हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत का विशेष महत्त्व है। कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और घर में धन -धान्य और सुख समृद्धि आती है। भगवान कृष्ण ने गीता में बताया है, एकादशी व्रत सभी व्रतों में उत्तम है, क्योंकि इसका प्राकट्य स्वयं भगवान विष्णु के शरीर से हुआ है।

हर महीने में दो एकादशी व्रत होते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार साल में 24 एकादशी तिथियां होती हैं और उन सभी का विशेष महत्त्व है। कहा जाता है कि एकादशी व्रत को सभी को करना चाहिए और इस व्रत को पूरे नियम से करना फलदायी होता है।

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ऐसी मान्यता है कि एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करते हुए और कुछ चीज़ों को ध्यान में रखकर ये व्रत करना चाहिए जिससे घर शान धान्य से भर जाएगा और सुख शांति आएगी। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें कि एकादशी व्रत में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 

व्रत एवं विष्णु पूजन के नियम 

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व्रत करने वाले को दशमी तिथि की रात्रि से ही अन्न का त्याग करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः काल उठ कर प्रथम स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें। भगवान को पीले फूल, केले के फल आदि समर्पित करें । जो भी एकादशी हो, उसकी कथा को पढ़ना चाहिए। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय इस द्वादशाक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए। अगले दिन द्वादशी को स्नान आदि करके पुनः पूजन करें, भोग लगाएं। फिर यथा संभव दान करें। उसके बाद भोग लगाया प्रसाद गृहण करें उसके बाद भोजन ग्रहण करें।

विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें 

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ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि आप किसी कारण से व्रत नहीं करते हैं तब भी शुद्ध मन और शरीर से विष्णु भगवान का माता लक्ष्मी समेत पूजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 

बाल या नाखून न काटें

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एकादशी व्रत के दौरान भूलकर भी बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। वैसे किसी भी व्रत में ऐसा करने वर्जित माना जाता है, लेकिन एकादशी के दिन ऐसा करने से धन हानि होती है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी व्रत के दौरान बाल या नाखून काटने से विष्णु भगवान् अप्रसन्न हो जाते हैं और घर में अशांति आती है। एकादशी के दिन मुख्य रूप से महिलाओं को बाल धोने और कपड़े धोने की भी मनाही होती है। खासतौर पर जो महिलाएं ये व्रत करती हैं उन्हें बाल और कपड़े नहीं धोने चाहिए और शरीर में साबुन का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। 

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किसी से द्वेष व झगड़ा न करें

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एकादशी व्रत में किसी भी कारण से किसी पर क्रोध न करें और किसी से भी झगड़ा न करें। ऐसा करने से घर में अशांति आती है और धन की हानि भी होती है। इस दिन शांति पूर्वक विष्णु जी का ध्यान और पूजन करें, घर धन धान्य से भर जाएगा। एकादशी का पावन दिन भगवान विष्णु की अराधना का होता है, इस दिन सिर्फ भगवान का गुणगान करना चाहिए। 

ब्रह्मचर्य का पालन करें 

एकादशी व्रत  के दौरान पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी है। ऐसा न करने पर व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है और आर्थिक हानि होने लगती है। यही नहीं पति और पत्नी के बीच व्यर्थ के झगड़े होने लगते हैं। 

पीले वस्त्र धारण करें 

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एकादशी व्रत और पूजन के दौरान पीले कपड़े पहनना शुभ होता है। मान्यता है कि विष्णु भगवान को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और इस रंग के कपड़े पहनने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। यहां तक कि इस दिन आप यदि किसी नौकरी का इंटरव्यू देने जा रहे हैं तब भी पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है और धन में वृद्धि होती है।

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तामसिक भोजन न करें 

एकादशी का व्रत मुख्य रूप से भगवान् विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है इसलिए इस दिन तामसिक भोजन- प्याज, लहसुन, मांस मदिरा का सेवन कदापि नहीं करना चाहिए। एकादशी वाले दिन इन सब चीज़ों का त्याग करने से घर में सुख समृद्धि आती है और धन धान्य से भर जाता है। एकादशी वाले दिन यदि आप व्रत न भी करें तब भी सात्विक भोजन ही करें।

चावल का सेवन है वर्जित 

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के पावन दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। यदि आप व्रत नहीं रखते हैं तब भी आपको चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से मनुष्य को कीट पतंगों की योनि में जन्म लेना पड़ता है और धन की हानि होती है। 

दान-पुण्य करें 

एकादशी के दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्त्व है। इस दिन गरीबों को भोजन कराने और दान -पुण्य करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। इसके अलावा सभी मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है। 

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