भारत में हर तीज त्योहार को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर यदि वह त्योहार महिलाओं का हो तो वह और भी ज्यादा हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। आपको बता दे कि सम्पूर्ण भारतवर्ष में "हरतालिका तीज" के त्योहार की तैयारियां चल रही हैं। यह त्योहार सुहागिन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले प्रमुख व्रतों में से एक है। यह व्रत पति की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए रखा जाता है। इस दौरान महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता गौरी और भगवान भोले नाथ की आराधना करती हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल भादो माह की शुक्ल पक्ष तृतीया को आता है। 

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मगर पंडित दयानंद शास्त्री की मानें तो इस बार हरतालिका तीज किस दिन मनाई जाएगी इसको लेकर महिलाओं को भ्रम है। उनका कहना है, ‘इस बार जन्माष्टमी की ही तरह हरतालिका तीज की तिथि को लेकरक असमंजस की स्थिति बन गई है। महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर किस दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाना चाहिए। कुछ लोग कह रहे हैं कि व्रत 1 सितंबर को होगा, जबकि कुछ लोग 2 सितंबर को व्रत रखने की सलाह दे रहे हैं। पंचांग भेद को लेकर एक बार फिर हरितालिका तीज व्रत की तिथि 1 सितंबर रविवार और 2 सितंबर सोमवार को पंचांगों में बताई गई है। नीमच के निर्णय सागर पंचांग में हरितालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल द्वितीया रविवार ( 1 सितंबर ) को बताई है। उज्जैन के महाकाल पंचांग में हरितालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया सोमवार ( 2 सितंबर ) को बताई है। इस तरह की स्थिति करीब 23 वर्षों के बाद उत्पन्न हो गयी है। ‘ 

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हरतालिका तीज की सही तिथि 

इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है यानी कि पंचांग में तृतीया तिथि का मान ही नहीं है. इस हिसाब से 1 सितंबर को जब सूर्योदय होगा तब द्वितीया तिथि होगी, जो कि 08 बजकर 27 मिनट पर खत्म हो जाएगी इसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। मगर यह 2 सितंबर को सूर्योदय से पहले ही सुबह 04 बजकर 57 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में असमंजस इस बात का है कि जब तृतीया तिथि को सूर्य उदय ही नहीं हुआ तो व्रत किस आधार पर रखा जाए। पंडित जी बताते हैं, ‘शास्त्रों के अनुसार तृतीया और चतुर्थी मिली हुई तिथि में तीज व्रत का पूजा करना उत्तम है। इस लिए जो महिलाएं तीज का व्रत रखती हैं उन्हें 2 सितंबर को तीज व्रत रखना चाहिए है।‘  इतना ही नहीं पंडित ने उन महिलओं के लिए भी संदेश दिया जो तीज का व्रत 1 सितंबर को रख रही हैं। 

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं, ‘व्रतधारी सुहागनों को हस्त नक्षत्र में तीज का पारण नहीं करना चाहिए। जो महिलाएं 1 सितंबर 2019 को व्रत रखेंगी उन्हें 2 सितंबर को तड़के सुबह हस्त नक्षत्र में ही व्रत का पारण करना पड़ेगा, जो कि गलत है।’ वहीं अगर महिलाएं 2 सितंबर 2019 को व्रत करें तो वे 3 सितंबर को चित्रा नक्षत्र में व्रत का पारण करेंगी। 

कैसे करें पूजा 

पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं, ‘इस दिन सुहागन महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद। शाम को महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए बालू से बने शिव और पार्वती जी की पूजा करती हैं। ध्यान रखें कि यह व्रत अगर आपने एक बार शुरू कर दिया तो यह जिंदगी भर छोड़ा नहीं जाता है। इस व्रत को कुंवारी कन्याएं भी करती हैं। कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करने से मन मुताबिक जीवन साथी मिलता है।’