भारत में निजी बीमारियों और सेक्शुअल हेल्थ को लेकर हमेशा चुप्पी साध ली जाती है। ये एक ऐसा देश है जहां पर गुप्त रोग बहुत से हैं, लेकिन उनके बारे में जानकारी किसी को नहीं दी जाती है। कई लोगों को गुप्तांगो से जुड़ी परेशानियां होते हुए भी उन्हें अपनी तरफ से किसी को कुछ बताया नहीं जाता है। ये समस्या महिलाओं के साथ दो गुनी बढ़ जाती है और ऐसा लगता है कि उन्हें अपनी परेशानियों को हमेशा छुपा कर रखना होता है। 

महिलाओं के लिए सही सेक्शुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ बहुत जरूरी है क्योंकि इनके शरीर में कई तरह के बदलाव होते रहते हैं। महिला कब मां बनना चाहे, कब वो रिलेशन बनाना चाहे ये सब फैसले भी सेक्शुअल हेल्थ पर निर्भर करते हैं। 

सेक्शुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ सिर्फ फिजिकल समस्याओं से जुड़ी नहीं होती है बल्कि ये उनके सुरक्षित जीवन, मानसिक तनाव और अन्य कई परेशानियों से जुड़ी रहती है। पर ऐसी कौन सी समस्याएं हैं जिन्हें महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लेकिन फिर भी वो अपनी झिझक के कारण बता नहीं पाती हैं। ऐसी समस्याओं के बारे में हमने डॉक्टर मनीषा रंजन से बात की जो सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट हैं नोएडा के मदरहुड हॉस्पिटल में। 

उन्होंने हमें बताया कि जानकारी की कमी और सामाजिक दबाव दो ऐसी चीजें हैं जिनके कारण स्थिति खराब हो जाती है और कई महिलाएं अपने साथ होने वाली समस्याओं को लेकर बहुत परेशान जरूर होती हैं, लेकिन किसी भी हाल में कुछ कहने या सुनने के लिए तैयार नहीं होती हैं और ऐसे में लक्षणों को इग्नोर करना आपकी समस्या को बढ़ाने जैसी स्थिति बन सकता है। 

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किन निजी समस्याओं को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज-

अगर आपको शारीरिक समस्याएं हो रही हैं तो आपको कुछ लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए और अगर इनमें से कोई भी दिख रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

1. डिस्परेयूनिया (Dyspareunia)-

पेनिट्रेटिव इंटरकोर्स कई बार परेशानी और दर्द भरा हो सकता है और शुरुआती दौर में तो ऐसा होता ही है। अगर आप अच्छी तरह से लुब्रिकेटेड नहीं हैं तो ये समस्या बढ़ जाती है। पर अगर आप लगातार सेक्स के दौरान दर्द महसूस कर रही हैं तो या तो वेजाइनल ड्राईनेस या फिर जेनिटल ऑर्गन डिसऑर्डर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  

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2. अनोर्गास्मिया (Anorgasmia)- 

ऑर्गेज्म होना लगभग सभी सेक्शुअली एक्टिव लोगों की परेशानियों का कारण होता है। पर अगर महिलाओं को ये नहीं हो रहा है और भले ही वो कितनी भी एक्साइटेड हों उन्हें कुछ कमी महसूस हो रही है तो अनोर्गास्मिया जैसी समस्या हो सकती है। ये एक तरह का सेक्शुअल डिस्फंक्शन है जो आपको और आपके पार्टनर दोनों को परेशान कर सकता है। 

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 3. एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)- 

यूट्रस की लाइनिंग को एंडोमेट्रियल टिशू कवर करता है। पर अगर ये टिशू यूट्रस के बाहर बढ़ रहा है या फिर ओवरीज को या कहीं और कवर कर रहा है तो एंडोमेट्रियोसिस की समस्या हो सकती है। ये बहुत दर्द भरी कंडीशन होती है जिससे इंफर्टिलिटी और हेवी पीरियड्स जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको ये स्थिति महसूस हो रही है या पीरियड्स बहुत दर्द भरे हो रहे हैं तो ये हो सकता है कि आपको ऐसी समस्या हो।  

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4. सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन्स (Sexually transmitted infections)- 

ये इन्फेक्शन्स अधिकतर असुरक्षित सेक्स के कारण होते हैं और ये कई तरह की हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के कारण होते हैं। अगर आप किसी इन्फेक्टेड इंसान के साथ सेक्स कर रहे हैं तो ये कई सारी हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकता है। अगर कोई प्रेग्नेंट महिला STI का शिकार हो जाती है तो ये अजन्मे बच्चे तक भी पहुंच सकता है। अगर आपको किसी भी तरह के एसटीआई की समस्या समझ आ रही है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।  

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5. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Urinary tract infections)- 

जिस तरह से एसटीआई महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर डालता है उसी तरह से यूटीआई भी डाल सकता है। अगर महिलाओं की हेल्थ खराब हो रही है तो ये यूरिनरी इन्फेक्शन अजन्मे बच्चे तक भी पहुंच सकता है। दोनों एसटीआई और यूटीआई एंटीबायोटिक से ट्रीट किए जा सकते हैं और एंटीवायरल मेडिकेशन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।  

ये सारी समस्याएं बहुत आम हैं, लेकिन खीज या शर्म के चलते कई बार हम इन्हें बताने से डरते हैं। ऐसा ना करें और अपनी समस्याओं को डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।