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ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को बड़ा मंगल क्यों कहा जाता है, जानें इसकी कहानी और महत्व

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ महीने का विशेष महत्व है और इस महीने के मंगलवार के दिन को कुछ स्थानों पर बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है।   
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Published -31 May 2022, 14:30 ISTUpdated -14 Jun 2022, 12:00 IST
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hanuman puja bada mangal

हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व है और हर एक दिन किसी न किसी भगवान की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि यदि प्रत्येक दिन में ईश्वर की भक्ति की जाती है तो पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

उन्हीं शास्त्रों में मंगलवार के दिन को भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है और इस दिन को हनुमान भक्ति लीन होने का अलग महत्व बताया गया है। लेकिन ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले सभी मंगलों को बड़ा मंगल कहा जाता है और इनमें विशेष रूप से राम भक्त हनुमान की पूजा की जाती है। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ.आरती दहिया से जानें कि बड़ा मंगल की कहानी क्या है, इसका महत्व क्या है और इसकी शुरुआत कहां से हुई थी।  

ज्येष्ठ महीने में बड़ा मंगल क्यों मनाते हैं 

jyeshth month bada mangal

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी भगवान राम से पहली बार प्रभु श्री राम पहली बार ज्येष्ठ महीने के मंगलवार के दिन ही मिले थे। तभी से यह मान्यता है कि इस महीने के सभी मंगलवार के दिनों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। इस ख़ास दिन में मंदिरों में कीर्तन होते हैं, भक्तों के लिए भंडारे होते हैं और जगह-जगह पर प्याऊ लगवाए जाते हैं। दरअसल बड़ा मंगल उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसकी शुरुआत भी यहीं से हुई थी। 

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इस साल कब से शुरू हुआ है बड़ा मंगल 

इस साल ज्येष्ठ माह की शुरुआत 17 मई 2022 से हुई है और यह 14 जून 2022 तक समाप्त होगा। इस प्रकार इस महीने में 5 मंगलवार हैं जिन्हें बड़ा मंगल कहा जा रहा है। इस साल के ज्येष्ठ महीने की खास बात यह है कि इसका प्रारंभ और समापन दोनों ही मंगलवार के दिन से होगा, इसलिए ज्येष्ठ महीने का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। पंडितों के अनुसार इस साल बड़े मंगल की तिथियां  17 मई, 24 मई, 31 मई, 7 जून और 14 जून हैं।

बड़ा मंगल का इतिहास

lord hanuman bada mangal

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल लखनऊ का एक अनोखा त्योहार है क्योंकि यह किसी अन्य राज्य या शहर में नहीं मनाया जाता है। यह पर्व लखनऊ (लखनऊ के बारे में कितना जानते हैं आप)की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक माना जाता है और कहा जाता है कि इसकी शुरुआत लगभग 400 साल पहले मुगल शासन के दौरान हुई थी।

बड़े मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इसकी कहानी के अनुसार एक बार नवाब मोहम्मद अली शाह के पुत्र बहुत बीमार पड़ गए। तब उनकी पत्नी ने अपने पुत्र का इलाज कई जगह करवाया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके पश्चात लोगों ने उनकी पत्नी को अपने पुत्र की कुशलता के लिए लखनऊ के अलीगंज में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में जाने और वहां हनुमान जी की पूजा करते हुए मन्नत मांगने की सलाह दी। नवाब ने वैसा ही किया और उनका बेटा भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। इसके बाद नवाब और उनकी पत्नी ने हनुमान मंदिर की मरम्मत करवाई। मंदिर की मरम्मत का काम पूरा होने के बाद ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को शहर वासियों को पानी और गुड़ का शर्बत बांटा गया। तभी से बड़े मंगल की शुरुआत हुई।  

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बड़े मंगल का महत्व

बड़े मंगल को बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान की पूजाकरने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बड़े मंगलवार के दिन लखनऊ के अलीगंज हनुमान मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भी भंडारे का आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह के मंगलवारों को जो भक्त हनुमान जी की पूजा और व्रत करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन पूजन करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर में खुशहाली आती है। 

बड़ा मंगल कैसे मनाया जाता है 

how to celebrate bada mangal

ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ महीने के मंगवार के दिन भक्त जन मंदिरों में भंडारा कराते हैं। हलवा-पूरी, आलू-कचौरी, छोला-चवाल, कढ़ी चावल से लेकर जूस तक भंडारे में कई तरह का स्वादिष्ट प्रसाद बांटा जाता है।  ज्येष्ठ के महीने में 4 या 5 मंगलवार होते हैं जिनमें सुंदरकांड का पाठ करना फलदायी माना जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा का विधान है, लेकिन यदि आप मंदिर नहीं जा पाते हैं तब भी घर पर ही हनुमान जी का पूजन करें। ऐसा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 

यदि आप भी भक्ति में लीन होकर हनुमान जी की पूजा करना चाहते हैं तो बड़ा मंगल का दिन आ पके लिए अत्यंत शुभ है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: wallpapercave .com and wikipedia

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