मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और इसलिए अकेला रह पाना उसके लिए संभव नहीं है। खासतौर से, एक स्त्री तो हमेशा ही एक इमोशनल सपोर्ट ढूंढती हैं। लेकिन कहते हैं ना कि समय हमेशा एक सा नहीं रहता। जीवन में कई बार आपको विपरीत परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। जीवन के इस उतार-चढ़ाव में अक्सर आपके प्यार व सबसे करीबी व्यक्ति का साथ भी छूट जाता है। ब्रेकअप होने के बाद शुरूआती कुछ दिन आपको परेशान कर सकते हैं, लेकिन फिर आप मूवऑन कर लेती हैं।

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वहीं दूसरी ओर कुछ लड़कियां भी ऐसी होती हैं, जो अकेले रहने से इस हद तक डरती हैं कि वह अपने पार्टनर की हर ज्यादती को हंसते हुए सह जाती हैं। इतना ही नहीं, वह मन ही मन यह भी जानती हैं कि जिसके साथ वह रह रही हैं, वह व्यक्ति उनके लिए सही नहीं है और यह रिश्ता शायद लंबे समय तक न चले, लेकिन फिर भी उनके मन का फोबिया उन्हें हर ज्यादती को सहने के लिए मजबूर कर देता है। अगर आप भी अपने पार्टनर की हर बुरे व्यवहार को सिर्फ इसलिए बर्दाश्त करती हैं कि कहीं आप अकेली न हो जाएं तो यह anuptaphobia हो सकता है। तो चलिए आज हम आपको इस फोबिया के संकेतों के बारे में बता रहे हैं-

हमेशा ढूंढती हैं साथ

ऐसी महिलाएं हमेशा ही किसी का साथ ढूंढती हैं। यहां तक कि अगर किसी कारणवश उनका ब्रेकअप हो जाता है तो या तो वह पुराने रिश्ते में लौट जाना चाहती हैं और अगर ऐसा करना संभव नहीं होता तो वह जल्द से जल्द दूसरे रिश्ते में प्रवेश कर जाती हैं। यहां तक कि वह नए रिश्ते में बंधने से पहले बहुत अधिक नहीं सोचती, बस अपने अकेलेपन को दूर करना चाहती हैं।

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डर होता है हावी

anuptaphobia के कारण महिलाओं की समझदारी पर उनका डर हावी हो जाता है। अकेले रहने के डर के कारण वह किसी को भी अपना साथी बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं। यहां तक कि वह यह भी नहीं सोचतीं कि जिस व्यक्ति के साथ वह भावनात्मक रूप से बंध रही हैं, वह वास्तव में उस लायक है भी या नहीं। समझदारी का परिचय देने की बजाय वह अपने अकेलेपन को दूर करना ज्यादा बेहतर समझती हैं

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 टॉक्सिक रिलेशन का बोझ

अकेले रहने के डर के कारण महिला अपने पार्टनर पर भावनात्मक रूप से काफी हद तक निर्भर हो जाती है। इतना ही नहीं, मन ही मन वह बेईमान व बेवफा व्यक्ति के साथ रहना नहीं चाहतीं लेकिन अकेले रहने के डर के कारण वह उसे छोड़ने से घबराती है। उन्हें लगता है कि एक toxic रिलेशन में रहना अकेले रहने से कई गुना बेहतर है

रिजेक्शन स्वीकार नहीं

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anuptaphobia से पीड़ित महिला कभी भी रिजेक्शन स्वीकार नहीं कर पातीं। वह आखिरी दम तक अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश् करती हैं। यहां तक कि ब्रेकअप के बाद भी वह उस रिश्ते को दोबारा बरकरार रखने की कोशिश करती हैं। वह किसी भी हाल में अकेले नहीं रहना चाहतीं और इसलिए अपने आत्मसम्मान को दांव पर लगाने से भी उन्हें गुरेज नहीं होता। 

सिंगल लोगों से दूरी

ऐसी महिलाएं उन्हीं लोगों से दोस्ती करती हैं, जो पहले से रिलेशन में होती हैं। जो महिलाएं सिंगल होती हैं या फिर जिन्हें सिंगल रहना ही पसंद हैं, उनकी सोच महिला को परेशान करती हैं और इसलिए वह सिंगल लोगों से दूरी ही बनाकर रखती है।