हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के  शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु इस दिन से चार महीने की योग निद्रा के बाद उठकर समाज कार्य में लिप्त हो जाते हैं। इसी दिन तुलसी पूजन का विधान है और पूरे विधि विधान के साथ इस दिन  तुलसी माता को सुसज्जित करके दुल्हन की तरह सजाया जाता है और उनका विवाह भगवान विष्णु जी के साथ पूरे विधि विधान से किया जाता है।

शास्त्रों में इस विवाह का बहुत अधिक महत्त्व बताया गया है और कार्तिक के महीने में तुलसी पूजन को विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। इसलिए मुख्य रूप से देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजन शुभ मुहूर्त में करना फलदायी होता है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल तुलसी विवाह किस दिन मनाया जाएगा और इसका शुभ मुहूर्त क्या है। 

तुलसी विवाह की तिथि और शुभ मुहूर्त 

tulsi vivaah shubh muhurat

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन से शुभ या मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं और शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान के साथ तुलसी विवाह करने वालों पर भगवान् विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और समस्त पापों से मुक्ति मितली है। 

  • इस साल यानी कि साल 2021 में एकादशी तिथि 14 नवंबर, रविवार के दिन पड़ेगी। 
  • एकादशी तिथि 14 नवंबर 2021 को सुबह 05:48 बजे शुरू होगी और 15 नवंबर 2021 की सुबह 06:39 बजे समाप्त होगी। 
  • चूंकि उदया तिथि में एकादशी तिथि 14 और 15 नवंबर दोनों ही दिन पड़ रही है और 14 नवंबर को एकादशी तिथि लंबी समयावधि के लिए है इसलिए 
  •  तुलसी जी का विवाह विष्णु यानी शालिग्राम जी के साथ 14 नवंबर को किया जाएगा। 
  • एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 06 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी और द्वादशी तिथि आरंभ होगी।
  • द्वादशी तिथि 16 नवंबर, मंगलवार को सुबह 08 बजकर 01 मिनट तक रहेगी। 
  • जो लोग इस दिन व्रत करते हैं वो व्रत का पारण द्वादशी तिथि को कर सकते हैं। 

तुलसी विवाह पूजा की विधि

tulsi pujan

  • इस दिन तुलसी जी का विवाह शालीग्राम से किया जाता है और महिलाएं मां लक्ष्मी के नाम का व्रत रखती हैं। 
  • चूंकि तुलसी को विष्णु प्रिया माना जाता है इसलिए उनका पूजन अत्यंत लाभकारी होता है। 
  • तुलसी विवाह के दिन सुबह ब्रह्म मुहुर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद भगवान विष्णु की अराधाना करें और घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। 
  • भगवान विष्णु को फल और फूल के साथ पीले फूल अर्पित करें। 
  • एकादशी के दिन भोग लगाते समय भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें अन्यथा भोग स्वीकार्य नहीं होता है। 
  • तुलसी पूजन के लिए सबसे पहले तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाएं। 
  • लाल चुनरी से तुलसी के पौधे को सुसज्जित करें। 
  • एकादशी के दिन तुलसी को जल न चढ़ाएं क्योंकि इस दिन तुलसी माता भी विष्णु जी के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। 
  • तुलसी को सजाकर तुलसी माता की आरती करें और शालिग्राम जी के साथ उनके फेरे कराएं। 
  • विवाह संपन्न होने पर तुलसी में भी भोग लगाएं और सुहागिन स्त्रियां गौर से अपना सुहाग लें। 
  • भोग सभी में वितरित करें और शाम को विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। 
  • इस दिन दान -पुण्य करने का भी विशेष महत्त्व बताया गया है। 

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तुलसी पूजन का महत्व 

ऐसी मान्यता है कि देव उठनी एकादशी तिथि के दिन तुलसी पूजन और विवाह करने से समस्य मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। तुलसी जी विष्णु प्रिय हैं इसलिए उनका पूजन विष्णु जी को खुश करने का भी मार्ग है।  इस दिन पूजन करने से वैवाहिक जीवन के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है और विष्णु जी की विशेष कृपा वैवाहिक जोड़े को प्राप्त होती है। 

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इस प्रकार कार्तिक महीने की एकादशी तिथि के दिन पूरी शरधा भाव से विष्णु पूजन और तुलसी विवाह कराने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

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Image Credit:pintrest