Fri Oct 9, 2026 | Updated 10:47 AM IST

World Mental Health Day 2026: डिजिटल युग में कैसे बचाएं अपने दिमाग की सेहत? न्यूरोसर्जन से जानें

हर साल 10 अक्‍टूबर को वर्ल्‍ड मेंटल हेल्‍थ डे (World Mental Health Day 2026) मनाया जाता ह‍ै। ऐसे में हम आपको जानकारी दे रहे हैं क‍ि इस ड‍िज‍िटल युग में आप द‍िमाग की सेहत को कैसे दुरुस्‍त रख सकती हैं?
Updated:- 2026-10-09, 09:40 IST
world mental health day

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सुबह उठते ही फोन चेक करना, दिनभर स्क्रीन पर काम करना और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया चलाना हमारी आदत बन गई है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन पर घंटों बिताना, नींद पूरी न होना और हर समय ऑनलाइन रहने का दबाव हमारे दिमाग पर क्या असर डाल सकता है?

कई बार हम थकान, चिड़चिड़ेपन और ध्यान लगाने में परेशानी को काम का दबाव समझकर इग्‍नोर कर देते हैं, लेक‍िन हम आपको वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे 2026 के मौके पर न्यूरोसर्जन डॉ. संदीप मवानी (आदिक्यूरा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वडोदरा) बता रहे हैं क‍ि डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल करते हुए अपने दिमाग की सेहत को कैसे बचाएं और रोजाना की कौन-सी आदतें इसमें मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं-

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डिजिटल दौर में दिमाग को हेल्‍दी कैसे रखें?

आज के समय में डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर रहना आसान नहीं है, लेकिन फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल किस तरह करते हैं, इस पर ध्यान देना जरूरी है। लगातार नोटिफिकेशन चेक करना, देर रात तक रील्स देखना और काम के बीच आराम न करना हमारी नींद और ध्यान लगाने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है। डॉक्‍टर ने बताया क‍ि मेंटल हेल्‍थ का संबंध सिर्फ दिमाग से नहीं बल्कि दिल, खून की नसों, नींद और हमारी रोजाना की आदतों से भी है। इसलिए दिमाग को हेल्‍दी रखने के लिए स्क्रीन टाइम के साथ-साथ अपनी पूरी दिन की रूटीन पर भी ध्यान देना चाहिए।

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मोबाइल चलाना और नींद की कमी का दिमाग पर असर

रात को बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाते रहना आज कल कई लोगों की आदत बन गई है। इससे नींद पूरी नहीं होती है। डॉक्‍टर ने बताया क‍ि द‍िमाग को हेल्‍दी रखने के ल‍िए अच्‍छी नींद लेना जरूरी है। सोते समय दिमाग मेमोरी और दूसरे जरूरी चीजों पर काम करता है।

उन्‍होंने यह भी बताया क‍ि अगर कोई रात में तेज खर्राटे लेता है और सुबह उठने के बाद भी थका हुआ महसूस करता है, तो इसे इग्‍नोर नहीं करना चाहिए। यह स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है, जिसमें सोते समय बार-बार सांस रुकती है या कम हो जाती है।

ऑनलाइन रहने का दबाव दिमाग को कैसे प्रभावित करता है?

ऑफिस के मैसेज, सोशल मीडिया की लगातार अपडेट और घर की जिम्मेदारियों के बीच कई लोग तनाव से घ‍िर जाते हैं। ऐसे में अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे, तो नींद खराब होगी। काम के बीच आराम करना, अच्‍छी नींद लेना और तनाव को कम करना भी जरूरी है।

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मेंटल हेल्‍थ के लिए इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डिजिटल स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने से आंखों में थकान, गर्दन में दर्द और सिरदर्द हो सकता है, लेकिन हर परेशानी की वजह स्क्रीन ही हो, यह जरूरी नहीं है। डॉ. संदीप मवानी के मुताबिक-

  • लगातार बढ़ता सिरदर्द
  • अचानक चक्‍कर आना,
  • धुंधला द‍िखाई देना
  • याददाश्त से जुड़ी परेशानी होना
  • हाथ-पैर में कमजोरी होना
  • बोलने में द‍िक्कत महसूस होना
  • अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकना

इन सब लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं।

डिजिटल युग में दिमाग को हेल्‍दी रखने के तरीके

डाॅक्‍टर ने बताया क‍ि अगर आप ड‍िज‍िटल युग में द‍िमाग को हेल्‍दी रखना चाहती हैं, तो इन बातों का ध्‍यान रखना चाह‍िए-

  • सोने से पहले फोन दूर रखें: रात में मोबाइल चलाने का समय कम करें और सोने-जागने का समय फ‍िक् स करें।
  • स्क्रीन से बीच-बीच में ब्रेक लें: हर घंटे कुछ देर के लिए स्क्रीन से नजर हटाएं और थोड़ा चलें।
  • रोज पैदल चलें: अपनी क्षमता के अनुसार करीब 30 मिनट टहलने की कोशिश करें।
  • तनाव को नजरअंदाज न करें: काम और आराम के बीच बैलेंस बनाए रखें। जरूरत पड़ने पर किसी एक् सपर्ट से बात करें।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर टेस्ट कराएं: इनका बढ़ा हुआ लेवल दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • हर समय ऑनलाइन रहने से बचें: फोन के नोटिफिकेशन सीमित करें और दिन में कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताएं।

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FAQ
20-20-20 नियम क्या होता है?
हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर रखी चीज को 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों की थकान दूर होती है और दिमाग को आराम मिलता है।
डिजिटल डिटॉक्स कैसे शुरू करें?
दिन में 1 घंटा या वीकेंड पर कुछ घंटे फोन बंद रखें। इस समय में किताबें पढ़ें, टहलें या परिवार के साथ बिना स्क्रीन के वक्त बिताएं।
ब्लू लाइट फिल्टर क्यों जरूरी है?
मोबाइल की नीली रोशनी नींद वाले हार्मोन को रोकती है। नाइट मोड या फिल्टर यूज करने से आंखों पर दबाव कम पड़ता है और नींद अच्छी आती है।
Disclaimer

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