हरजिंदगी को 3 साल पूरे हो चुके हैं और यह सफर सिर्फ आपके कारण ही खूबसूरत बन पाया है। 3 साल पहले ही हमने एक नई शुरुआत की थी, जिसमें महिलाओं से जुड़े हर मुद्दे पर आसानी से बात की जा सकती है। आज हमारे पास 12.8 मीलियन यूजर्स हैं। इसी खुशी में हमने अपने पाठकों के लिए ऑनलाइन सेशन किया, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं और उन्हेंने अपनी लाइफ से जुड़ी बातें शेयर की जो हर महिला के लिए जानना जरूरी है।

आईफोन के जमाने में नोकिया 3810 ढ़ूंढ रही हूं, सोयामिल्क कॉफी के जमाने में एक अदरक वाली चाय ढ़ूंढ रही हूं..। जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा, हम बात कर रहे हैं जानी-मानी अदाकारा और कवित्री प्रिया मलिक की। हमारे हरजिंदगी के इस सेशन का नाम 'रुहानियत' था, जिसका मतलब है- जब बात हो आपकी और हमारी तो एक दिल का रिश्ता बनता है, जो सीधा रूह से जुड़ता है।

बिग-ब्रदर्स से बिग-बॉस तक का सफर

जब हमने प्रिया मलिक से पूछा कि आपका बिग-ब्रदर्स से लेकर बिग-बॉस तक का सफर कैसा रहा? तो उनका जवाब था कि वो दोनों ही एक ऐसे शो हैं, जिसमें सभी आपको देखते हैं और फिर आप खुद को एक अलग नजरिए से देखने लगते हैं। प्रिया ने बताया कि वह इस शो में जाने से पहले शो की बारीकियों को सही तरह से समझने की कोशिश करती थीं और वहां जाने के बाद उन्होंने खुद को जाना।

आर्ट और कल्चर से है पुराना लगाव

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प्रिया ने बताया कि जब वह 8 साल की थीं, तभी से पब्लिक स्पीकिंग कर रही हैं और 12 साल की उम्र से ही वह लिखना पसंद करती हैं। प्रिया बिग-बॉस और बिग-ब्रदर्स से भी पहले से ही ऑस्ट्रेलिया में स्टेज शो और कविताएं सुनाना पसंद करती थीं। जब प्रिया से पूछा गया कि प्रिया की पाठशाला से आपका क्या मतलब है? प्रिया ने कहा कि वह हाई स्कूल को इंग्लिश पढ़ाती थीं और साथ में कविताएं भी लिखती थीं, लॉकडाउन में उन्होंने अपनी स्किल्स को इस्तेमाल करने के बारे में सोचा था। उन्होंने अपनी वर्कशॉप शुरु की, उसमें 14 साल के बच्चे और वृद्ध भी आते हैं, जिन्हें अपनी स्किल्स बढ़ाने में काफी मदद मिलती है। उन्हें ऐसे लोगों से मिलना काफी पसंद है और उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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अदरक वाली चाय में है खास बात

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प्रिया देहरादून से हैं और वहां अधिकतर दोपहर में लोग खाना खाने के बाद सो जाते हैं, उठने के बाद उनके पिताजी को चाय पसंद थी। प्रिया ने बताया कि उनके पिताजी की चाय बनाना सिर्फ उनका काम था और जब वह चाय लेकर जाती थीं, तो उससे कई यादें बन जाती थीं। प्रिया ने बताया कि अदरक वाली चाय न सिर्फ चाय है, बल्कि उनके लिए चाय की खुशबू एक जादू की तरह है।

प्रिया ने नारीवाद के बारे में बताया

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प्रिया ने कहा भले ही नारीवाद के बारे में लोग बात करते हैं, लेकिन आज भी हमारे देश में महिलाओं को कहीं न कहीं पीछे रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि प्रिया भी खुद रात के समय अकेले में, थोड़ा-सा डर महसूस करती हैं। प्रिया ने कहा बहुत कुछ बदला भी है, लेकिन काफी कुछ बदलने की जरूरत भी है। प्रिया ने बताया कि नारीवाद का अर्थ है कि औरतों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। 

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बेटी की उड़ान है जरूरी

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प्रिया ने कहा कि बेटी को उड़ने देने का सवाल अक्सर उठाया जाता है, लड़कों के लिए कोई नहीं पूछता है। प्रिया ने कहा कि कई बार हम अपने घर में भी ऐसा देखते हैं कि लड़के लड़की में कुछ भेदभाव हो ही जाता है। प्रिया ने बताया अगर आप सबसे पहले अपनी सोच बदल देंगे, तो धीरे-धीरे सबकी सोच में बदलाव आ सकता है। जब भी आप खुद को भेदभाव करते हुए देखें तो तुरंत रुक जाएं। घर में हम अपने से बड़ों को मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन उन्हें समझाया जा सकता है।

कविता लिखने के लिए शांति है पसंद

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मुझे भी लिखना काफी पसंद है और इसलिए मैंने भी प्रिया मलिक से एक सवाल किया कि अपनी लिखाई को क्रिएटिव कैसे बनाया जा सकता है? प्रिया ने कहा कि आपको किसी तरह के माहौल या हसीन वादियों की जरूरत नहीं होती है, जब रात की शांति में आप अकेले होते हैं तो खुद ही विचार आने लगते हैं। दोपहर की शांति प्रिया के लिए आरामदायक होती है, जिसमें वह काफी कुछ सुंदर और अच्छा लिख पाती हैं।

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