स्थित है कि पास के कुंड से निकलने वाली सोन नदी के मनोरम दृश्य का आनंद लिया जा सकता है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 100 सीढ़ियों से चढ़कर  जाना पड़ता है।

    पौराणिक मान्यता

    नर्मदा देवी शोणदेश शक्तिपीठ को एक प्राचीन मंदिर माना जाता है, और यह 6000 साल पुराना बताया जाता है। यहां, देवी को नर्मदा देवी या सोनाक्षी (शोनाक्षी) के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी मरता है वह स्वर्ग जाता है। इस मंदिर में नवरात्रि, मकर संक्रांति, शरद पूर्णिमा, राम नवमी और दीपावली को बहुत बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है।

    कैसे पहुंचे

    फ्लाइट से : जबलपुर हवाई अड्डा अमरकंटक (खूबसूरत पहाड़ियों और मंदिरों से घिरा हुआ मध्यप्रदेश का अमरकंटक) का निकटतम हवाई अड्डा है। मंदिर तक पहुंचने के लिए हवाई अड्डे से टैक्सी सेवाएं और सार्वजनिक परिवहन हमेशा उपलब्ध रहते हैं।

    इसे भी पढ़ें :नवरात्रि में हिमाचल प्रदेश जाकर करें नैना देवी और ज्वाला देवी शक्तिपीठों के दर्शन

    ट्रेन से : मंदिर के आसपास तीन रेलवे स्टेशन हैं जिनसे ट्रैवल करके इस मंदिर में पहुंचा जा सकता है। पेंड्रा छत्तीसगढ़ में स्थित निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो यहां से लगभग 17 किमी दूर है। अनूपपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन भी अमरकंटक के पास है। 120 किमी दूर छत्तीसगढ़ में बिलासपुर रेलवे स्टेशन है, लेकिन देश भर के विभिन्न प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

    बस से : मंदिर तक पहुंचने के लिए बस सेवाएं और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। अमरकंटक शहडोल, उमरिया, जबलपुर, अनूपपुर, पेंड्रा रोड और बिलासपुर से विभिन्न नियमित बसों के माध्यम से मंदिर पहुंच सकते हैं।

    हरसिद्धि देवी मंदिर

    harsiddhi devi mata mandir

    माता के 51 शक्तिपीठों में से एक ऐसा चमत्कारी शक्तिपीठ है, जहां मान्यता है कि यहां स्तंभ पर दीया लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है। कहा जाता है कि इस हरसिद्धि माता मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने शुरू करवाई थी। मान्यता है कि जिस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, वह उज्जैन के रुद्रसागर तालाब के पश्चिमी तट पर स्थित है। इस मंदिर में देवी सती की सिर्फ कोहनी ही है, जिसे हरिसिद्धि देवी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में माता हरसिद्धि के आसपास महालक्ष्मी और महासरस्वती भी विराजित हैं। माता के इस पावन धाम में दो और स्तंभ है।

    इसे भी पढ़ें :नवरात्रि स्पेशल : वेस्ट बंगाल में स्थित मां शक्ति के इन दो शक्तिपीठ मंदिरों के जरूर करें दर्शन

    पौराणिक मान्याता

    हरसिद्धि माता के इस मंदिर से जुड़ी दिलचस्प कहानी है, जिसके मुताबिक सम्राट विक्रमादित्य माता के अनन्य भक्त थे, हर बारहवें वर्ष देवी के मंदिर पर आकर अपना शीश माता के चरणों में अर्पित कर देते थे, लेकिन हरसिद्धि देवी की कृपा से उन्हें हर साल एक नया सिर मिल जाता था। मान्यता है कि जब बारहवीं बार उन्होंने अपना सिर चढ़ाया तो सिर फिर वापस नहीं आया और उनका जीवन समाप्त हो गया था। मान्यता है कि मंदिर परिसर के एक कोने में 11 सिंदूर लगे मुण्ड राजा विक्रमादित्य के ही हैं।

    कैसे पहुंचे

    फ्लाइट से : निकटतम हवाई अड्डा पोरबंदर हवाई अड्डा है।

    ट्रेन से : निकटतम रेलवे स्टेशन पोरबंदर रेलवे स्टेशन है।

    बस से : यहां पहुंचने के लिए कई सार्वजनिक और निजी वाहन उपलब्ध हैं।

    Recommended Video

    अगर आप मध्य प्रदेश जाने का प्लान कर रहे हैं, तो आप माता के इन मंदिरों में दर्शन के लिए जा सकते हैं। अगर आपको यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करें और माता के अन्य मंदिरों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें हरजिंदगी।

    Image Credit: templepurohit, shrimathuraji

    बेहतर अनुभव करने के लिए HerZindagi मोबाइल ऐप डाउनलोड करें

    Her Zindagi
    Disclaimer

    आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।