भारत में दुनियाभर में सबसे ज्यादा इंटरनेट यूज किया जाता है। इंटरनेट तक पहुंच बढ़ने से लोगों की सहूलियतें बढ़ी हैं और ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक लाइफ में हिस्सा लेने लगे हैं। लेकिन सहूलियतों के साथ इंटरनेट यूज से कई तरह की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। खासतौर पर महिलाओं के लिए। सोशल मीडिया में कई चर्चित महिलाओं को निशाना बनाया गया। इनमें बरखा दत्त जैसी पत्रकार, शहला रशीद जैसी स्टूडेंट लीडर, स्वरा भास्कर जैसी एक्ट्रेस शामिल हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा ट्रोल किया गया। इन महिलाओं के लिए धमकियों से लेकर रेप और जान से मारने तक की धमकियां दी गईं, क्योंकि इन्होंने ऑनलाइन इन्होंने अपने विचार खुलकर रखे। लेकिन इनके अलावा आम महिलाएं भी बड़ी संख्या में ऑनलाइन सर्फिंग करते हुए हिंसा की शिकार होती है। महिलाओं से जुड़ी पर्सनल चीजें सार्वजनिक करना, सोशल मीडिया पर डाली गई तस्वीरों की मोर्फिंग, धोखाधड़ी से वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग जैसी चीजें आज के समय में बेहद आम हैं और महिलाएं इन्हें खामोशी से सह रही हैं। महिलाओं के साथ डिजिटल स्पेस में होने वाले ज्यादातर अपराधों के बारे में पता ही नहीं चल पाता, क्योंकि महिलाएं आगे बढ़कर अपनी आवाज नहीं उठातीं। अपने साथ हुए अपराध के मामले में जो महिलाएं रिपोर्ट करने का साहस जुटा पाती हैं, उन्हें लचर सिस्टम का सामना करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट पवन दुग्गल से हमने इस बारे में बात की और उन्होंने हमें कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। 

फ्री एप्स से बढ़ता है जोखिम 

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आजकल इस्तेमाल हो रहे बहुत से फ्री ऐप्स बहुत ज्यादा पॉपुलर हैं। इन ऐप्स के यूजर करोड़ों की संख्या में हैं। ये ऐप्स फ्री सर्विस के एवज में अपने यूजर्स की गोपनीय जानकारियां लीक कर रहे हैं, जिससे उसके दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है। ऐसे ऐप्स पर अंकुश लगना जरूरी है। महिलाएं इनकी सॉफ्ट टार्गेट होती हैं। बहुत सी महिलाएं अपनी हर छोटी से छोटी चीज के बारे में अपडेट देती हैं, सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करती हैं, साइबर क्रिमिनल्स के लिए ऐसी महिलाओं को शिकार बनाना आसान होता है, क्योंकि तस्वीरों और डॉक्यूमेंट के जरिए कई बार मेटा डेटा ट्रैक होता है और लोकेशन जाहिर हो जाती है। लोकेशन पता लगने पर फिजिकली टार्गेट करना बहुत आसान हैं। इससे महिलाओं के लिए रियल वर्ल्ड में भी खतरे बढ़ जाते हैं। ऐसे आपराधिक तत्व महिलाओं की निजी जानकारियां भी लीक कर देते हैं, जिससे उनकी परेशानियां बढ़ जाती हैं। 

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मिसइन्फॉर्मेंशन से झूठ को सच बनाने की कोशिश

बहुत से ऐप्स ये दावा करते हैं कि उन पर शेयर की गई जानकारियां प्राइवेट रहती हैं, लेकिन ये ऐप्स इस बात का खुलासा नहीं करते कि उनकी सिक्योरिटी कहां कंप्रोमाइज हो रही है। इसीलिए इन पर आंखें मूंदकर यकीन करना सही नहीं है। महिलाओं को अपनी जानकारियां अपने दोस्तों और जानने वालों से सोच-समझकर शेयर करनी चाहिए। महिलाओं को इंटरनेट पर सर्च करके प्राइवेसी सेंटिंग के बारे में अवेयर होना चाहिए।

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डेट रेपिंग के बढ़ रहे हैं खतरे

आज के समय में ऑनलाइन डेटिंग बहुत आम हो गई है। लेकिन कई बार अजनबियों से की गई दोस्ती महिलाओं पर भारी पड़ती है और डेट रेप जैसे मामले देखने को मिलते हैं। पवन दुग्गल कहते हैं, 

'महिलाओं को किसी भी नए व्यक्ति के प्रति अविश्वास का भाव रखना चाहिए, उन्हें किसी पर भी आसानी से यकीन नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया पर नजर आने वाली संदेहास्पद चीजों की पड़ताल करें, क्योंकि यहां कानून का दायरा फिलहाल बहुत सीमित है। साइबर सुरक्षा की जानकारी टीनेजर्स और बच्चों को भी दी जानी चाहिए।' 

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Online Abuse से बढ़ रही है महिलाओं की खामोशी

