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क्या भारत में लीगल है गर्भपात? जानें इससे जुड़े कानून के बारे में

भारतीय महिला होने के नाते जानें कि भारत में कब और किन हालातों में Abortion कराया जा सकता है।
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Published -29 Jun 2022, 08:00 ISTUpdated -28 Jun 2022, 19:38 IST
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हाल ही में Abortion  पर यूएस में खूब चर्चा चल रही है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात से जुड़ा 50 साल पुराने फैसला पलट दिया गया। जिसके बाद वहां कि महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर विरोध पर उतर आई हैं। नए फैसले के तहत अमेरिका की महिलाओं के पास गर्भपात का संवैधानिक अधिकार नहीं होगा। इसी बीच लोग भारत में गर्भपात से जुड़े कानूनों को अमेरिका से बेहतर बता रहे हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत में अबॉर्शन से जुड़े कानूनों के बारे में बताएंगे। जिसके बारे अच्छी तरह से जानने के लिए हमने हमारे आज के एक्सपर्ट हर्ष त्रिपाठी से बात की Allahabad University  से बीए एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। हर्ष में हमें भारत में गर्भपात से जुड़े नियमों और कानूनों के बारे में बताया, जिनके विषय में आपको जरूर जानना चाहिए। 

अमेरिका की महिलाओं से छीने गए गर्भपात के अधिकार-

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हर्ष ने हमें बताया कि साल 1971 में रो जेन नाम की महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रो जेन 3सरी बार प्रेग्नेंट हुईं थी, लेकिन वो बच्चा नहीं चाहती थीं। 2 साल के संघर्ष के बाद साल 1973 में अमेरिका की महिलाओं को अबॉर्शन का अधिकार मिला। जो कि दोबारा छिन गया है। 

भारत की महिलाओं को मिले अबॉर्शन के अधिकार- 

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अमेरिका से पहले ही साल 1971 में भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून लागू किया गया था। हालांकि कई बार इनमें बदलाव भी हुए। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि भारत में महिलाओं को अबॉर्शन की खुली छूट है। एमटीपी की तरफ से गई टर्म्स और कंडिशंस दी गए हैं, केवल उन्हीं हालातों में महिलाएं गर्भपात करा सकती हैं।

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इन हालातों में करवाया जा सकता है अबॉर्शन-

भारत में एमटीपी एक्ट के तहत अबॉर्शन अधिकारों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। जहां प्रेग्नेंसी के 0 हफ्ते से 20 हफ्ते के बीच गर्भपात कराने के लिए कुछ कंडीशन दी गई हैं। अगर कोई महिला मां बनने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है, या फिर कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड या डिवाइस फेल हो जाने के कारण न चहते हुए भी महिला प्रेग्नेंट हो गई है, तो वह अपना गर्भपात करा सकता है। इस दौरान 1 रजिस्टर्ड डॉक्टर का होना बेहद जरूरी है। 

प्रेग्नेंसी के 20 से 24 हफ्ते बाद अबॉर्शन से जुड़े नियम-

Abortion Laws In India

अगर मां या बच्चे की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ को किसी भी तरह का खतरा है, तो ऐसे में महिला गर्भपात करा सकती है। हालांकि अबॉर्शन के दौरान 2 रजिस्टर्ड डॉक्टरों का होना बेहद जरूरी होता है।

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प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते बाद अबॉर्शन से जुड़े नियम-

भारत में प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते बाद भी अबॉर्शन करवाया जा सकता है। अगर कोई भी महिला रेप का शिकार होती है और उसके चलते प्रेग्नेंट हो जाती है, तो ऐसे में वो 24 हफ्ते के भीतर भी गर्भपात करवा सकती है। इसके अलावा अगर कोई महिला विकलांग है तब भी वह 24 हफ्ते बाद गर्भपात कराने का फैसला ले सकती है। अगर बच्चे को जन्म से पहले ही कोई बीमारी है और उसके जीने के आसार कम हैं तो ऐसे में अबॉर्शन किया जा सकता है।

हालांकि यह इतना आसान नहीं होता है। 24 हफ्ते के बाद गर्भपात पर फैसला लेने के लिए एमटीपी बिल द्वारा राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड्स का गठन किया जाता है। जिसमें एक गायनेकोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट शामिल होते हैं। ये बोर्ड गर्भवती महिला की जांच करता है कि कहीं अबॉर्शन से महिला की जान को कोई खतरा तो नहीं होगा। सभी जांस के बाद ही अबॉर्शन की इजाजत दी जाती है।

तो ये थी भारत में अबॉर्शन से जुड़े नियम और गर्भपात से जुड़े महिलाओं के अधिकार। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

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