आपकी फेवरेट वेबसाइट हरजिंदगी अब 3 साल की हो गई है। 30 सितंबर को हरजिंदगी की एनिवर्सरी थी और दो दिन के खास इवेंट में हमने बहुत सारी यादों को समेट लिया। हरजिंदगी की हमेशा से ये कोशिश रहे है कि वो अपने रीडर्स को मोटिवेट करे और इसीलिए हमने अपनी तीसरी एनिवर्सरी पर कई लाइव सेशन्स रखे जहां देश की नामी हस्तियों से बात की गई और उनसे कुछ खास बातें जानने की कोशिश की गई। 

लड़कियों के लेकर समाज में तरह-तरह की बातें कही जाती हैं, आज भी हमारे समाज में रूढ़ीवादी सोच की घुसपैठ होती रहती है। 'लड़कियों के पर कतर देने चाहिए', 'लड़कियों को ज्यादा उड़ना नहीं चाहिए' जैसी कई बातें शायद सभी ने अपने आस-पास सुनी हों, लेकिन अगर कोई लड़की अपने पंख फैला कर उड़ना चाहे तो? इसी कड़ी में हमने हरजिंदगी के एनिवर्सरी स्पेशल इवेंट में बात की आईपीएस सुतपा सानियाल और विंग कमांडर अनुपमा जोशी से जो अपने काम से कई लोगों को मोटिवेट कर चुकी हैं और लाखों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए बहुत पते की बात की और उन्हें मोटिवेट किया। 

महिलाओं में है बहुत लीडरशिप क्वालिटी-

सुतपा सानियाल अपने कार्यकाल में सिटिजन कडैट प्रोग्राम की शुरुआत की थी जो महिलाओं की लीडरशिप क्वालिटी को उभारने के लिए बनाया गया था। महिलाओं से फॉर्म भरवाकर उनकी स्क्रीनिंग की जाती थी जिसके तहत स्क्रीन की गई महिलाओं को लोकल थाने से जोड़ा गया और हर थाने में ऐसी दो-चार महिलाएं ऐड की गईं। अगर कोई महिला अपनी बात न कह पाए तो ये महिलाएं उसकी मदद करें इस सोच के साथ ऐसा प्रोग्राम चलाया गया था। 

महिलाओं को ये सोचना चाहिए कि उनमें बहुत सारी लीडरशिप होती है और अगर वो आगे बढ़कर अपनी बात नहीं कहेंगी तो ये सही नहीं होगा। 

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ग्राउंड जीरो पर सुतपा सानियाल का रहा ऐसा एक्सपीरियंस-

सुतपा सानियाल का कहना है कि ऐसा होता है कि आपको हर बार ये अहसास दिलाया जाता है कि आप यहां नहीं बिलॉन्ग करते और यहां ये बात ध्यान में रखने वाली है कि अगर आप आईपीएस की ट्रेनिंग करके जाते हैं तो आप कहीं न कहीं इमोशनली और फिजिकली स्ट्रॉन्ग हो जाते हैं। तब आपको कई चीज़ों का फर्क पड़ना बंद हो जाता है। सुतपा जी ने कहा कि हम बस यही सोच सकते हैं कि, 'यहां तक आने के लिए तो हम नहीं आए हैं। हमें आगे भी जाना है। ये सोचकर जब आप चलेंगे तो मुश्किलें अपने आप आसान होती जाएंगी।'

sutapa sanyal medal

बेटा ट्रॉफी और बेटी बर्डन नहीं हो सकती है- 

सुतपा जी ने कहा कि घर से ही ये बातें बच्चों को सिखानी होगी कि आस-पास जो भी है उसकी इज्जत करो। हर किसी को जेंडर के आधार पर न देखो। बेटा है तो वो ट्रॉफी की तरह समाज में पेश किया जाए और बेटी है तो उसे बर्डन की तरह माना जाए तो ये सही नहीं होगा। इससे बेहतर ये होगा कि हम अपने बच्चों को ये सीख दें कि आने वाले समय में आपको सभी को बराबर पेश करना है।  

जीरो एफआईआर- 

सेशन के दौरान एक बार सुतपा जी से जीरो एफआईआर के बारे में भी चर्चा की गई। सुतपा जी का कहना था कि इस तरह से सेशन अगर और किए जाएंगे तो महिलाओं को उनके हित के लिए जानकारी ज्यादा मिलेगी। मैं आपको बता दूं कि इसका मतलब होता है कि किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दाखिल की जा सकती है (भले ही घटना किसी अन्य जगह ही क्यों न हुई हो) और उसके बाद ये दूसरे पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर की जा सकती है।  

अनुपमा जोशी ने महिलाओं का हौसला बढ़ाने के लिए कही ये बात- 

अनुपमा जोशी ने महिलाओं का हौंसला बढ़ाने के लिए कहा कि उन्हें कभी किसी भी हाल में डरना नहीं चाहिए। अगर कोई एजुकेटेड महिला है और वो अपने किसी काम के लिए चिंता करने की जगह आगे बढ़ना चाहिए।  

उन्होंने बताया कि वो अपना नाम लिखने के साथ-साथ अपना रैंक भी लिखती हैं जिसका सीधा सा कारण ये है कि वो चाहती हैं कि लोगों को पता चले कि महिलाएं भी रैंक होल्डर हो सकती हैं। यकीनन ये छोटी-छोटी चीज़ें ही हमारी हौसला अफजाई करती हैं।  

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लॉ तोड़े बिना भी आप बहुत कुछ कर सकती हैं- 

महिलाओं के लिए अनुपमा जोशी जी ने एक बहुत अच्छी सीख दी है। वो ये कि बिना कानून तोड़े भी काफी कुछ किया जा सकता है बस आपको आपके लिए बनाए गए कानून समझने की जरूरत है। अगर आपको ये सब पता है तो कई काम आसान हो सकते हैं। इसलिए जागरुक बनिए और खुद को बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ते रहिए।  

anupama joshi

अपने गुस्से को ठंडा मत होने दो- 

हमारे दोनों स्पेशल गेस्ट्स ने इस बारे में बात की और कहा कि अगर कोई अपने गुस्से को ठंडा होने देता है तो सही नहीं है। गुस्सा कई बार हमें मोटिवेट कर सकता है। किसी घटना को लेकर, किसी अन्नयाय के बारे में आपने सुना हो, आपके खुद के साथ कुछ हुआ हो तो अगर उसका गुस्सा ठंडा कर देंगे तो समस्या बढ़ेगी। जब तक गुस्सा रहेगा तब तक आप अन्नयाय के खिलाफ आवाज़ उठा पाएंगी।  

कौन से ऐसे संस्थान हैं जो महिलाओं की मदद कर सकते हैं-  

आशा ज्योति केंद्र, स्टे होम्स आदि हैं जिनमें मेडिकल सलाह के साथ-साथ महिलाओं के लिए काम करते हैं। अपने आस-पास के एनजीओ के बारे में जानना बहुत जरूरी है और महिलाएं आपस में ग्रुप्स बनाकर ऐसे एनजीओ की जानकारी और लोगों को दे सकती हैं। ये हमारा कर्तव्य बनता है कि ऐसी चीज़ों को आगे बढ़ाया जाए।  

हमारे इस खास इवेंट को सफल बनाने के लिए आपका भी धन्यवाद। अगर आपका कोई सुझाव है तो वो आप हमें हरजिंदगी के फेसबुक पेज पर बता सकते हैं। अगर आपका कोई सवाल है तो वो आप हमसे वहीं पूछ सकते हैं। ऐसी ही अन्य खबरों को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।