हर महिला यह चाहती है कि उसकी स्किन लंबे समय तक जवां-जवां नजर आए और इसलिए उम्र बढ़ने के साइन्स स्किन पर नजर आने से पहले ही वह अपने स्किन केयर रूटीन में एंटी-एजिंग क्रीम्स को शामिल कर लेती हैं। ऐसा माना जाता है कि इन एंटी-एजिंग क्रीम्स का इस्तेमाल करने से स्किन ताउम्र जवां रहेगी। हालांकि, मार्केट में मिलने वाली यह एंटी-एजिंग क्रीम्स कितनी प्रभावी हैं और स्किन पर किस तरह काम करती हैं, इसके बारे में कोई भी पूरी तरह से नहीं जानता।

यह तो सच है कि एंटी-एजिंग क्रीम आपकी स्किन में टाइटनेस व फर्मनेस को अधिक बेहतर बनाती हैं, लेकिन इसे लगाने से आपकी स्किन में कोई जादू हो जाएगा या फिर आप कभी भी बूढ़ी नजर नहीं आएंगी, यह सोचना गलत है। आमतौर पर, एंटी-एजिंग क्रीम्स की ब्रांडिंग कुछ इस तरह से की जाती है कि महिलाओं के मन में इन क्रीम्स को लेकर कई तरह के मिथ्स पैदा हो जाते हैं और फिर वह बिना सोचे-समझे किसी बस एंटी-एजिंग क्रीम्स का इस्तेमाल शुरू कर देती हैं। हो सकता है कि आप भी इन क्रीम्स को अपने स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाना चाहती हों। हालांकि, इससे पहले आपको इनसे जुड़े कुछ पॉपुलर मिथ्स और उनकी सच्चाई के बारे में जान लेना चाहिए-

मिथ 1- एंटी-एजिंग क्रीम्स होती हैं मल्टीटास्किंग

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सच्चाई- कुछ महिलाएं यह भी मान बैठती हैं कि एंटी-एजिंग क्रीम्स मल्टीटास्किंग होती है। अर्थात् एक एंटी-एजिंग क्रीम आपकी हर स्किन प्रॉब्लम जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं, काले धब्बे, स्पॉट्स आदि का सॉल्यूशन है। जबकि ऐसा नहीं होता। एंटी-एजिंग क्रीम्स को खासतौर पर एजिंग के साइन्स को कम करने और आपकी स्किन को अधिक यूथफुल दिखाने के लिए डिजाइन किया जाता है। बेहतर होगा कि आप अलग-अलग स्किन प्रॉब्लम्स के लिए अलग प्रॉडक्ट को चुनें। मसलन, सीरम से लेकर नाइट क्रीम और एसपीएफ़ लोशन आदि को अपने स्किन केयर रूटीन में शामिल करें।

मिथ 2- रातों-रात दिखेगा फर्क

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सच्चाई- यह एंटी-एजिंग क्रीम्स को लेकर एक बेहद ही पॉपुलर व कॉमन मिथ है। जब महिलाएं इन क्रीम्स की एड देखती हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी स्किन में भी कोई जादू हो जाएगा और एक-दो दिन में ही उनकी स्किन में फर्क नजर आने लगेगा। जबकि ऐसा नहीं है। हर चीज में समय लगता है, और ऐसा ही इन एंटी-एजिंग क्रीम्स के साथ भी होता है। इसलिए, कभी भी एकदम से अपनी स्किन में बड़े बदलाव की उम्मीद ना करें। आपको कम से कम एक से दो महीने तक का समय इन क्रीम्स को देना होगा। उसके बाद ही आपको अपनी स्किन में अंतर नजर आना शुरू होगा।

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मिथ 3- जितनी महंगी, उतनी अधिक इफेक्टिव 

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सच्चाई- आमतौर पर एंटी-एजिंग क्रीम्स काफी महंगी होती हैं और इसलिए, महिलाओं को ऐसा लगता है कि वह उनकी स्किन पर बहुत अधिक प्रभावी होगी। लेकिन यह भी एक मिथ ही है। आपको यह समझना चाहिए कि अधिकांश एंटी-एजिंग क्रीम अपने ब्रांड वैल्यू के कारण महंगी होती हैं, न कि उनकी हीलिंग प्रॉपर्टीज के कारण। इसलिए, जब भी आप एंटी-एजिंग क्रीम खरीदें तो उसकी कीमत से ज्यादा उसमें मौजूद इंग्रीडिएंट्स पर फोकस करें, ताकि वह आपकी स्किन प्रॉब्लम्स के साथ बेहतर तरीके से निपट सके, फिर चाहे वे कितनी भी सस्ती क्यों न हों।

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मिथ 4- उम्र के अनुसार खरीदनी चाहिए एंटी-एजिंग क्रीम

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सच्चाई- जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि एंटी-एजिंग क्रीम आपकी उम्र से संबंधित है और इसलिए अधिक एंटी-एजिंग क्रीम्स पर आयु विवरण लिखा होता है, उदाहरण के लिए 20+, 30+, 40+ आदि। अधिकतर महिलाएं अपनी उम्र के अनुसार एंटी-एजिंग क्रीम खरीदती हैं और उन्हें लगता है कि इस तरह उनकी स्किन को मैक्सिमम लाभ होगा।

जबकि ऐसा नहीं है। जिस तरह हर महिला अलग होती है, ठीक उसी तरह उसकी स्किन भी अलग होती है और इसलिए किसी भी एंटी-एजिंग स्किन को उम्र के अनुसार नहीं, बल्कि स्किन प्रॉब्लम्स को ध्यान में रखकर चुनना चाहिए। हो सकता है कि आपको चालीस की उम्र में एक्ने हो रहे हों या फिर किसी को यंग एज में ही तनाव के कारण फाइन लाइन्स नजर आने लगी हों। इसलिए, पहले अपनी स्किन को समझें और फिर उसी के अनुरूप एंटी-एजिंग क्रीम को खरीदें।

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