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देश को पहला अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज दिलाने वाली लेखिका गीतांजलि श्री की कहानी आपको भी करेगी इंस्पायर

साल 2022 में पहली बार किसी हिंदी भाषा उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह इतिहास रचने वाली एक महिला थी, जानें उनकी कहानी क...
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Published -28 Jul 2022, 13:00 ISTUpdated -03 Aug 2022, 18:36 IST
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भारत में तमाम ऐसे लेखक हुए हैं, जिन्हें उनकी लेखनी और साहित्य के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन लंबे समय से किसी भी लेखक या कवि की रचना को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार नहीं मिला था। आखिरकार साल 2022 में जाकर यह इंतजार खत्म हुआ। 

भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री को उनके उपन्यास ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला। बता दें कि ये उपन्यास हिंदी भाषा में है,जिसका नाम ‘रेत की समाधि’ है। इसे अमेरिका ट्रांसलेटर डेसी रॉकवेल ने अंग्रेजी में अनुवादित किया है। इसी के साथ गीतांजलि का यह उपन्यास उन 13 किताबों में शामिल हो गया, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय लेखिका बन गई हैं। आइए जानते हैं उनकी कहानी के बारे में- 

हिंदी भाषा का पहला उपन्यास जिसे मिला अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज

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गीतांजलि श्री का उपन्यास ‘रेत समाधि’ पहला हिंदी उपन्यास है, जिसे बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।  

उपन्यास किस कहानी पर है आधारित

‘रेत समाधि’ भारत के बंटवारा की छाया में स्थापित एक कहानी है। जिसमें पति की मृत्यु के बाद बुजुर्ग महिला की कहानी और संघर्षों को दर्शाता है। ये किताब वास्तविक होने के साथ-साथ धर्म, जेंडर और सरहदों के हालातों पर दिप्पणी है।

कौन हैं गीतांजलि श्री?

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गीतांजलि श्री भारत की प्रसिद्ध लेखिका और उपन्यासकार हैं। जिनके पुस्तकें रीडर्स के बीच काफी चर्चित हैं। साल 2001 में उनके उपन्यास ‘माई’ को क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए चुना गया। 

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गीतांजलि ने रचा इतिहास

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साल 2022 में गीतांजलि श्री को उनकी किताब ‘रेत समाधि’ के लिए बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जिसमें उन्हें पुरस्कार के तौर पर 5000 पाउंड की इनाम राशि मिली। बता दें कि इस इनामी राशि को गीतांजलि अपनी ट्रांसलेटर डेजी रॉकवेल के साथ शेयर करेंगी। 

गीतांजलि का करियर 

गीतांजलि श्री उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर से हैं। बता दें हिंदी के अलावा गीतांजलि अंग्रेजी, जर्मन, सर्बियन, फ्रेंच और कोरियन भाषाओं नें अनुवाद कर चुकी हैं। इसके अलावा वो कई उर्दू साहित्यिक कृतियों को हिंदी में भी अनुवादित कर चुकी हैं। 

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क्या है बुकर प्राइज?

बुकर प्राइज लेखन के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक हैं। यह पुरस्कार अंग्रेजी में अनुवादित या फिर ब्रिटेन या आयरलैंड में प्रकाशित किसी एक पुस्तक को हर साल दिया जाता है। साल 2005 से इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी, तब से लेकर अभी तक कुल 13 लोगों यह पुरस्कार दिया जा चुका है।

तो ये थी बुकर अवार्ड और गीतांजलि से जुड़ी जरूरी जानकारी। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

Image Credit- twitter

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