नवरात्र शुरू हो चुके हैं और सभी जगह बहुत से उत्सव शुरू हो चुके हैं। इस बीच सभी नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करेंगे और फिर 10वें दिन उन्हें धूमधाम से विदा कर दिया जाएगा। इन नौ दिनों में माता के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौर और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

इस बीच भक्तजन माता के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने में दर्शन के लिए जाते हैं। अगर आप भी इस बीच माता के मंदिर जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो इस बार आपको शक्तिपीठ मंदिरों के दर्शन करने चाहिए। मां शक्ति के दूसरे रूपों के बारे में जानना चाहिए। यह तो हम सभी जानते हैं कि देवी सती के कुछ अंग जब धरती पर गिरे, तो उन जगहों पर शक्तिपीठ स्थापित हो गए। वहां उन्हीं अंगों के रूप में माता की पूजा की जाने लगी।

देवी सती के अंग कई जगहों पर गिरे थे, उनमें से एक जगह वेस्ट बंगाल है। वहां तो वैसे भी नवरात्रि का अलग माहौल होता है। ऐसे में आपको वहां जाकर इन दो शक्तिपीठ मंदिरों के दर्शन भी करने चाहिए, जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

किरीटेश्वरी मंदिर, मुर्शिदाबाद

kiriteshwar temple

इसे किरीट शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है और यह धाम बहुत खास है। हुगली नदी पर स्थित इस मंदिर में शिव और शक्ति दोनों ही निवास करते हैं। कहते हैं, इस जगह पर माता सती का किरीट यानी कि मुकुट गिरा था, जिस वजह से यह शक्तिपीठ अस्तित्व में आया। यहां माता को ‘विमला’ या ‘भुवनेश्वरी’ हैं और शिव ‘संवर्त’ हैं । इसके अलावा माता को यहां भुवनेश्वरी देवी भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इसे बेहद जागृत शक्ति स्थलों में माना जाता है और इसका पुराणों में खास महत्व है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां हर किसी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि माता के दरबार में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान को किरितेश्वरी नाम दिया गया था। यह मंदिर करीब 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है। ऐसा कहा जाता है कि जो मूल मंदिर था, वो 1405 में टूट गया था और अभी मौजूद मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में लालगोला के राजा दरपनारायण ने कराया था। जब विष्णु द्वारा देवी सती के के शरीर को विभाजित किया गया था, तब माता का मुकुट इस स्थान पर गिरा था और तभी इसे किरितेश्वर नाम दिया गया। यहां पर दुर्गा पूजा और नवरात्रों में विशेष पूजा का आय़ोजन होता है।

कैसे पहुंचे

ट्रेन से : डाहापाड़ा धाम रेलवे स्टेशन पूर्वी रेलवे क्षेत्र के हावड़ा रेलवे डिवीजन के हावड़ा-अजीमगंज लाइन पर एक हाल्ट रेलवे स्टेशन है। यह भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के मुर्शिदाबाद जिले के डाहापाड़ा गांव में स्थित है। किरीटेश्वरी मंदिर से लगभग 3.2 किलोमीटर की दूरी पर डाहापाड़ा रेलवे स्टेशन है। आप ट्रेन के माध्यम से आसानी से वहां पहुंच सकते हैं।

फ्लाइट से : नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा किरीटेश्वरी मंदिर से लगभग 239 किलोमीटर की दूरी पर है। आप यहां से कैब या लोकल टैक्सी और बसों में मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

बस से : मुशीर्दाबाद सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। कोलकाता, बर्दवान, रामपुरहाट, सूरी, बोलपुर, मालदा, कृष्णा नगर और दुर्गापुर से राज्य द्वारा संचालित बसें मुर्शिदाबाद के लिए नियमित रूप से चलती हैं। आप यहां तक रेलवे या फ्लाइट से पहुंचने के बाद बसों का ऑप्शन देख सकते हैं।

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श्री नलतेश्वरी  मंदिर, नलहाटी

nalhati shaktipeeth temple

नलहाटी शक्तिपीठ हिन्दुओं के एक लिए पवित्र स्थान है जो कि भारत के राज्य, पश्चिम बंगाल , बीरभूल जिले के रामपुरहट में स्थित है। यह मंदिर मां नलतेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। नलहाटी शक्ति पीठ आस पास का इलाका पहाड व सुन्दर वन से घिरा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वो जगह है जहां देवी शक्ति का कंठ गिरा था। (भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्थित हैं मां दुर्गा के शक्तिपीठ)

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पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती के शरीर को भाग विभाजित हुए, तो उनकी ‘उदर नली’ इसी जगह गिरी थी। ऐसा माना जाता है कि 252वें बंगाली वर्ष पर कामदेव ने इस शक्ति पीठ के अस्तित्व के बारे में सपना में देखा था और उन्होंने इस नालाहती जंगल में मां सती के ‘उदर नली’ की खोज की थी। ऐसी भी मान्यता है कि मंदिर की मूल मूर्ति के नीचे, माता का गला है, जिसमें कितना भी पानी डालो न पानी बहता है न कभी सूखता है।

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कैसे पहुंचे

ट्रेन से : नलहाटी शक्तिपीठ से लगभग 1.8 किलोमीटर की दूरी पर नलहाटी जंक्शन है, तो आप अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन से यहां के लिए ट्रेन ले सकते हैं।

फ्लाइट से : नेताजी सुभाष चंद्र हवाई अड्डा नलहाटी शक्तिपीठ से लगभग 237 किलोमीटर की दूरी पर है।

अगर आप वेस्ट बंगाल में हैं, या जाने का प्लान कर रहे हैं, तो इन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। नवरात्र के मौके पर इन मंदिरों की रौनकें भी अलग होती हैं। अगर आपको यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करें। माता रानी के ऐसे अन्य शक्तिपीठों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें हरजिंदगी।

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