बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी बीते कई सालों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन एक वक़्त था जब लोग उन्हें सिर्फ़ संजय गांधी की पत्नी के रूप में जानते थे। मेनका गांधी ने साल 1974 में संजय गांधी से लव मैरिज की थी। दोनों की मुलाक़ात बेहद फ़िल्मी थी, जहां वह अपने कजिन की शादी में शामिल होने गई थीं। वहां उनकी मुलाक़ात संजय गांधी से हुई, दोनों की पहली मुलाक़ात काफ़ी इंट्रेस्टिंग रही। संजय गांधी उन्हें पहली नज़र में ही पसंद करने लगे थे और उनसे शादी करना चाहते थे, लेकिन मेनका उस वक़्त काफ़ी छोटी थीं और उनकी उम्र सिर्फ़ 17 साल थी।

मेनका गांधी ने सिमी ग्रेवाल के टॉक शो 'रेंडीज़वेस विद सिमी ग्रेवाल' में अपनी पर्सनल लाइफ़ को लेकर कई बातें शेयर की थीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह राजनीति से परे मॉडलिंग के क्षेत्र में काम कर रही थीं। बता दें कि मेनका गांधी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की थी। वह कॉलेज के दिनों में 'मिस लेडी' बन चुकी थीं, इसके बाद उन्होंने कई एड में भी काम किया। मेनका गांधी के अनुसार आर्मी चाइल्ड होने के नाते हम जल्द से जल्द इंडिपेंडेंट होना चाहते थे। 

संजय गांधी और मेनका गांधी की पहली मुलाकात

sanjay and maneka gandhi

मेनका गांधी अपने कजिन भाई की शादी में संजय गांधी से मिलती हैं। संजय गांधी और उनके कजिन भाई स्कूल फ़्रेंड थे। शादी में खाने के लिए लोगों की लाइन काफ़ी लंबी थी, और इस लाइन में संजय गांधी भी लगे हुए थे। संजय गांधी को देखते ही मेनका गांधी ने कहा कि ''एक्सक्यूज मी, आप यहां खाने के लिए आए हैं''। उस वक़्त मेनका गांधी को नहीं पता था कि वो कौन हैं। पहली नजर में ही संजय गांधी को मेनका से प्यार हो गया था। फंक्शन में शाम तक संजय अपने दोस्त को बताते हैं कि वह मेनका गांधी से शादी करना चाहते हैं। यह बात सुनने के बाद उनके दोस्त कहते हैं कि इस बारे में पूछना होगा क्योंकि वह मेरी बहन है और सिर्फ़ 17 साल की है। कुछ वक़्त बाद संजय ख़ुद मेनका गांधी के घर आते हैं और उनकी मां से पूछते हैं कि क्या वह उन्हें बाहर ले जा सकते हैं, अपनी मां से मिलवाने। यह सुनने के बाद मेनका गांधी की मां इंकार कर देती हैं, और कहती हैं कि वह अभी काफ़ी छोटी हैं। बहुत कोशिशों के बाद मेनका को अनुमति दी गई कि वह हफ़्ते में दो बार मिलने जा सकती हैं।

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इंदिरा गांधी से हुई जब पहली मुलाकात

indira and maneka gandhi

संजय गांधी मेनका से मिलने के चार महीने बाद उन्हें अपने घर डिनर के लिए इनवाइट करते हैं और उन्हें बताते हैं कि वहां मां भी होंगी। इस पर मेनका नॉर्मल रिएक्ट करते हुए कहती हैं 'ओके'। उस वक़्त मेनका काफ़ी घबराई हुईं थीं, 20 मिनट बाद जब वह पहली बार इंदिरा गांधी को देखती हैं तो रोने लगती हैं। लगातार रोते हुए वह संजय से कहती हैं कि ''हम यहां क्यों खाना खाने आए हैं।'' इस पर संजय उनसे कहते हैं कि ''हमें कभी तो यहां आना ही था।'' इसके बाद दोनों घर के अंदर आते हैं और डिनर करने के लिए सबके साथ बैठते हैं। इस दौरान संजय गांधी और मेनका दोनों ही घबराए हुए थे और चुप थे। इस पर इंदिरा गांधी कहती हैं कि ''संजय तुम्हें इंट्रड्यूस नहीं कराएगा ऐसे में बेहतर है कि तुम खुद ही अपना नाम बताओ।'' आपको बता दें कि संजय और मेनका की शादी काफ़ी सादगी से हुई थी। शादी के बाद भी वह जब भी इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी के साथ बाहर जातीं तो हमेशा चुप रहती थीं।

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संजय गांधी को प्लेन में बैठने नहीं देना चाहती थी मेनका

maneka gandhi young

राजीव गांधी की तुलना में संजय गांधी के विचार काफ़ी अलग थे। मेनका गांधी के अनुसार वह पूरी तरह से इंडियन थे, जिन्हें सिंपल रहना काफी पसंद था। शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तीन साल बाद उनकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई। एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई थी, उस वक़्त वरुण गांधी सिर्फ़ तीन महीने के थे। इस हादसे से ठीक पहले मेनका इंदिरा से कहती हैं कि ''वह राजीव को इस प्लेन में बैठने से रोकें। वह जाकर उनसे कहती हैं कि मैंने आपसे आज तक कुछ नहीं मांगा है, लेकिन मैं चाहती हूं कि आप राजीव को इस प्लेन के बजाय किसी और प्लेन में बैठने के लिए कहें। इस पर इंदिरा उनके पास जाती हैं और कहती हैं कि संजय क्या ये सुरक्षित है। मेनका के बार-बार कहने के बावजूद संजय अपनी मां को मनाने में कामयाब हो जाते हैं।'' उस वक़्त इंदिरा गांधी को भी यह उम्मीद नहीं थी, कि संजय से यह उनकी आख़िरी मुलाक़ात है। उस प्लेन में संजय गांधी की मौत हो गई थी, जिसके बाद से मेनका गांधी बुरी तरह से टूट गईं थीं। वह हर वक़्त रोती रहती थीं।

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संजय गांधी की मौत के बाद छोड़ दिया था घर

maneka gandhi

संजय गांधी की मौत के बाद मेनका और इंदिरा गांधी के रिश्ते काफ़ी बिगड़ते जा रहे थे। दोनों के विवाद मीडिया के सामने आने लगे थे, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो संजय गांधी की मौत के बाद साल 1981 में मेनका घर और संपत्ति दोनों ही छोड़कर चली गईं थीं। गांधी परिवार से अलग होने के बाद मेनका गांधी ने न सिर्फ़ ख़ुद को संभाला बल्कि अपने बेटे वरुण की भी परवरिश की।

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