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Karwa Chauth Vrat Katha 2022: पति की दीर्घायु के लिए पूजा के साथ पढ़ें करवा चौथ की ये कथा

Karwa Chauth 2022 Vrat Katha: करवा चौथ के दिन यदि आप इस व्रत की संपूर्ण कथा का पाठ करती हैं तो जीवन में हमेशा सौभाग्य बना रहता है।   
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Published -12 Oct 2022, 22:00 ISTUpdated -13 Oct 2022, 17:05 IST
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karwa chauth ki katha

हिंदू धर्म में करवा चौथ के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां पूरे दिन निर्जला उपवास करके पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो स्त्री श्रद्धा पूर्वक व्रत और उपवास करती है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ पति को दीर्घायु का वरदान भी मिलता है।

दिनभर निर्जला व्रत करने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन के पश्चात ही जल और अन्न ग्रहण करने का विधान है। करवा चौथ के दिन पूजन के कई नियमों में से एक इसकी  कथा का पाठ करना भी है।

मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत की कथा का पाठ करती है उसे सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। आइए ज्योतिर्विद पं रमेश भोजराज द्विवेदी जी से जानें इस संपूर्ण कथा के बारे में। 

करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha)

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एक समय की बात है एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्री अपने भाइयों की इकलौती बहन थी इस वजह से उसे सभी भाई बहुत प्रेम करते थे। एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को साहूकार की पत्नी समेत उसकी सातों बहुओं और पुत्री ने भी करवा चौथ का व्रत रखा।

रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन का आग्रह किया। इस बात पर बहन ने कहा कि भैया आज करवा चौथ का व्रत उसने भी रखा है और चंद्रमा के दर्शन के पश्चात ही कुछ खा सकती है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही वो अन्न और जल ग्रहण कर सकती है। 

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे और उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। अपनी बहन का ये हाल देखकर उन्हें ऐसा विचार आया कि यदि चंद्रमा जल्दी ही निकल आए तो उनकी बहन व्रत का पारण कर सकती है। इस वजह से साहूकार के बेटे नगर के बाहर गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण कर सकती हो। 

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साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से भी चंद्रमा के दर्शन (चंद्रमा से प्रार्थना कैसे करें) करके व्रत खोलने को कहा, लेकिन उनकी भाभियों ने इस बात से मना कर दिया और बताया कि अभी चांद नहीं निकला है बल्कि उनके भाइयों ने प्रेम वश और बहन को भूख से व्याकुल देखकर ही नकली चांद दिखा दिया है। 

बहन ने भाभियों की बात को अनसुना कर दिया और अपने भाइयों की बात मानकर भाइयों द्वारा दिखाए गए नकली चांद को अर्घ्य देकर अन्न जल ग्रहण कर लिया।  इस प्रकार बहन का करवा चौथ का व्रत भंग होने की वजह से भगवान श्री गणेश साहूकार की बेटी पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति जल्दी ही बीमार हो गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में व्यय हो गया।

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साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने विधि से पूजन करके चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना उपवास पूरा किया और वहां उपस्थित सभी लोगों का आशीर्वाद ग्रहण किया।

साहूकार की निश्छल भक्ति और श्रद्धा को देखकर भगवान गणेश जी उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान दिया। साथ ही, उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया। 

करवा चौथ माता की जय !

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करवा चौथ व्रत कथा का महत्व (Importance of Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi)

karwa chauth katha

ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ की पूजा तभी पूर्ण मानी जाती है जब पूजा के साथ इस कथा का पाठ किया जाता है। जो स्त्रियां करवा चौथ के दिन पूजन के साथ इस कथा का पाठ करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं करवा माता उनके पति को दीर्घायु देती हैं और साहूकार की बेटी की ही तरह उनके पति पर भी सदैव भगवान गणपति की कृपा बनी रहती है। करवा चौथ के दिन इस व्रत का एक कैलेंडर सामने रखकर करवा माता का ध्यान करते हुए यदि स्त्रियां इस कथा का पाठ करती हैं और दूसरों को भी कथा सुनाती हैं तो उनका सौभाग्य अखण्ड बना रहता है। 

करवा मैया की आरती (Karwa Chauth Aarti)

करवा मैया की आरती

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।

जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

ओम जय करवा मैया…

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।

यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।

ओम जय करवा मैया…

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।

दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।

ओम जय करवा मैया…

होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।

गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।

ओम जय करवा मैया…

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।

व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।

ओम जय करवा मैया…

करवा चौथ की ये कथा आपके जीवन में सुख समृद्धि का वरदान और वैवाहिक जीवन में खुशियां प्रदान करेगी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य रोचक लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik.com, wallpapercave.com 

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