देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में मोहनदास करम चंद गांधी, जिन्हें पूरा देश महात्मा गांधी के नाम से जानता था, का अहम योगदान था। महात्मा गांधी ना सिर्फ एक बड़े राजनेता थे, बल्कि एक बड़े समाज सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त किया। महात्मा गांधी देश की महिलाओं को पुरुषों के बराबर स्थान देते थे और उन्होंने महिलाओं को उनका दिलाने के लिए महत्वपूर्ण काम किए। गांधी जी का मानना था कि देश को आगे बढ़ाने के लिए समाज का तरक्की करना बहुत जरूरी है और इसका एक अहम हिस्सा है महिलाओं को सशक्त बनाना। गांधी जी के प्रेरक विचारों से महिलाओं को बल मिला और उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं देश को आजाद कराने की राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुई थीं। महिलाओं के बारे में गांधी जी ने कहा था, 'महिलाओं को कमजोर कहना अपराध है और यह पुरुषों का महिलाओं पर अन्याय है।' आज महात्मा गांधी का जन्मदिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महात्मा गांधी के महिलाओं पर ये प्रेरक विचार जानिए।

mahatma gandhi thoughts on women empowerment inside

इसे जरूर पढ़ें: गुणों की खान महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी से प्रेरणा ले सकती हैं आज की महिलाएं

महिला सशक्तीकरण में गांधी जी की रही अहम भूमिका

mahatma gandhi thoughts progressive inside

महात्मा गांधी ने उस समय में महिलाओं के हक में आवाज उठाई, जब हमारे समाज में कई तरह की कुरीतियां व्याप्त थीं। उस समय के पुरुष प्रधान समाज में दहेज प्रथा और बाल विवाह प्रचलित थे। उस समय में महिलाओं का औसत जीवनकाल महज सिर्फ 27 साल का होता था। उस समय में डिलीवरी के दौरान अक्सर महिलाओं की मौत हो जाती थी। महिलाओं की शिक्षा का स्तर भी तब सिर्फ 2 फीसदी थी। उस समय पर्दा प्रथा भी प्रचलित थी। महिलाओं को किसी भी पुरुष के सामने पर्दे में रहने का रिवाज था, साथ ही अकेले बाहर जाने की मनाही थी, साथ में किसी पुरुष का जाना अनिवार्य माना जाता था। ये सभी चीजें महिलाओं को आगे बढ़ने से रोक रही थीं।

गांधी जी ने महसूस किया कि जब तक महिलाओं को इन बंधनों से आजाद नहीं किया जाए, तब तक उन्हें शिक्षित ना किया जाए तब तक समाज प्रगति नहीं कर सकता। इसीलिए उन्होंने अपने भाषणों में महिलाओं को हमेशा महत्वपूर्ण स्थान दिया और उन्हें देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाने के लिए इंस्पायर किया।

महिलाओं के बारे में ये थे गांधी जी के विचार

महात्मा गांधी से पहले जितने भी विचारक हुए उन्होंने सिर्फ महिलाओं की दयनीय दशा ही दिखाई, लेकिन महात्मा गांधी ने महिलाओं की छवि को बदलने के लिए व्यापक प्रयास किए। महात्मा गांधी का कहना था कि महिलाओं पुरुषों के हाथ का खिलौना नहीं हैं और ना ही उनकी प्रतिद्वंद्वी हैं। महिलाओं और पुरुषों में स्पिरिट एक ही है और उनकी समस्याएं भी एक जैसी हैं। महिला और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं। महात्मा गांधी ने महिलाओं के शिक्षित होने पर सबसे ज्यादा जोर दिया क्योंकि यही वो चीज थी जो महिलाओं को पुरुषों के बराबर ले जा कर खड़ा कर सकती थी। गांधी जी का मानना था कि महिलाएं ज्ञान, विनम्रता, धैर्य, त्याग और विश्वास की मूर्ति हैं। महात्मा गांधी ने जिस अहिंसा का उपदेश दिया, उसमें सहनशक्ति का होना अनिवार्य है और यह चीज महिलाओं का एक प्रमुख गुण है। गांधी जी ने द्रौपदी, सावित्री, सीता और दमयंती जैसी रोल मॉडल्स का जिक्र करके लोगों को बताया कि महिलाएं कभी कमजोर नहीं हो सकतीं। गांधी जी ने महिलाओं के लिए कई इंस्पायरिंग बातें कहीं हैं, लेकिन उनकी एक चीज बहुत हद तक महिलाओं की शक्ति बताती है, 'पत्नी पुरुष की गुलाम नहीं है बल्कि उसकी साथी है, उसकी खुशियों और गम में बराबर की साथी है और पति की तरह ही उसे भी अपनी राह चुनने का हक है।'

गांधी जी के कई प्रेरक विचारों को आज भी सार्वजनिक जीवन में उल्लेख किया जाता है। अगर महिलाएं उनके इन विचारों को आत्मसात करें तो उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ऊर्जा मिलती रहेगी और वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए उत्साहित रहेंगी।

इन विचारों से प्रेरणा ले सकती हैं महिलाएं

  • खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।
  • खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है, खुद को दूसरों की सेवा में खो दो।
  • पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।
  • विनम्र तरीके से, आप दुनिया को हिला सकते हैं।
  • शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं आती है। यह एक अदम्य इच्छा शक्ति से आती है।
  • पाप से घृणा करो, पापी से प्रेम करो।
  • कमजोर कभी माफ़ी नहीं मांगते। क्षमा करना तो ताकतवर व्यक्ति की विशेषता हैं।
  • कुछ ऐसा जीवन जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसे सीखो जैसे कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो।
  • ख़ुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों।
  • दुनिया हर किसी के जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।