महिलाओं को क्यों ज्यादा परेशान करती है Lupus की बीमारी? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

आज World Lupus Day है। यह एक ऐसाी ऑटोइम्यून डिजीज है, जो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है। इसके बारे में लोगों में बहुत ज्यादा अवेयरनेस नहीं है। ऐसे में इसके शुरुआती लक्षणों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है और इसी वजह से बीमारी बढ़ जाती है। यह कंडीशन क्यों महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है और किन लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं।  
Updated:- 2026-05-10, 17:27 IST
Why is lupus more common in females

ल्यूपस एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसका खतरा महिलाओं में ज्यादा होता है। असल में इस बीमारी के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है और इसी की वजह से इसके संकेतों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है या इसे अवॉइड कर दिया जाता है। हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों में इसके कुछ ऐसे संकेत नजर आते हैं, जिन पर अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। अगर इसका समय रहते पता चल जाए और शरीर के अंगों तक पहुंचने से पहले इसे रोकने पर ध्यान दिया जाए, तो ट्रीटमेंट आसान हो जाता है। यह बीमारी महिलाओं को क्यों ज्यादा प्रभावित करती है और इसके किन शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr. Aneesa Kapadia, Rheumatologist, Saifee Hospital, Mumbai जानकारी दे रहे हैं।

ल्यूपस के इन शुरुआती संकेतों पर जरूर दें ध्यान

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  • ल्पूपस के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर वक्त रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह किडनी, हार्ट और बाकी अंगों को प्रभावित कर सकता है।
  • इसका सबसे आम लक्षण जोड़ों का दर्द है। उंगलियों, कलाई और घुटनों के इर्द-गिर्द आने वाले सूजन और दर्द ल्यूपस का संकेत हो सकता है।
  • ल्यूपस आर्थराइटिस आमतौर पर जोड़ों में विकृति पैदा नहीं करता है। यह न तो रुमेटीइड है और न ही ऑस्टियोआर्थराइटिस है।
  • इसके अलावा चेहरे पर आने वाले लाल रैशेज भी इसका संकेत हो सकते हैं। खासतौर पर नाक और गालों पर आने वाले बटरफ्लाई रैश इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं।
  • ये रैशेज, हाथ, पैर और शरीर के बाकी अंगों पर भी हो सकते हैं। इस तरह के रैशेज सूरज की रोशनी में और ज्यादा तकलीफ देते हैं।
  • अगर आपके बाल बहुत तेजी से झड़ रहे हैं और स्कैल्प पर भी रैशेज होते जा रहे हैं, तो इसे भी नजरअंदाज न करें। इसके अलावा ओरल अल्सर, बुखार, वजन कम करना और गर्दन के आस-पास लिम्फ नोड्स में सूजन भी इसका संकेत हो सकते हैं।
  • उंगलियों और नाखूनों के आस-पास की त्वचा का रंद बदलना भी सही नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर और पफीनेस पर भी ध्यान देना चाहिए।

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महिलाओं में क्यो ज्यादा होता है ल्यूपस का खतरा?

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ल्यूपस फाउंडेशन ऑफ अमेरिका की रिसर्च के अनुसार, ल्यूपस महिलाओं को ज्यादा परेशान करता है। इसका खतरा टीनएज से लेकर 30 साल तक की महिलाओं में होता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल रिप्रोडक्टिव सालों में ज्यादा होता है और इसके उतार-चढ़ाव के चलते इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। प्रेग्नेंसी और पीरियड्स में होने वाला हार्मोनल इंबैलेंस भी इसकी वजह बन सकता है। ऐसा जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है।

 

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महिलाओं को Lupus के शुरुआती संकेतों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। हरजिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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