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World Heritage Day इंजीनियर ने नहीं आदिवासी ने बनाया पेड़ की जड़ों से ये अनोखा ब्रिज

इंजीनियर द्वारा खूबसूरत पुल के बारे में आपने जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज के बारे में जानते हैं।   
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Published -14 Apr 2022, 18:07 ISTUpdated -18 Apr 2022, 13:56 IST
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दुनिया भर में कई खूबसूरत पुल हैं जिसकी लोग तारीफ करते नहीं थकते हैं। वहीं कई पुल की वजह से वह देश और शहर जाने जाते हैं। जैसे सिडनी का हार्बर ब्रिज। यह सब इंजीनियर द्वारा किए गए अनोखे कारनामे हैं। भारत में एक ब्रिज है जिसे इंजीनियर नहीं बल्कि आदिवासी लोगों ने बनाया है। इस अद्भुत ब्रिज को देख आप भी दंग रह जाएंगे। इस पुल को बनाने के लिए स्टील और सीमेंट की जरूरत नहीं होती है। यह ब्रिज पेड़ की जड़ो से बनाया जाता है। इसलिए इसे लिविंग रूट ब्रिज कहा जाता है। 

रिपोर्ट के अनुसार मेघालय का ये अनोखा लिविंग रूट ब्रिज 100 सालों से भी अधिक पुराना है लेकिन आज भी यह मजबूती के साथ टिका हुआ है। इस ब्रिज को 50 आदमी एक साथ पार कर सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे पेड़ों की जड़ों से बनाया जाता है। इसके कई पुल दो शहरों को आपस में जोड़ते है। यही वजह है कि इन ब्रिज की अपनी एक अलग पहचान है। आज हम इस लेख में आपको मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं इस ब्रिज की क्या खासियत और इसे कैसे बनाया गया है। 

मेघालय की जनजातियों ने बनाया ये ब्रिज 

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मेघालय में खासी और जयंतिया जनजाति के लोग रहते हैं। इन जनजाति के लोगों को पेड़ की जड़ों को बुनकर पुल बनाने की कला हासिल है। इन जनजाति के लोगों ने इस ब्रिज को सौ साल पहले अपने हाथों से बनाया था। स्थानीय भाषा में इसे जिंगाकिएंग जरी कहा जाता है। आज भी यह पुल वैसे ही टिका है। यह पुल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह पुल मेघालय के घने जंगलों से गुजरने वाली नदी के ऊपर बनाया गया है। इस लिविंग ब्रिज की मदद से नदी को आसानी से पार किया जा सकता है।  इस पुल की यही खासियत है कि इस ब्रिज पर 50 लोग आराम से चल सकते हैं। (गर्मियों में बेस्ट घूमने की जगह

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कैसे बनाया जाता है ये अनोखा ब्रिज 

आप यह जो जान गए कि इन ब्रिज को पेड़ की जड़ो से बनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं, पुल को सही शेप लेने में 10 से 15 साल का समय लग जाता है। इन ब्रिज का साइज  50 मीटर से 1150 मीटर ऊपर है और इसकी लंबाई 50 मीटर है।  इनकी चौड़ाई करीब 1.5 मीटर है। सीमेंट के पुल समय के साथ कमजोर होते है लेकिन यह ब्रिज समय के साथ-साथ मजबूत होते है। ब्रिज बन जाने के बाद यह 500 साल तक चलते हैं। इसके अलावा इन ब्रिज की मेंटेनेंस खुद कुदरत करती है। ब्रिज की जड़े समय के साथ जैसे बढ़ती रहती है वैसे ही पुल की मजबूती भी बढ़ती रहती है। यह ब्रिज बाढ़ और तुफान से भी बच सकते हैं। ( मेघालय की बेस्ट जगह)

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ब्रिज बनाने में कोई खर्च नहीं 

इस पुल की सबसे खास बात यह कि इसे बनाने के लिए स्टील या फिर सीमेंट की जरूरत नहीं होती है। न ही इन पुलों को बनाने के लिए कोई पैसा लगता है। नदी किनारे बरगद और रबर के पेड़ की जड़ो को बुनकर यह पुल बनाया जाता है। इसके बाद जड़े धीरे-धीरे बढ़कर उस जगह पर फैल जाती है। इसके बाद इस पुल पर पत्थर डाल दिए जाते हैं जिससे चलने में दिक्कत नहीं आती हैं। (इको- फ्रेंडली डेस्टिनेशन्स)

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यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में इसे किया शामिल 

रबर और बरगद पेड़ की जड़ो से बना लिविंग रूट ब्रिज को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया है। 

दुनिया में भर में इंजीनियर द्वारा खूबसूरत पुल बनाएं गए हैं। लेकिन मेघालय में स्थित ये लिविंग रूट ब्रिज बहुत ही अद्भुत है। जिसकी खूबसूरती को यूनेस्को ने भी माना है। उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़े रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।  

Image Credit: shutterstock

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