अक्सर ये कहा जाता है कि महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रखतीं या अपने विचारों को जाहिर नहीं करतीं। हकीकत ये है कि हर महिला स्वाभाविक तरीके से अपनी जिंदगी जीती है, लेकिन आज के समय में सोशल मीडिया पर जब हर छोटी चीज के लिए महिलाओं को बुरा-भला कह दिया जाता है,  उनका मजाक उड़ाया जाता है, उन्हें हदों में रहने के लिए कहा जाता है, उन्हें उलाहना दी जाती है, तो वे अकेली पड़ जाती हैं और अपनी बातें शेयर करने में झिझक महसूस करने लगती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म Feminism in India की तरफ से हुए एक सर्वे में कहा गया कि जिन महिलाओं को online abuse किया गया, उनमें से 28 फीसदी ने ऑनलाइन खुद को एक्सप्रेस करना ही छोड़ दिया।   

महिलाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता

पुलिस की धीमी कार्रवाई और दोषियों को सजा ना होना आपराधिक तत्वों का हौसला और ज्यादा बढ़ाता है। उदाहरण के लिए उदयपुर में कुछ महीने पहले एक टीनेज गर्ल की तस्वीरें मोर्फ करने का मामला सामने आया था। इस लड़की की तस्वीरें सोशल मीडिया से लेकर उन्हें मोर्फ करके सर्कुलेट कर दिाय गया था, लेकिन जब इस लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज की तो पुलिस ने इसे अपना सोशल मीडिया अकाउंट ही बंद करने और अपनी तरफ से कोई भी पोस्ट नहीं करने की सलाह दी।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर छठवीं महिला साइबर क्राइम की शिकार हो रही है। दुखद बात ये है कि इन अपराधों के गलत टैग्स, अशोभनीय कमेंट्स और अश्लील तस्वीरें हमेशा के लिए सोशल मीडिया में रह जाते हैं, जिन्हें इंटरनेट से पूरी तरह से हटाना संभव नहीं होता। साथ ही यह भी खतरा होता है कि इस तरह की सामग्री कभी भी फिर से इंटरनेट पर वायरल हो सकती है। 

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साइबर क्राइम की शिकार होने वाली महिलाओं की बढ़ सकती है संख्या 

जिस तरह सोशल मीडिया पर लोगों की तादाद बढ़ रही है, उससे आने वाले समय में ऑनलाइन सर्फिंग करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन इसके साथ ही डिजिटल स्पेस में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में इजाफा होने का खतरा भी बढ़ रहा है। लेकिन इससे घबराने के बजाय महिलाओं को इस समस्या से निपटने के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है। ज्यादातर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर सिक्योरिटी सेटिंग्स होती हैं, जिनसे महिलाएं अपनी साइबर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। इनके माध्यम से महिलाएं ये यह फैसला ले सकती हैं कि वे कब, कहां, कैसे और किससे अपनी पोस्ट शेयर करें। वे फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और ट्विटर आदि पर किसे अपना फ्रेंड बनाती हैं, या नहीं बनाती हैं, यह पूरी तरह से उनके हाथों में है। इसीलिए इन सिक्योरिटी फीचर्स के बारे में जानना बहुत जरूरी है। 

अपराधी गुमनाम रहकर अंजाम दे रहे हैं अपराध

पवन दुग्गल बताते हैं, 

'वर्तमान में साइबर क्राइम्स के मामलों में दोषी पाए जाने वालों को सजा ना के बराबर होती है। कभी सबूतों के अभाव में तो कभी सख्त कानून ना होने के चलते अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती। साल 2003 में मैंने एक अपराधी को सजा दिलवाई थी। साइबर अपराधों की सबसे बड़ी वजह है वीपीएन जैसे प्राइवेसी टूल्स, जिनकी बदौलत अपराधी दबे-छिपे तरीके से साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं। वर्तमान समय में ऐप्स के जरिए लोगों की पर्सनल लाइफ और उनके पर्सनल डॉक्यूमेंट्स में तांकझांक करने वाले ऐप्स से निपटने के लिए सख्त कानूनों की काफी कमी है। अधिकांश कंपनियां देश के बाहर स्थित हैं। ये कंपनियां मांगी गई इन्फॉर्मेशन नहीं देतीं। स्थितियां बेहतर बनाने के लिए सख्त कानूनों के साथ पुराने कानूनों में संशोधन भी जरूरी है, साथ ही इन्हें सही तरीके से एनफोर्स किए जाने की जरूरत है।'

महिलाओं और बच्चों का जागरूक होना जरूरी

पवन दुग्गल का मानना है कि महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से जागरूक बनाए जाने की जरूरत है। अगर साइबर सिक्योरिटी को उनके लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बना दिया जाए तो यह चीज उनका सुरक्षा कवच बन सकती है। ये समझा जाना चाहिए कि अपनी सुरक्षा का दायित्व स्वयं हम पर ही है। अगर महिलाएं साइबर सिक्योरिटी के बारे में जागरूक होंगी तो जानकारी शेयर करते हुए सतर्क रहेंगी और संवेदनशील चीजें नहीं शेयर करेंगी।