प्रवेश द्वार घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। माना जाता है कि प्रवेश द्वार से ही घर में लक्ष्मी प्रवेश करती हैं। जिस घर में प्रवेश द्वार वास्तु के अनुसार बना होता है, वहां धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।  जिस तरह भवन निर्माण से पहले भूमि का पूजन किया जाता है, उसी तरह भवन की चौखट यानि द्वार की स्थापना के समय भी पूजा की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है। इसका अर्थ ये है कि भवन निर्माण में प्रवेश द्वार का विशेष महत्व होता है। प्रवेश द्वार अगर वास्तु नियमों के अनुसार बनाया जाए तो वह उस घर में निवास करने वालों के लिए खुशियों को आमंत्रित करता है। वहीं दूसरी ओर, प्रवेश द्वार से अगर भव्य तरीके से बनाया गया हो तो यह घर की सजावट की झलक भी खूबसूरती से पेश करता है। अगर आप भी अपने घर में खुशियों को आमंत्रित करना चाहती हैं, तो प्रवेश द्वार को वास्तु सम्मत अवश्य बनाएं। वास्तु के अनुसार प्रवेश द्वार कैसा होना चाहिए, इस बारे में हमसे खास बातचीत की वास्तु एक्सपर्ट नरेश सिंगल ने। उनके बताए गए इन टिप्स को अपनाने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ाया जा सकता है, जिससे घर में सेहत और सुख-समृद्धि बने रहते हैं। अहम बात ये है कि नरेश सिंगल के बताए ये दिशा-निर्देश तर्क संगत हैं और उनका वैज्ञानिक आधार है।

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  • प्रवेश द्वार मकान के एकदम कोने में न बनाएं।
  • मकान के भीतर तक जाने का मार्ग मुख्य द्वार से सीधा जुड़ा होना चाहिए।
  • मकान के ठीक सामने विशाल पेड़ नहीं हो, तो बेहतर है। विशाल पेड़ से पड़ने वाली छाया मकान में रहने वाले सदस्यों पर शुभ प्रभाव नहीं डालती।
  • मुख्य द्वार के सामने कोई गड्ढा या सीधा मार्ग नहीं होना चाहिए। इससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्रवेश द्वार नहीं बनाएं।
  • किसी भी भवन में दो प्रवेश द्वार होने चाहिए। एक बड़ा प्रवेश द्वार, वाहन के लिए और दूसरा छोटा निजी प्रयोग के लिए।
  • कचराघर, जर्जर पड़ी इमारत या ऐसी कोई दयनीय चीज मकान के सामने नहीं होनी चाहिए, जिसे देखकर मन में नेगेटेविटी आए।
  • खुला कुआं मुख्य द्वार के सामने न हो।
  • मुख्य द्वार के ठीक सामने किसी भी तरह का कोई खंभा न हो।
 
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इन दिशाओं में प्रवेश द्वार से मिलता है ये प्रभाव

  • यदि प्रवेश द्वार उत्तर व पश्चिम दिशा में हैं, तो ये आपको समृद्धि तो प्रदान करते हैं, यह भी देखा गया है कि यह स्थिति भवन में रहने वाले किसी सदस्य का रुझान अध्यात्म में बढ़ा देती है।
  • वास्तु कहता है कि अगर आपके भवन का प्रवेश द्वार केवल पश्चिम दिशा में है, तो यह आपके व्यापार में लाभ तो देगा, मगर यह लाभ अस्थायी होगा।
  • मुख्य द्वार अगर उत्तर या पूर्व दिशा मे स्थित है तो यह आपके लिए समृद्धि और यश लेकर आता है।
  • भवन का मुख्य द्वार अगर पूर्व दिशा में है, तो यह बहुमुखी विकास और समृद्धि प्रदान करता है।
  • प्रवेश द्वार अगर पूर्व और पश्चिम दिशा में हैं, तो ये आपको खुशियाँ और संपन्नता प्रदान करते हैं
  • किसी भी स्थिति में दक्षिण-पश्चिम में प्रवेश द्वार बनाने से बचें। इस दिशा में प्रवेश द्वार होने का मतलब है परेशानियों को आमंत्रण देना।

वास्तु दोष दूर करने के लिए ये अचूक उपाय अपनाएं

वास्तु एक्सपर्ट नरेश सिंगल के बताए इन टिप्स से आपको जरूर फायदा होगा, लेकिन प्रश्न यह है कि जिन भवनों के प्रवेश द्वार वास्तु के अनुसार नहीं बनें हैं, उन्हें शुभ फलदायी कैसे बनाया जा सकता है। यह प्रश्न उस वक्त और जटिल हो जाता है, जब मकान में तोड़-फोड़ कर प्रवेश द्वार को अन्यत्र स्थानांतरित करना संभव न हो। ऐसे में परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।

नरेश सिंगल पहले भी इस बारे में बता चुके हैं कि वास्तु शास्त्र तोड़-फोड़ का शास्त्र नहीं है। पूर्व निर्मित प्रवेश द्वार को वास्तुसम्मत बनाने के लिए या उससे जुड़े नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए वास्तु में कई उपायों की व्यवस्था है। पिरामिड की स्थापना ऐसा ही एक अचूक उपाय है। लेकिन पिरामिड की स्थापना किस दिशा में, कितनी संख्या में और कैसे तथा कब करनी है, यह सारा कार्य प्रवेश द्वार की स्थिति पर निर्भर करता है।