घूमने के शौकीन लोगों को हमेशा ही नई जगहों की तलाश रहती है, जहां वो कुछ अलग देख सकें और कर सकें। इसके साथ ही, घूमने का मजा तब और अधिक बढ़ जाता है, जब प्राकृतिक सौंदर्य के साथ उस स्थान का कोई सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व भी हो। आज हम आपको ऐसी ही एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से घिरा पन्हाला किला के बारे में बताएंगे। जी हां, आपको बता दें कि यह किला महाराष्ट्र में स्थित है, जिसे सांपों का किला भी कहा जाता है। आखिर क्यों? आइए जानते हैं..

क्या है पन्हाला किला का इतिहास? 

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पन्हाला किला अपने उत्तर-पश्चिम में स्थित कोल्हापुर के मुख्य शहर से 20 किमी दूर स्थित है। यह किला देश में सबसे विशाल स्थान में अपना स्थान रखता है और दक्कन क्षेत्र में सबसे बड़ा है। इस किले का निर्माण सन 1178 और 1209 के बीच शिलाहार शासक भोज द्वितीय द्वारा किया गया था। यह किला बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि यहां कई राजवंश जैसे यादवों, आदिल शाहिस, बहामनी सुल्तानों आदि ने शासित किया है। इसके अलावा, इस किले को लेकर लोगों का यह भी मिथक है कि 1673 ईस्वी में इस किले पर शिवाजी महाराज ने भी शासन किया है। 

क्यों कहा जाता है सांपों का किला? 

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महाराष्ट्र में स्थित पन्हाला किले को सांपों का किला भी कहा जाता है। आपको बता दें कि इस किले को सांपों का किला इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी संरचना टेढ़ी-मेढ़ी है और सांपों के समान है। अगर आप इस किले को देखेंगे, तो आपको ऐसा लगेगा कि जैसे कोई सांप चल रहा है। (भारत में स्थित हैं कई रहस्यमयी फोर्ट्स)

इसके अलावा, पन्हाला किले को लेकर लोगों में यह भी मिथक है कि इस किले पर कभी शिवाजी महाराज का शासन हुआ करता था और वह अधिक समय तक इस किले में रहते थे। 

पन्हाला किले की कैसी है वास्तुकला? 

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अगर हम पन्हाला किले की वास्तुकला की बात करें तो, आपको बता दें कि इसे समुद्र तल से 3127 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है, जो 14 किलोमीटर तक फैला हुआ है। साथ ही, इसे बीजापुर शैली की वास्तुकला का उपयोग करके मोर की प्रकृति के साथ बनाया गया है। इस किले के नीचे सुरंग भी बनाई गई है।

यहां आपको कई प्राचीन और सुंदर मूर्तियां देखने को मिल जाएंगी। खास बात है कि ये किला अति सुंदर मूर्तियों से सजी है और इनमें हिंदू देवताओं, महावीर और अन्य जैन तीर्थंकरों के चित्र हैं। अगर आप इतिहास को जानने में रुचि रखती हैं, तो इस किला को एक्सप्लोर करना आपके लिए बेस्ट रहेगा। (भारत के 10 सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध फोर्ट्स) हालांकि, किले का अधिकांश भाग समय की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका लेकिन फिर भी इसकी संरचना काफी मजबूत और प्रभावशाली है। 

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पन्हाला किला आने का सही समय

वैसे तो आप किसी भी मौसम में यहां घूम सकते हैं लेकिन आप सितंबर से फरवरी के महीने के बीच में कभी भी यहां आ सकते हैं। यह किला पर्यटकों के घूमने के लिए प्रतिदिन सुबह से लेकर शाम तक खुला रहता है। 

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पन्हाला किले तक कैसे पहुंचे? 

पन्हाला का निकटतम शहर कोल्हापुर है, जहां से हर 2 घंटे में आने-जाने के लिए बसें चलती हैं। किले के मुख्य स्थलों तक पहुँचने के लिए आप पास के शहरों जैसे कोल्हापुर या पुणे से कैब या किराए का वाहन भी कर सकते हैं।

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