जब तक हमें अपने जीवन में किसी बात को लेकर निजी अनुभव नहीं होता तब तक हम उससे जुड़ी भावनाओं को सही से समझ नहीं पाते। इसलिए हमें अपने जीवन में बहुत सी बातों और घटनाओं का अनुभव खुद करना होता है। इनमें से कुछ पॉजिटिव होती हैं तो कुछ नेगेटिव होती है। जहां पॉजिटिव बातें आपको और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है वहीं बुरे और नेगेटिव बातें आपको निराश कर देती हैं। नकारा जाना या रिजेक्शन एक ऐसी ही घटना है जो आपको अंदर तक तोड़कर रख देती है और आपको यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं की आपमें कोई कमी है। लेकिन जरा सोचिए क्या दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसे कभी रिजेक्शन का सामना न करना पड़ा हो? नहीं ऐसा कोई नहीं है। कभी न कभी, कही न कही सभी को अपने जीवन में रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। अगर आपको रिश्‍ते में रिजेक्शन का सामना करना पड़ा है तो इससे घबराएं नहीं बल्कि इसका डटकर मुकाबला करें। हम आपको बता रहे है ऐसे कुछ टिप्‍स जिन्‍हें अपनाकर आप रिजेक्शन के तनाव से आसानी से बाहर निकल सकती हैं।

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आपको रिजेक्ट करने वाले बहुत ही कम है

जब भी आपको किसी से पर्सनल लाइफ में रिजेक्शन मिले तो एक बात ध्‍यान रखें कि हम अपने जीवन में कई लोगों से मिलते है और सभी को हम पसंद नहीं आ सकते। कई बार ऐसा होता है कि हम अपने के बिल्‍कुल अलग तरह के इंसान मिलते है, शुरू में तो सामने वाले की सारी बाते अच्‍छी लगती है लेकिन धीरे-धीरे एक दूसरे की पंसद और नापंसद का अंदाजा होता है और ऐसे में दूरियां बनाने लगती है। और अगर ऐसा हो रहा है तो यह आपके लिए अच्‍छा है क्‍योंकि इससे आपको भविष्‍य में कम नुकसान होगा। इसलिए रिजेक्शन को हमेशा पॉजिटिव नजरिए से देखें।

रिजेक्शन से सबक लेन और सीखें

यह बात हमेशा ध्‍यान रखें कि आपको मिले रिजेक्शन से आपको सबक लेना है और कुछ नया सीखना है। आप इस रिश्‍ते की विवेचना करें और अगर आपको लगे की आपकी तरफ से कोई गलती हुई है तो खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें।

रिजेक्शन सिर्फ दुसरे व्यक्ति की सोच हैं

जब कोई व्यक्ति आपको रिजेक्ट करता है तो ये उसकी सोच हैं और किसी एक की सोच सभी के लिए सही नहीं हो सकती। बस सोच का अंतर है। ऐसे में आप भी किसी की सोच को अपने ऊपर हावी न होने दें।

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सिर्फ आप की सोच महत्वपूर्ण है

कोई और आपके बारे में क्या सोचता है उससे ज्यादा जरूरी है यह है कि आप अपने बारे में क्या सोचती हैं। बहुत बार आपके रिजेक्शन का कारण आपकी नेगेटिव सोच होती है। इसलिए पहले खुद की सोच को बदलें और हमेशा अपने बारे में पॉजिटिव सोचें।

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रिजेक्शन को अपने जीवन का हिस्सा समझें

जिस दिन आपको रिजेक्शन मिलें उस दिन समझ जाएं कि आप अपनी लाइफ की सच्चाई का अनुभव कर रहे हैं। रिजेक्शन को अपने ऊपर हावी न होने दें और हमेशा पॉजिटिव सोचे और खुश रहे।

Photo courtesy- (Chobirdokan, Medical News Today, The Independent, FireHow, Entity Mag & Elegant 365)