बॉलीवुड में अपने समय की टॉप एक्ट्रेस रही जया प्रदा ने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं। 'शराबी', 'तोहफा', 'संयोग', 'मवाली', 'घर-घर की कहानी' जैसी फिल्मों से लोकप्रिय हुई जया प्रदा 3 अप्रैल 1962 को आंध्रप्रदेश के एक छोटे से गांव राजमुंदरी में पैदा हुईं थीं। खूबसूरती और एक्टिंग टैलेंज से लबरेज जया प्रदा ने जिस तरह अपनी अदाकारी से फैन्स का दिल जीता, उसी तरह उन्होंने राजनीति में भी अपने करिश्मे से आम जनता को प्रभावित किया।

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इन दिनों जया प्रदा बीजेपी की तरफ से रामपुर से चुनाव लड़ने को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। बॉलीवुड की कई दूसरी एक्ट्रेसेस की तरह उन्होंने भी राजनीति में सफलतापूर्वक अपने कदम बढ़ाए। आइए उनके राजनीति सफर के बारे में जानते हैं-

रामपुर से जीत चुकी हैं जया प्रदा

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री एनटी रामा राव की सलाह पर 1994 में जयाप्रदा राजनीत‍ि में आ गईं और तुलुगु देशम पार्टी की सदस्य बन गईं। लेकिन किसी वजह से एनटी रावा राव के साथ उनकी चली नहीं और उन्होंने चंद्रबाबू नायडू को सपोर्ट किया। इसके बाद 1996 में जया प्रदा आंध्र प्रदेश से राज्‍यसभा के ल‍िए चुनी गईं। हालांकि चंद्रबाबू नायडू के साथ भी उनका सफर लंबा नहीं चला और कुछ समय बाद उनके बीच मतभेद हो गया। इसके बाद उन्होंने एक समय में समाजवादी के कर्ताधर्ता रहे अमर स‍िंह का दामन थामा और समाजवादी पार्टी में शाम‍िल हो गईं। समाजवादी पार्टी में आना उनके लिए एक अहम उपलब्धि साबित हुआ। 2004 में उन्‍होंने यूपी की रामपुर लोकसभा सीट पर कामयाबी हासिल की।

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अमर सिंह के साथ रिश्ते को लेकर रहीं चर्चित

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जया प्रदा 2009 में दूसरी बार लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहीं। इस बीच उनके और अमर स‍िंह के राजनीतिक गठजोड़ को लेकर खूब चर्चाएं हुईं। गौरतलब है कि 2008 में अमर स‍िंह को 'वोट के ल‍िए नोट' मामले में जेल जाना पड़ा था, तो उस दौरान जया प्रदा उनके साथ खड़ी रहीं, जबकि कई लोगों ने इस दौरान उनका विरोध किया था। इस दौरान जयाप्रदा उनके ल‍िए काफी ज्यादा इमोशनल हो गई थीं। जब अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ी तो साथ में जया प्रदा ने भी इस पार्टी को अलविदा कह दिया। 

राजनीति का उभरता सितारा हैं जया प्रदा

इसके बाद अमर सिंह ने 2011 में जया प्रदा की साझेदारी में अपनी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय लोक मंच बनाई। हालांकि यह पार्टी कुछ खास नहीं कर सकी। इसके बाद जया प्रदा अमर सिंह के साथ 10 मार्च 2014 को आरएलडी में शामिल हो गईं। आरएलडी की सदस्य बनने पर उन्हें 2014 के आम चुनावों में बिजनौर सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया गया था, लेकिन इस सीट पर वह कामयाब नहीं हो पाईं थीं। उम्मीद है कि इस समय में बीजेपी में शामिल होना जया प्रदा के लिए काफी लकी साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी इस दिनों सबसे शक्तिशाली राजनीतिक दल के तौर पर देखा जा रहा है और जया प्रदा अपनी नेतृत्व क्षमता से बीजेपी की सीट पर जीत हासिल करने की क्षमता भी रखती हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में जया प्रदा राजनीति में एक चमकते हुए सितारे के तौर पर उभरें।