अगर महिलाएं ठान लें तो वे हर मुश्किल और बाधा को पार करती हुई कामयाबी की राह पा सकती हैं। हरियाणा की नई मुख्‍य सचिव बनीं केशनी आनंद अरोड़ा और उनकी दो बहनों के सचिव स्तर पर देश की सेवा करने की इंस्पिरेशनल स्टोरी हर महिला को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है। इन तीनों बहनों ने महिला सशक्‍तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपने पिता की इच्‍छा पूरी की। इस बारे में केशनी आनंद अरोड़ा ने दैनिक जागरण से खास बातचीत की। आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने कामयाबी की दिशा में कदम बढ़ाए

बड़ी बहनों की राह पर चलीं केशनी आनंद अरोड़ा

keshni anand arora haryana chief secretary inside

केशनी आनंद अरोड़ा की बड़ी बहन मीनाक्षी आनंद चौधरी हरियाणा की पहली महिला मुख्य सचिव थीं। केशनी की दूसरी बहन उर्वशी गुलाटी भी हरियाणा की मुख्य सचिव रह चुकी हैं। बड़ी बहनों के बाद सबसे छोटी केशनी आनंद अरोड़ा ने जब मुख्य सचिव का पद संभाला तो हर तरफ तीनों बहनों की चर्चा होने लगी।

अपनी जिंदगी की मुश्किलों से जूझते हुए तीनों बहनों ने किस तरह से अपनी मंजिल पाई, उससे प्रेरणा लेते हुए महिलाएं आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर हो सकती हैं। इनके पिता का सपना था कि तीनों बहनें हरियाणा की मुख्‍य सचिव बनें और इन तीनों ने मिलकर इस सपने को साकार भी किया। दुर्भाग्यवश इस सपने को पूरा होते हुए देखने के लिए इनके पिता जीवित नहीं हैं। 

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देश की सेवा के लिए वचनबद्ध हैं केशनी आनंद अरोड़ा 

1983 बैच की आइएएस अधिकारी केशनी आनंद अरोड़ा 30 सितंबर, 2020 में रिटायर हो रही हैं। मुख्य सचिव के तौर पर वह करीब सवा साल काम करेंगी। केशनी आनंद अरोड़ा को इस बात पर नाज है कि अपनी दोनों बहनों के साथ वह भी सचिव बन कर अपने पिता का सपना पूरा कर पाईं। इस बारे में उनका कहना था, 'हम आज जो भी कुछ हैं, उसका श्रेय हमारे स्वर्गीय माता-पिता को जाता है। हमारे घर का माहौल हमेशा पढ़ाई-लिखाई वाला रहा।'

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बेटियों के भविष्य के लिए माता-पिता के डेडिकेशन के बारे में बताते हुुए केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया, 'माता-पिता ने अपने मनोरंजन के लिए कभी टीवी तक नहीं खरीदा। हम कभी ट्यूशन पढऩे के लिए किसी एकेडमी में नहीं गए। पिताजी ने ही हमें घर पर पढ़ाया। मैं 27 साल की थी, तब अपनी मां को खो दिया। पिताजी वर्ष 2014 में हमें छोड़कर चले गए, लेकिन ऐसा महसूस हुआ कि उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ है। पिताजी की इच्छा थी कि हम तीनों बहनें चीफ सेक्रेटरी (मुख्‍य सचिव) बनकर रिटायर हों। सरकार ने मुझे उनकी अपने पिता की इच्छा पूरी करने का मौका दिया, इसके लिए मैं उसकी आभारी हूं।

सोशल सेक्टर में सुधार लाने के लिए काम करेंगी केशनी आनंद अरोड़ा

लंबे वक्त तक हरियाणा कोख में बेटियों की हत्या के लिए बदनाम रहा, उसी प्रदेश में महिला अधिकारियों के हाथ में सत्ता की बागडोर आना एक बड़ा बदलाव है। इस बारे में केशनी आनंद अरोड़ा का कहना था, 'मेरे पिता डॉ. जगदीश चंद्र आनंद पंजाब विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर थे। हमारी मां शिक्षा के मामले में अव्वल थीं। दोनों ने हम तीनों बहनों को शिक्षित व आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। हम तीनों बहनों ने राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री लेते हुए यूनिवर्सिटी में टॉप किया। अब भी धीरे-धीरे समाज की सोच में बदलाव आ रहा है। मुख्य सचिव के नाते मेरा फोकस सोशल सेक्टर में सुधार पर रहेगा। सरकार ने मुझे जो दायित्व सौंपा है, उसका बखूबी निर्वाह करने की कोशिश करूंगी। प्रदेश के बहुमुखी और बहुआयामी विकास के लिए मेहनत करना मेरी जिम्मेदारी है।