हिंदू धर्म में कुछ पेड़-पौधे ऐसे हैं, जिन्‍हें देव तुल्य माना गया है। तुलसी का पौधा भी उनमें से एक है। यह पौधा आमतौर पर सभी हिंदू परिवार अपने घर में रखते हैं और पूरी श्रद्धा से इस पौधे की पूजा करते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्‍मी का वास होता है। श्री हरी विष्णु भगवान भी इस पौधे में वास करते हैं। एक धार्मिक कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्‍ण ने तुलसी जी के साथ शालिग्राम के रूप में विवाह किया था। 

हर वर्ष कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देव उठनी एकादशी भी कहा जाता है, उस दिन विधि विधान से देवी तुलसी और शालिग्राम का विवाह किया जाता है। इस तरह से अगर आप तुलसी जी की नियमित पूजा करते हैं तो हमें देवी लक्ष्मी और श्री विष्णु भगवान का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

इतना ही नहीं, तुलसी जी के कुछ दिव्य मंत्र हैं, जिनका नियमित रूप से जाप किया जाए तो घर में सुख समृद्धि के साथ ही धन संपदा भी आती है। इन मंत्रों के बारे में हमने उज्जैन के पंडित मनीष शर्मा से बातचीत की। वह कहते हैं, 'तुलसी का पौधा घर में लगाने से सकारात्‍मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, वहीं जब हम नियमित रूप से तुलसी जी की पूजा करते हैं, तो शरीर में भी सकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश करती है। इससे आपका विवेक बढ़ता है और हर कार्य में आपको सफलता हासिल होती है। तुलसी जी की पूजा को कुछ मंत्रों के जाप के साथ करने पर वह और भी फलदायी हो जाती है।'

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पंडित जी इन मंत्रों के बारे में भी बताते हैं- 

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तुलसी नामाष्टक मंत्र 

तुलसी जी के कई मंत्रों में से एक नामाष्टक मंत्र को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। इस मंत्र के जाप से धन, वैभव और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। 

मंत्र- वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

अर्थ- मैं देवी वृंदा को प्रणाम करती हूं, आप हमारे आंगन में तुलसी के पौधे के स्वरूप में विराजमान हैं। श्री केशव भगवान की अति प्रिय तुलसी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने मात्र से ही प्राणी मात्र का भाग्य उदय हो जाता है। 

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श्री तुलसी प्रदक्षिणा मंत्र

हिंदू धर्म में परिक्रमा का महत्व बताया गया है। देवी-देवताओं के साथ ही कुछ देव तुल्य वृक्ष और पौधे भी होते हैं, जिनकी परिक्रमा करने से बहुत लाभ मिलता है। धार्मिक शास्त्रों में तुलसी के पौधे की परिक्रमा का भी जिक्र मिलता है। पंडित जी बताते हैं, 'तुलसी की परिक्रमा हमेशा 3 बार करनी चाहिए।'

मंत्र-” यानि कानि च पापानि जन्मान्तर कृतानि च तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणे याम् पदे पदे”

अर्थ- हे तुलसी माता। आपकी परिक्रमा का एक-एक पग हमारे सभी पापों को नष्ट कर रहा है और हमें सद्बुद्धि दे रहा है। 

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तुलसी को जल अर्पित करने का मंत्र 

तुलसी को जल अर्पित करने का भी विशेष महत्व है। हालांकि, लोग तुलसी में बेहिसाब जल डाल देते हैं, मगर ऐसा नहीं करना चाहिए। तुलसी से पहले सूर्य को जल अर्पित करें और जो जल लोटे में बच जाए, उसे तुलसी के पौधे में डालें। अधिक जल अर्पित करने पर तुलसी की जड़ें सड़ने लगती हैं और तुलसी का पौधा सूखने (सूखे हुए तुलसी के पौधे को हरा-भरा बनाने के टिप्‍स) लगता है, जो वास्तु और धार्मिक लिहाज से बिल्कुल भी शुभ नहीं होता है। इससे धन की हानि भी होती है। इसलिए तुलसी में जल थोड़ा ही चढ़ाएं और जल चढ़ाते वक्त आपको इस मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए- 

मंत्र-महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।  

अर्थ-  हे माता, आपको श्री हरी महाप्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हे सौभाग्य का आशीर्वाद देने वाली माता आपको बार-बार हम नमस्कार करते हैं। 

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तुलसी जी के मंत्र के अलावा उनके 8 नामों का जप भी रोज करें। पंडित जी तुलसी के 8 नाम बताते हैं, 'वृंदा, वृंदावनी, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी।' अगर आप नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करते हैं और तुलसी जी के आठ नामों का जाप करते हैं, तो धन और सुख समृद्धि से जुड़ी आपकी समस्‍याएं दूर होने लगेंगी। 

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