अगर आप ‘ताज महोत्सव’ के लिए आगरा जा रही हैं तो ‘ताज’ के अलावा भी आगरा में ऐसी जगहें हैं जिन्हें आपको जरूर देखने जाना चाहिए। यकीन कीजिए ये जगहें भी इतनी खूबसूरत हैं कि आपको अपना दीवाना बना देंगी। 

18 फरवरी को ताज महोत्सव शुरू होने वाला है और 27 फरवरी तक यह महोत्सव चलेगा। अगर आपने आज तक ताज महोत्सव नहीं देखा है तो आपको इस साल यह महोत्सव देखने जरूर जाना चाहिए। 

योगी राज में पहली बार हो रहे वार्षिक ताज महोत्सव की थीम बदल दी गई है। ताज महोत्सव इस बार भगवान राम के नाम पर आयोजित किया जा रहा है। 

ढाई दशक से हर साल आयोजित होने वाले ताज महोत्सव में हमेशा मुगल काल की झलक दिखाई देती रही है लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। ऐसे में मुगलिया अंदाज के बदले भगवान राम पर आधारित नृत्य नाटिका से ताज महोत्सव का आगाज होगा। 

ताजनगरी आगरा में जाने की हर किसी की ख्वाइश होती है। सभी चाहते हैं कि वो अपने जीवन में एक बार प्रेम की निशानी ताज को जरूर निहार सकें। वैसे तो ‘ताज’ की सुन्दरता की तुलना किसी और जगह से नहीं की जा सकती है लेकिन चलिए आपको आगरा की उन जगहों के बारे में बताते हैं जिनकी खूबसूरती भी कुछ नहीं। 

राम बाग: सबसे पुराना मुगल गार्डन 

सबसे पुराने मुगल गार्डन का नाम राम बाग है जिसे मुगल बादशाह बाबर ने 1528 में बनवाया था। इससे 5 किमी दूरी पर बाद में ताजमहल बना। रामबाग का निर्माण फारसी शैली में हुआ है और इसे आराम बाग नाम दिया गया था। 

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आगरा किला: अकबर ने यहीं बसाई अपनी राजधानी 

आगरे का किला मुगल स्थापत्य का शानदार उदाहरण है। ये किला शुरुआत में ईंटों से बना था जिसे राजपूतों ने बनवाया था। बाद में अकबर ने इस किले को नए सिरे से बनवाया और अपनी राजधानी यहीं बसाई। आगरा के किले में तमाम दर्शनीय भवन है और यहां हर शाम लाइट शो का आयोजन भी होता है। 

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सिकंदरा: यहां है अकबर का मकबरा 

मुगल बादशाह अकबर का मकबरा यही है जो 1605-1613 के बीच बनाया गया था। ये मकबरा 119 एकड़ में फैला है। बादशाह अकबर ने अपने जीते जी इस मकबरे को बनाने का आदेश जारी किया था जिसे उसके बेटे जहांगीर ने पूरा करवाया। 

जामा मस्जिद: लाल पत्थर से बनी है यह मस्जिद 

यह मस्जिद लाल पत्थर से बनी हुई है। आगरा रेलवे स्टेशन से पास में ही यह मस्जिद स्थित है। मस्जिद 130 फुट लम्बी एवं 100 फुट चौड़ी है। जामा मस्जिद में लकड़ी एवं ईंट का भी प्रयोग किया गया है। यह मस्जिद शहजा़दी जहांआरा बेगम को समर्पित है।

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एत्माद-उद-दौला: युमना नदी के किनारे इसे बनवाया था 

यमुना नदी के किनारे इसे नूरजहां ने बनवाया था। नूरजहां-जहांगीर के मुख्य मंत्री यानी वजीर रहे मिर्जा ज्ञास बेग की याद में ये बना है जिन्हें एत्माद-उद-दौला की उपाधि मिली थी। ये सफेद संगमरमर से बना है पर बनाने के दौरान लालू बालू का भी इस्तेमाल किया गया था। 

अकबरी चर्च: आगरा का फेमस चर्च है यह 

आगरा के वजीरपुरा स्थित अकबरी चर्च का खास इतिहास रहा है। सम्राट अकबर द्वारा धन और जमीन देने पर सन 1600 में जुसुइट फादर ने इसे बनवाया। जहांगीर ने बाद में उसे भव्य रूप देने के लिए धन दिया लेकिन सन् 1615 में मुगल और पुर्तगालियों के बीच मतभेद हो गए और फिर जहांगीर ने चर्च को तुड़वा दिया गया। 

मेहताब बाग: ताज को निहारने के लिए सबसे खूबसूरत है यह जगह 

ताज को देखने के लिए मेहताब बाग से सुंदर कोई जगह नहीं हो सकती। यमुना नदी के किनारे 25 एकड़ में बने मेहताब बाग से ताज की खूबसूरती देखते ही बनती है और इसे 'मूनलाइट गार्डन' के नाम से भी जाना जाता है। 

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दयाल बाग: इस बाग की स्थापना बसन्त पंचमी के दिन हुई 

दयालबाग की स्थापना राधास्वामी सत्संग के पांचवे संत आनन्द स्वोरूप साहब ने की थी। दयालबाग की स्थापना भी बसन्त पंचमी के दिन 20 जनवरी 1915 को शहतूत का पौधा लगा कर की गई थी। सन् 1908 ईस्वी में इसका निर्माण आरम्भ हुआ था। 

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चीनी का रौजा: शाहजहां के वजीर की याद में बना यह मकबरा 

ये मकबरा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने वजीर अफजल खान की याद में इसे बनवाया था। ये मकबरा भारतीय-फारसी स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। 

फतेहपुर सीकरी: बेटे की खुशी में अकबर ने बनवाया यह महल 

फतेहपुर सीकरी कभी मुगल साम्राज्य की राजधानी रहा है। इसे 16वीं शताब्दी में अकबर ने बसाया था। ऐसा कहा जाता है कि मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नमक स्थान पर हराया था और इस जगह पर अपना अधिकार कर लिया था। 

एक बार अकबर संतान प्राप्ति की अर्जी लेकर अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह गए। जाते समय सीकरी में अकबर की मुलाकात सूफी फकीर शेख सलीम चिश्ती से हुई। फकीर ने अकबर से कहा कि बेटा तू मेरे ठहरने का बंदोबस्त कर दे तेरी मुराद पूरी होगी। उस समय अकबर ने उनका इंतजाम सीकरी में ही करवा दिया। कुछ समय बाद अकबर बेगम जोधाबाई गर्भवती हो गईं। अकबर ने उन्हें फकीर के पास ही भेज दिया। जोधा को पुत्र हुआ। उसके बाद अकबर ने खुश होकर कहा कि जहां मेरे पुत्र ने जन्म लिया मैं वहां एक नगर बसाउंगा। उसके बाद फतेहपुरी सीकरी को बनाने की योजना तैयार हुई।  

 

 

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