हम सभी अपने जीवन में गलतियां करते हैं। कहते हैं कि गलती से ही इंसान सीखता है लेकिन कभी-कभी कुछ गलतियां आप पर और आपके अपनों पर भारी पड़ जाती है। बच्चों की परवरिश के मामले में तो गलतियां बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, हर किसी का पैरेंटिंग स्टाइल अलग होता है और इसलिए कुछ चीजें आपके अनुसार बच्चों के लिए सही हो सकती हैं, लेकिन किसी दूसरे पैरेंटिंग कपल के लिए नहीं। 

किसी पैरेटिंग स्टाइल को एकदम परफेक्ट कहना सही नहीं होगा, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है और इसलिए उसके लालन-पालन का तरीका भी अलग हो सकता है। लेकिन फिर भी कुछ ऐसी कॉमन मिसटेक्स होती हैं, जो अक्सर पैरेंट्स कर बैठते हैं। आपको भले ही यह गलतियां बेहद छोटी लगे, लेकिन इसका व्यापक असर बच्चों के कोमल मन पर पड़ता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही पैरेंटिंग मिसटेक्स के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आपको वास्तव में बचना चाहिए-

ओवर प्रोटेक्टिव होना

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हर पैरेंट की यह इच्छा होती है कि वह अपने बच्चे को किसी भी बुरे अनुभव से बचाए। इसलिए, वह अक्सर बच्चों के लिए प्रोटेक्टिव होते हैं। यकीनन, बच्चों की सुरक्षा का दायित्व पैरेंट्स का होता है। लेकिन आपका ओवर प्रोटेक्टिव होना बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जब आप बच्चों के लिए ओवर प्रोटेक्टिव होते हैं, तो ऐसे में बच्चों को कभी भी खुद से कुछ करने का मौका नहीं मिलता। इससे उनके भीतर आत्म-विश्वास पैदा नहीं हो पाता। इसलिए, कभी-कभी बच्चों को खुद से कुछ फैसले का मौका दें। हो सकता है कि उनके फैसले शायद सही ना हो, लेकिन इससे उन्हें सीखने और चीजों को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलेगा। (आपके नटखट बच्चे झटपट मान लेंगे आपका कहना अगर आप ये 6 तरीके आजमाएंगी)

बच्चों की बातों को अनसुना करना

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यह गलती हम सभी कभी ना कभी अवश्य करते हैं। आज के समय में पैरेंट्स का शेड्यूल काफी बिजी होता है, जिसके कारण वह अपने कामों में ही इतना उलझे होते हैं कि बच्चों की बातों पर ध्यान ही नहीं देते। आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा कि आप लैपटॉप पर काम कर रहे हों और बच्चे आपसे कुछ कह रहे हों, लेकिन आपका ध्यान उस पर हो ही ना। आपको भले ही उसमें कोई बुराई ना लगे, लेकिन वास्तव में इससे बच्चे को लगता है कि आपके पास उनके लिए समय ही नहीं है। इससे उनके मन में एक एकाकीपन की भावना आती है और उन्हें लगता है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। इसलिए अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालकर थोड़ा वक्त बच्चों के साथ बिताएं और उस समय फोन व टीवी से दूरी बनाएं।

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जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखना

यह सच है कि पैरेंट्स जीवन में अपने बच्चे के लिए सबकुछ बेस्ट चाहते हैं। उनकी यही इच्छा होती है कि बच्चे जीवन में एक बड़ा मुकाम हासिल करें। लेकिन किसी चीज की इच्छा करना और उस इच्छा को बच्चों पर थोपने में अंतर होता है। जब आप जरूरत से ज्यादा उम्मीदों का बोझ बच्चों के कंधों पर डाल देते हैं तो इससे बच्चे के मन में असफल होने का भय हमेशा बना रहता है। वह खुद को हमेशा ही एक बोझ तले महसूस करते हैं। कभी-कभी तो डर इस हद तक बढ़ जाता है कि बच्चे कुछ बड़ा कदम भी उठा लेते हैं। इसलिए, जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखने के स्थान पर आप बच्चों को खुद को समझने व एक्सप्लोर करने का मौका दें। 

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तुरंत रिएक्ट करना

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यह गलती भी आपने अवश्य की होगी। बच्चे स्वभाव से थोड़े चंचल होते हैं और उनकी हरकतें कभी हंसाती हैं तो कभी गुस्सा भी दिलाती हैं। लेकिन बच्चों की हरकतों पर बिना सोचे-समझे तुरंत रिएक्ट करना समझदारी नहीं है। हो सकता है कि बच्चे शैतानी कर रहे हों और आप एकदम से उन पर गुस्सा कर दें या फिर हाथ उठा दें। इससे बच्चे के कोमल मन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, बेहतर होगा कि आप तुरंत रिएक्ट करने की जगह पहले कुछ देर रूकें और एकदम से उग्र होने की जगह बच्चों के साथ थोड़ा समझदारी से पेश आएं।

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