टोक्यो ओलंपिक में भारतीय प्लेयर लगातार अपना शानदार प्रदर्शन दे रहे हैं। भारत की तरफ से अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या इस बार 127 है, जिसमें से 56 महिलाएं शामिल हैं। बता दें कि हर क्षेत्र में महिलाओं ने ना सिर्फ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है बल्कि अपना शानदार प्रदर्शन भी दिखाया है। वहीं ओलंपिक में शामिल होने वाली महिलाओं की लिस्ट में ज्यादातर प्लेयर्स अपने गेम में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं, हालांकि, टोक्यो ओलंपिक में अभी भी भारतीय महिला प्लेयर्स अपना जबरदस्त परफॉर्मेंस दे रही हैं।

इस बार टेबल टेनिस खिलाड़ियों की लिस्ट में कोलकाता की सुतीर्था मुखर्जी भी शामिल थीं। सुतीर्था मुखर्जी उन 4 टेबल टेनिस प्लेयर्स में से एक थीं, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। जबरदस्त परफॉर्मेंस के बाद भी उन्हें ओलंपिक में हार झेलनी पड़ी थी। सुतीर्था भारत की शानदार टेबल टेनिस प्लेयर्स में से एक हैं, उन्होंने अब तक कई ट्रॉफी अपने नाम की हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें-

6 साल की उम्र से खेल रहीं हैं टेबल टेनिस

sutirtha mukherjee
 
सुतीर्था मुखर्जी का जन्म 10 अक्टूबर 1995 में कोलकाता के एक छोटे से शहर नैहाटी में हुआ था। सुतीर्था मुखर्जी ने टेबल टेनिस 6 साल की उम्र से ही खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने इस गेम को वजन कम करने के लिए खेलना शुरू किया था। जिसे शुरुआत में वह एक शौक के तौर पर लेती थीं, लेकिन बाद में उनकी मां ने उन्हें गेम में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में सुतीर्था मुखर्जी ने बताया कि उनकी मां अपने समय में कभी किसी भी खेल का हिस्सा नहीं बन पाईं थीं। ऐसे में वह मेरे जरिए खुद को खेलता देख पाती हैं। सुतीर्था का सपना था कि वह टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लें ताकि दुनिया की टॉप 50 रैंक में अपनी जगह बना सकें।
 

कैसे बनाई टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह

sutirtha mukherjee table tennis
 
सुतीर्था मुखर्जी ने देश की नंबर वन टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा को मात देकर टोक्यो ओलंपिक(रेवती वीरामनी) के लिए क्वलिफाई किया था। दोहा में हुए एशियन क्वालिफायर में सुतीर्था मुखर्जी ने मनिका बत्रा को मात दी थी, जिसके बाद उन्हें टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। अपने इंटरव्यू में सुतीर्था ने बताया कि रियल लाइफ में वह अपनी मां नीता और कोच मिहिर घोष को अपना रोल मॉडल मानती हैं। जिन्होंने हर कदम पर उन्हें सपोर्ट किया है। बता दें कि भले ही सुतीर्था बंगाल की रहने वाली हैं, लेकिन नेशनल लेवल पर वह हरियाणा का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके अनुसार, हरियाणा में खिलाड़ियों का काफी सम्मान किया जाता है, खास कर जब आप मेडल जीत कर लाते हैं। टीवी9 की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटीएफ के पूर्व अध्यक्ष एमपी सिंह और हरियाणा के मौजूदा उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उन्हें हरियाणा की तरफ से खेलने का सुझाव दिया था।
 

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एक साल के लिया गया था सस्पेंड

sutirtha mukherjee player

साल 2015 में बंगाल टेबल टेनिस फेडरेशन ने सुतीर्था मुखर्जी को एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया था। दरअसल जूनियर टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उनकी उम्र के बारे में गलत जानकारी दी गई थी। यही वजह था कि उन्हें साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक में जाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था। इस घटना से सुतीर्था मुखर्जी को काफी धक्का लगा था। वो समय सुतीर्था के लिए काफी मुश्किलों से भरा था। उनके अनुसार, उन्होंने गेम को देखना बिल्कुल छोड़ दिया था। सुतीर्था उस वक्त देश की नंबर वन प्लेयर थीं, लेकिन इस हादसे के बाद वह बुरी तरह से टूट गईं थीं। सुतीर्था के अनुसार, वह दोबारा नहीं खेलना चाहती थीं, जब भी वह कोशिश करतीं पुरानी बातें उन्हें परेशान करने लगती थीं। सुतीर्था बताती हैं कि उन दिनों कई लोग उनका सपोर्ट बनकर खड़े रहे, जिसमें उनके पैरेंट्स शामिल थे, इसके अलावा उनके कोच मिहिर घोष ने भी उन्हें काफी सपोर्ट किया था।
 
 
टोक्यो ओलंपिक में  सुतीर्था मुखर्जी को हार झेलनी पड़ी थी, लेकिन उन्होंने गेम को शानदार बनाने के लिए जबरदस्त परफॉर्मेंस दी थी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।