हिन्दू धर्म में शालिग्राम शिला को पूजने का विशेष  है। कई घरों में भगवान विष्णु को शालीग्राम के रूप में पूजा जाता है और उनकी पूजा का विशेष महत्त्व बताया जाता है। कहा जाता है कि जिस घर में पूरे श्रद्धा भाव से शालिग्राम भगवान् की पूजा होती है वहां कभी भी अशांति नहीं आती है। यही नहीं शालिग्राम भगवान् की नियम से पूजा करना घर की आर्थिक स्थिति के लिए भी अच्छा होता है। शालीग्राम की शिला विशेष रूप से काले रंग के चिकने पत्थर के समान होती है और इसे भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। 

शालीग्राम की शिलाएं मुख्य रूप सेनेपाल में बहने वाली गंडकी नदी में पाई जाती हैं। मान्यतानुसार गंडकी नदी को तुलसी का रूप माना जाता है। इसी वजह से इस नदी में शालिग्राम का यानी भगवान विष्णु का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शालिग्राम भगवान की पूजा बहुत ही नियमों के साथ करनी चाहिए अन्यथा घर में अशांति सुर बर्बादी आती है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें कौन से वो नियम हैं जिन्हें शालिग्राम की पूजा के समय ध्यान में रखना चाहिए। 

तुलसी पत्तियां अर्पित करें 

tulsi dal shaligram shila

कहा जाता है कि यदि घर में शालिग्राम की शिला रखी जाए तो उसमें रोज़ तुलसी दल या तुलसी की पत्तियां अर्पित करें। ऐसी मान्यता है कि तुलसी विष्णु प्रिया  हैं और विष्णु जी को तुलसी अर्पित करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शालीग्राम की पूजा में तुलसी का पत्ता भगवान शालीग्राम के ऊपर चढ़ाने से धन, वैभव मिलता है।

शालिग्राम की एक ही शिला रखें 

shaligram shila puja

मान्यता है कि घर में सिर्फ़ एक ही शालीग्राम की शिला होनी चाहिए। एक से अधिक शालिग्राम रखने से व्यर्थ के संकट आते हैं और आर्थिक हानियों का सामना करना पड़ता है। शालिग्राम की एक ही शिला की भक्ति भाव से घर में पूजा करनी चाहिए। इसकी पूजा के लिए हमेशा घर  सुथरा रखें और इसे विष्णु जी की तस्वीर या प्रतिमा के पास रखें। कहा जाता है कि जिस घर में शालीग्राम की नियमित और शुद्ध भाव से पूजा होती है, वहां लक्ष्मी जी का वास होता है।

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शुद्ध मन से करें पूजा 

shaligram puja pure mind

कहा जाता है कि शालिग्राम की पूजा हमेशा नहा धोकर और साफ़ वस्त्रों में करनी चाहिए। यही नहीं पूजा के समय मन भी साफ़ होना चाहिए और किसी भी बुरे विचार को मन में रखते हुए पूजा नहीं करनी चाहिए। अशुद्ध मन से पूजा करने पर घर का विनाश और आर्थिक हानि निश्चित होती है। शालिग्राम को सात्विकता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। 

मांस मदिरा का सेवन है वर्जित 

avoid alcohal in shaligram puja

कभी भी शालिग्राम की पूजा करते समय या शालिग्राम की शिला घर में रखते समय मांस -मदिरा का सेवन न करें। यदि व्यक्ति ऐसा करता है तो निश्चित ही धन हानि और लड़ाई झगडे बढ़ते हैं। 

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नियमित करें पूजन 

मान्यता है कि यदि घर में शालिग्राम हैं तो उनकी नियमित पूजा होनी चाहिए। वैसे एक मान्यता है कि घर के पुरुष ही शालिग्राम की पूजा कर सकते हैं, लेकिन पुरुषों की अनुपस्थिति में स्त्रियां भी शालिग्राम भगवान् की पूजा कर सकती हैं। महिलाओं को अशुद्धि के समय पूजा नहीं करनी चाहिए। यदि घर में कोई मृत्यु हुई हो जिसकी वजह से पूजा न की जाए तब भी आप शालिग्राम की शिला की पूजा किसी अन्य रिश्तेदार से करवा सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे पूजा हमेशा शुद्ध भाव से ही होनी चाहिए। 

पंचामृत से स्नान कराएं 

shaligram puja vidhi

ऐसी मान्यता है कि यदि घर में शालिग्राम भगवान् हैं तो उन्हें रोज़ पंचामृत से स्नान कराएं। इसमें दूध, दही, जल, शहद और घी शामिल होते हैं। इन सभी सामग्रियों से शालिग्राम जी को स्नान करवाकर इसे चरणामृत को प्रसाद स्वरुप ग्रहण करें। शालिग्राम को गंगाजल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि गंगा जी शालिग्राम  से निकली हैं। शालिग्राम की शिला को पंचामृत से स्नान कराने के बाद चन्दन लगाएं और तुलसी दल अर्पित करें। ऐसा करने से से भगवान् विष्णु की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। 

भोग लगाना है जरूरी 

bhog to shaligram

शालिग्राम को नियमित रूप से भोग अर्पित करें। भोग (लड्डू गोपाल को भोग लगाने की विधि) में सात्विक भोजन को हो अर्पित करें। पूजा के दौरान शुद्ध मन से विष्णु जी की आरती करें और सम्मान पूर्वक शालिग्राम की शिला को भोग अर्पित करें। इस भोग को परिवार और रिश्तेदारों में वितरित करें। 

इन नियमों का पालन करते हुए शालिग्राम की पूजा करने से घर की सुख शांति में वृद्धि होने के साथ सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य रोचक लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। 

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