हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और व्रत रखे जाते हैं। इनमें से देवी लक्ष्‍मी का व्रत लोग शुक्रवार को रखते हैं। देवी लक्ष्‍मी के कई स्‍वरूप हैं और उनमें से एक स्‍वरूप है वैभव लक्ष्‍मी का। पंडित एवं ज्‍योतिषाचार्य कैलाश नारायण बताते हैं, ' लक्ष्‍मी जी का यह स्‍वरूप वैभव देने वाला होता है। इस स्‍वरूप की पूजा करने और व्रत रखने से धन की प्राप्ति होती है। धन के साथ-साथ जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं और भटका हुआ आदमी रास्‍ते पर आ जाता है। ' 

मां वैभव लक्ष्‍मी का व्रत वैसे तो कोई भी रख सकता है, मगर जो लोग काफी समय से आर्थिक संकटों का सामना कर रहे हैं और उनकी परेशानी दूर नहीं हो रही है या फिर उन्‍हें सही रास्‍ता नजर नहीं आ रहा है, उन लोगों को हर शुक्रवार यह व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करना चाहिए। 

यह व्रत कैसे रखना चाहिए और इस व्रत का महत्‍व क्‍या है, यह जानने के लिए पंडित जी द्वारा बताई गईं इन बातों को जरूर पढ़ें- 

वैभव लक्ष्‍मी माता के व्रत का महत्‍व - 

देवी लक्ष्‍मी के आठ स्‍वरूपों में से एक वैभव लक्ष्‍मी, मां का वह स्‍वरूप है, जिसकी पूजा-अर्चना करने से दरिद्रता मिटती है और घर में वैभव का आगमन होता है। यह व्रत खासतौर पर किसी काम में आ रही बाधा और आर्थिक संकट को दूर करने, साथ ही मार्ग से भटके हुए व्‍यक्ति को सही रास्‍ता दिखाने के लिए किया जता है। 

मां वैभव लक्ष्‍मी का व्रत हमेशा शुक्रवार को रखा जाता है और यह व्रत महिला या पुरुष कोई भी रख सकता है। इस व्रत का संकल्‍प लिया जाता है और खत्‍म होने पर व्रत का उद्यापन किया जाता है। 

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वैभव लक्ष्‍मी माता का व्रत करने की विधि- 

मां वैभव लक्ष्‍मी के व्रत को रखने की विधि बेहद आसान है- 

  • जो व्‍यक्ति पहली बार मां वैभव लक्ष्‍मी का व्रत रख रहा है उसे सबसे पहले शुक्रवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त (क्‍या होता है ब्रह्म मुहूर्त) में उठ कर और स्‍नान करके देवी लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्‍प लेना चाहिए। 
  • यह व्रत 9, 11 और 21 शुक्रवार के लिए रखा जाता है। संकल्‍प लेने के बाद आपको उतने शुक्रवार पूरी श्रद्धा के साथ मां वैभव लक्ष्‍मी का व्रत रखना होता है और फिर व्रत के अंतिम शुक्रवार के दिन उद्यापन करना होता है। 
  • जिस दिन व्रत होता है आप उस दिन सुबह स्‍नान करके साफ वस्‍त्र पहने और देवी लक्ष्‍मी के वैभव स्‍वरूप की पूजा करें। 
  • व्रत वाले दिन मन में बुरे विचार, ईर्ष्‍या-द्वेष की भावना, लड़ाई-झगड़ा और विवाद न करें, इससे आपका व्रत खंडित हो सकता है और देवी लक्ष्‍मी आपसे नाराज भी हो सकती हैं। 
  • इसके बाद शाम को सूर्य अस्‍त होने से पहले ही देवी लक्ष्‍मी की कथा पढ़े और विधि से उनकी पूजा करें। 
  • इसके लिए पूर्व दिशा में मुंह करें और आसान पर बैठें। एक चैकी में लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां वैभव लक्ष्‍मी की तस्‍वीर रखें। अगर आपके पास देवी लक्ष्‍मी का श्रीयंत्र है तो वह भी तस्‍वीर के साथ रखें। 
  • अब तस्‍वीर के आगे मुट्ठी भर चावल रखें और उस पर जल से भरा तांबे का कलश रखें। इस कलश के ऊपर एक कटोरी रखें और उसमें सोने या चांदी का एक गहना रखें, यदि आपके पास सोने-चांदी का कोई गहना नहीं है तो आप उसमें थोड़े पैसे रख सकते हैं। 
  •  इसके बाद मां वैभव लक्ष्‍मी को लाल चंदन का तिलक लगाएं और लाल रंग का कोई पुष्‍प चढ़ाएं। आप घर पर ही दूध से बनी खीर भी मां वैभव लक्ष्‍मी को प्रसाद के तौर पर चढ़ा सकती हैं। अगर आप को कुछ भी न समझ में आए तो चीनी या गुड़ का भोग लगाएं। 
  • अब पूरे मन से वैभव लक्ष्‍मी माता की कथा पढ़ें। अगर आपके घर में और भी सदस्‍य हैं तो उन्‍हें भी पूजा में शामिल करें। 
  • पाठ पूरा करने के बाद देवी की आरती करें और सभी में प्रसाद बाटें। 
  • इसके साथ ही जो चावल आपने लाल कपड़े में कलश के नीचे रखे थे उसे पक्षियों को खाने के लिए दे दें। वहीं कलश में भरे जल को घर के हर कोने में छिड़क दें, इससे घर में मौजूद नकारात्‍मक ऊर्जा दूर होती है। 
  • पूजा के पूर्ण होने के बाद मां वैभव लक्ष्‍मी के आगे अपनी मनोकामना को रखें और उसे पूरा करने की प्रार्थना करें। 
  • इसके बाद आप भोजन ग्रहण कर सकती हैं। 
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वैभव लक्ष्‍मी माता के व्रत में क्‍या खाएं- 

मां वैभव लक्ष्‍मी के व्रत में आप पूरे दिन फल खा सकती हैं, फलों का जूस पी सकती हैं, पानी ग्रहण कर सकती हैं और रात में पूजा के बाद अन्‍न भी ग्रहण कर सकती हैं। इस बात का ध्‍यान रखें कि जिस दिन आपका व्रत हो उस दिन घर में प्‍याज-लहसुन का भोजन न बनवाएं।  

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वैभव लक्ष्‍मी माता के व्रत के फायदे- 

  1. यह व्रत आपके अंदर सकारात्‍मक सोच लाता है। 
  2. इस व्रत को रखने से भटका हुआ व्‍यक्ति रास्‍ते पर आता है। 
  3. जो लोग आर्थिक संकट से गुजर रहे होते हैं, उन्‍हें भी देवी सही मार्ग दिखाती हैं। 
  4. घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। 
  5. घर-परिवार में चल रहे विवाद खत्‍म हो जाते हैं। 

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