‘ताज’ की खूबसूरती कुछ ऐसी है कि इसका दीदार करने के बाद हर कोई इसकी दीवानी बन जाती हैं। कभी किसी शायर की शायरी में या फिर फिल्मों में ताजमहल की खूबसूरती के बारे में देखा और पढ़ा है लेकिन ‘ताज’ से जुड़ी कुछ ऐसी भी बाते हैं जिन्हें आपको ताज देखने टाइम जरूर नोटिस करना चाहिए। 

जैसे जब आप ताजमहल में एंट्री करती हैं तो शुरुआत में ही आपको फव्वारे लगए हुए दिखते हैं। वो सभी फव्वारे किसी पाइप से जुड़े हुए नहीं है अपितु हर फव्वारे के नीचे तांबे का एक टैंक है जो सभी एक टाइम पर भरते हैं और दबाव बनने पर एक साथ ही पानी छोड़ते हैं। है ना यह ताज से जुड़ा हुआ बहुत ही interesting fact. कुछ ऐसी ही और भी बातें हैं जो आप ‘ताज’ के बारे में नहीं जानती होंगी। 

शायद आप कई बार ताज घूमने जा चुकी हो लेकिन आपने ताममहल को पहले कभी उस तरीके से नहीं देखा होगा जिसकी बात हम कर रहे हैं। ताजमहल के बारे में कई तरह के मत पढ़ने को मिलते हैं। यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित सुंदरता की तस्वीर 'ताजमहल' न केवल इंडिया में बल्कि पूरे वर्ल्ड में अपनी पहचान बना चुका है। चलिए आपको बताते हैं ताज से जुड़े कुछ ऐसे ही interesting facts के बारे में: 

प्रसिद्ध शोधकर्ता और इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपनी शोधपूर्ण पुस्तक 'तेजोमहालय उर्फ ताजमहल' में कई ऐसी बातें लिखी हैं जो जानने के बाद आप फिर से एक बार ताज को देखने जाना चाहेंगी। 

Taj interesting facts inside

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‘ताज’ बनने के कई कारण थे 

पहला तो यह कि कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि मुमताज महल ने मौत के वक्त शाहजहां को कहा था कि मेरे बाद मेरे दफन पर एक ऐसी आलीशान इमारत बने जो बेमिसाल हो। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए ‘ताज’ जैसी खूबसूरत इमारत बनी। दूसरा कारण यह था कि शाहजहां को खुद से यह विचार आया कि उनकी सबसे प्यारी बेगम का मकबरा दुनिया में बेमिसाल हो इसलिए भी ताजमहल बनवाया गया। तीसरा कारण यह भी था कि मुमताज के प्यार में शाहजहां गिरफ्तार और उन दिनों वो किसी भी युद्द में व्यस्त नहीं थे जिस कारण खजाने में से ज्यादा से ज्यादा खर्चा करके ताजमहल जैसी इमारत को बनवाया गया। 

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क्या थी शाहजहां की इच्छा? 

शाहजहां की इच्छा् थी कि नदी के उस पार ठीक ताजमहल के पीछे महताब बाग में अपने लिए इसी शान व शौकत का एक दूसरा महल तैयार करवाऊं और दोनों को संगमरमर के पुल के जरिए मिला दूं ताकि आने वाले लोग इस मकबरे से उस मकबरे तक आसानी से चले जा सकें और इस ख्याल के मुताबिक उसने कुछ कार्रवाई शुरू भी कर दी थी। हालांकि उसके अब तक वहां कुछ-कुछ निशान भी बाकी हैं और ताजमहल से साफ नजर आते हैं। शाहजहां की इच्छा से इस बात को भी बल मिलता है कि अपने लिए उसने काले ताज को बनाने का मंसूबा जरूर बनाया था।

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ताज का चबूतरा

ताजमहल का मुख्य चबूतरा बिल्कुल नदी से लगा हुआ है जिसका आकार दोनों कोनों से 970 फीट 17 इंच और बाग से यमुना की दूरी आखिरी निर्माण तक 364 फीट और ऊपरी सतह बाग से 4 फीट है और यमुना के किनारे से साढ़े 28 फीट है। 

इस चबूतरे के बीच में 20 फीट ऊंचा संगमरमर का चबूतरा है जिसके बीच में ताजमहल की मुख्य इमारत है। इसके हर कोने की लंबाई 328 फीट 3 इंच है। सामने से और चढ़ने के लिए दो जीने आमने-सामने बने हैं। 

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चबूतरे के चारों तरफ संगमरमर की बेहतरीन महराबें और पूर्व और उत्तर और पश्चिम की ओर 3-3 कमरे बने हुए हैं और आसपास चबूतरे पर बजाय लाल पत्थर के चौपड़ का शानदार फर्श है। नदी की तरफ तहखाना बना हुआ है जिसमें उतरने के लिए दो जीने हैं। तहखाने में 14 कमरों की कतार है।

संगमरमर के चबूतरे के चारों कोनों पर संगमरमर की चार मंजिली मीनार हैं जिनकी ऊंचाई नीचे के बाग कलश की चोटी तक करीब 162 फीट और संगमरमर के चबूतरे की बुलंदी तक 102 फीट 19 इंच पर है। ये मीनारें अपनी खूबसूरती में मशहूर हैं।

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मुमताज महल की कब्र

जाली के बीच में चबूतरे पर मुमताज महल की कब्र बनी हुई है जिसमें मूसा ने पच्चेकारी कर कुरआन की आयतें लिखी हैं और पैरों की तरफ कब्र पर 'मरकद मुनव्वर अरजूमंद बानो बेगम' लिखा है। मुमताज महल की मृत्यु की तारीख 1040 हिजरी 1631 ईसवी लिखा है। 

शाहजहां की कब्र

मुमताज महल की कब्र से ही मिली हुई पश्चिम की तरफ शाहजहां की कब्र है जिसके स्थान में असमानता साफ नजर आती है। इससे साफ जाहिर होता है कि ताजमहल बनाते वक्त उसका इरादा इस जगह दफन होने का नहीं था। वरना या तो जाली कुछ बड़ी बनवाता या मुमताज महल की कब्र बजाए बीच में होने के पूर्व की तरफ होती। 

शाहजहां की कब्र के ऊपर कलमदान बना हुआ है। उनके चबूतरे निहायत खूबसूरत और बेहतरीन पच्चेकारी से सजे हैं। खासतौर से शाहजहां की कब्र पर उम्दा फूल और पत्तियां और गुलदस्ते उकेरे गए हैं।

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तहखाने की कब्रें 

मुमताज महल और शाहजहां की असली कब्रें तहखाने में हैं जिसका जीना दरवाजे के सामने ठीक नीचे की तरफ है। इस तहखाने के दरवाजे में चांदी के किवाड़ लगे थे जो बाद में उतार लिए गए। तहखाने की लंबाई 22.2 फीट है। ऊपर की तरह यहां भी बीच में मुमताज महल की और पश्चिम की तरफ शाहजहां की मजार है। 

मुमताज महल की कब्र से 6 इंच की दूरी पर पश्चिमी तरफ शाहजहां की कब्र है जिसकी कब्र के ऊपर ठीक बीच में नस्तअलीक राइटिंग में संग मूसा के अक्षरों में इबारत लिखी है। 

 

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