भातर में मनाए जानें वाले बड़े त्योहारों में से एक दिवाली का त्योहार इस वर्ष 27 अक्टूबर को धूम-धाम से पूरे देश में मनाया जाएगा। दिवाली की सबसे विशेष बात यह है कि यह 5 दिन तक मनाया जाता है। दिवाली से पहले धनतेरस और छोटी दिवाली आती है तो वहीं दिवाली के दूसरे दिन परेवा और तीसरे दिन भाई दूज मनाई जाती है।दिवाली के दूसरे दिन मनाई जानें वाले परेवा के त्योहार को गोवर्धन पूजा भी कहा जाता है। इस त्योहार को पूरे भारत में धूम-धाम से मनाया जाता है। यह त्योहार उत्तर भारत से लेकर साउथ इंडिया तक बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गाय की पूजा की जाती है। आइए आज हम आपको इसके महत्व और इससे जुड़ी कहानी के बारे में बताते हैं। 

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शुभ मुहूर्त और महत्व 

इस वर्ष गोवर्धन पूजा 28 अक्टूबर को हैं और इसके लिए  शुभ मुहूर्त यानि प्रतिपदा तिथि क प्रारंभ 09:08 बजे से हैं और यह 06:13 बजे खत्म भी हो जाएगी। इस लिए अगर आपको गोवर्धन पूजा करनी हैं तो आपको इसी समय के अंदर करनी होगी। आपको बता दें कि गोवर्धन पूजा के दिन गाय की पूजा होती है। गाए को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन बली पूजा और अन्नकूट पूजा भी होती है। गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान कृष्ण से है।

 

आपको बता दें कि यह पूजा द्वापर युग से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि यह पर्व ब्रजवासियों द्वारा सबसे पहले मनाया गया था। इस पर्व से पहले ब्रज के लोग भगवान इंद्र को अपनी ईष्ट देव मान कर उनकी अराधना करते थे। मगर, भगवान कृष्ण के कहने पर सभी से गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरू की। क्योंकि ब्रज को गोवर्धन पर्वत से बहुत लाभ होता था। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन का महत्व बताया और ब्रजवासियों ने गाए के गोबर से गोवर्धन पर्वत बना कर उसकी पूजा करनी शुरू कर दी। 

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कथा

भगवान कृष्ण की बात मानकर जब ब्रजवासियों ने भगवान इंद्र की पूजा करनी बंद कर दी और गोवर्धन पूजा करने लगे, तब इस बात से नाराज हो कर भगवान इंद्र ने ब्रजवासियों का डराने के लिए पूरे ब्रज को बारिश से जलमग्न कर दिया। जब लोग इंद्र के प्रकोप से डरने लगे तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली के बल पर उठा कर लोगों को बचाया और यह विश्वास दिलाया कि जरूरत पड़ने पर गोवर्धन ब्रजवासियों का जीवन भी बचा सकता है।

दरअसल, ब्रसवासी राज कंस के कर को चुकाने के लिए भगवान इंद्र की पूजा कर रहे थे ताकि बारिश हो और उनके खेतों में सूखा न पड़े मगर, जब उन्होंने भगवान कृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की तो भगवान इंद्र नाराज हो गए और भारी बारिश से पूरे ब्रज को डुबा दिया।

भारी बारिस का प्रकोप लगातार 7 दिन तक चलता रहा और भगवान कृष्ण ब्रजवासियों को उसी गोवर्धन पर्वत के नीचे छाता बनाकर बचाते रहे। भगवान की यह माया देख कर भगवान ब्रह्मा ने इंद्र को बताया कि भगवान कृष्ण विष्णु का अवतार हैं। इस बात को जानकर इंद्र बहुत पछताए और भगवान से क्षमा मांगी। आपको बता दें कि इस दिन भगवान कृष्ण को अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाया जाता है।