• + Install App
  • ENG
  • Search
  • Close
    चाहिए कुछ ख़ास?
    Search
author-profile

किसे कहते हैं 'फिलीग्री ज्वेलरी' और इसके आभूषणों में ऐसा क्या होता है खास?

फिलीग्री आभूषण का नाम सुना है क्या आपने? नहीं, तो चलिए आज आपको इसके इतिहास के बारे में विस्तार से बताएं।  
Published -13 Jun 2022, 18:32 ISTUpdated -13 Jun 2022, 18:44 IST
author-profile
  • Ankita Bangwal
  • Editorial
  • Published -13 Jun 2022, 18:32 ISTUpdated -13 Jun 2022, 18:44 IST
Next
Article
history of filigree jewellery

आभूषण का नाम सुनते ही हर महिला खुश हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर आपको किसी महिला को खुश करना है तो आप उसे उपहार में आभूषण दे दें। किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना हो तो ज्वेलरी से अच्छा क्या हो सकता है? वहीं बीते कुछ समय में फैशन ज्वेलरी का प्रचलन भी काफी बढ़ गया है। इसी के चलते कई ऐसे प्राचीन आर्ट फॉर्म हैं जो फैशनेबल हो चुके हैं। इनके यूनिक डिजाइन और स्टाइल के कारण यह बहुत लोकप्रिय है। 

भारतीय आभूषणों की बात करें तो फिलीग्री सबसे आकर्षक फॉर्म्स में से एक हैं। अगर आपको यह न मालूम हो कि यह किस तरह का आभूषण है, तो हम आपको बता दें कि चांदी और सोने के थ्रेड्स से इस ज्वेलरी को तैयार किया जाता है। इन्हें लेस में एक-दूसरे के साथ जोड़कर धागों का जाल बनाया जाता है।

ज्वेलरी में फिलीग्री का क्या मतलब है?

know what is filigree jewellery

गहनों की दुनिया में फिलीग्री का मतलब बहुत ही अलग होता है। एक अलंकरण, जिसमें एक नाजुक, लचीला, महीन, कीमती धातु के धागे का उपयोग प्लैटिनम या पैलेडियम के साथ किया जाता है, जिसे विशिष्ट डिजाइन में घुमाकर तैयार करते हैं और फिर गहनों से अटैच किया जाता है।

एंटीक ज्वेलरी बिजनेस 1920 से लेकर 1935 के बीच, फिलीग्री को ज्यादातर आर्ट डेकोरेशन में उपयोग किया जाता था। मेटल्स को ज्वेलरी में डाई-कास्ट किया जाता है और एक यूनिक और सुंदर डिजाइन तैयार किया जाता था।

ऐसा माना जाता है कि मेसोपोटामिया और मिस्र (जिन्हें फिलीग्री आर्ट के पहले देशों के रूप में माना जाता है) में इसकी उत्पत्ति हुई थी। 2500 ईसा पूर्व के दौरान एशियाई महाद्वीप में फिलीग्री गहनों का आकर्षण बढ़ा और फैलता गया। कल्चरलइंडिया के मुताबिक, इसे विशेष रूप से अपर मेसोपोटामिया के कारीगर बनाने लगे। सोने और चांदी के तारों से बनाई गई इस कला को 'तेलकारी' के रूप में जाना जाता था। आज भी, कई विशेषज्ञ शिल्पकार 'तेलकारी' गहने का उत्पादन करते हैं जो अत्यधिक जटिल और नाज़ुक होते हैं।

चूंकि एक ही तरह का पैटर्न और प्रक्रिया रही, इसलिए दोनों देशों (ग्रीक और भारतीय) में फिलीग्री ज्वेलरी में बहुत समानता देखी जाती है। इसके अतिरिक्त इसे 1660 से 19वीं शताब्दी के अंत तक इतालवी और फ्रांसीसी मेटल वर्क में भी शामिल किया गया। 

इसे भी पढ़ें : जानें क्यों है मीनकारी इतनी खास, आप भी रॉयल्स की तरह यूं करें इसे स्टाइल

भारत में फिलीग्री की लोकप्रियता

भारत के पूर्वी राज्यों में चांदी में फिलीग्री का काम काफी लोकप्रिय है। चांदी के हस्तशिल्प की दुनिया में चांदी की फिलीग्री गहनों को सबसे बेहतरीन लुक देती है। प्राचीन काल से, भारत में लोग इस प्रकार के गहनों के निर्माण का उपयोग करते रहे हैं। इस तरह के ज्वेलरी पीस बनाने में बहुत धैर्य और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है क्योंकि इसे जटिल रूप से डिजाइन करने के लिए बेस्ट टेक्निक की आवश्यकता होती है (टेम्पल ज्वेलरी का इतिहास)।

भारत में ओडिशा है फिलीग्री के लिए लोकप्रिय

filigree in india orrisa

भारत में, ओडिशा राज्य के कटक शहर के लोग इस कला को बनाने में प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। कटक शहर में सौ से अधिक परिवार फिलीग्री ज्वेलरी के विभिन्न पैटर्न बनाने में मास्टर हैं। इसे स्थानीय लोग 'कट्टाकी तारकासी' के नाम से पुकारते हैं और यह बहुत लोकप्रिय है। इतना ही नहीं, अपने जटिल डिजाइन और शानदार कलात्मक पैटर्न के लिए ओडिशा की फिलीग्री ज्वेलरी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। ओडिशा के साथ-साथ यह आंध्र प्रदेश और वेस्ट बंगाल में भी काफी लोकप्रिय है।

ज्वेलरी ही नहीं कई अन्य चीजें भी हैं प्रचलित

अगर आपको लगता है कि फिलीग्री सिर्फ ज्वेलरी में नजर आती है, तो ऐसा नहीं है। इससे आभूषण ही नहीं, बल्कि कई पारंपरिक वस्तुएं मंदिरों के शिलालेख, मंदिरों के लिए प्रतिकृतियां और देवी-देवताओं की मूर्तियों, बर्तन आदि कई सुंदर चीजें बनाई जाती रही हैं। आजकल इसके ब्रोच, हेयरपिन और झुमके आदि भी बनाए जाने लगे हैं, जो लोगों को बहुत पसंद आते हैं। 

इसे भी पढ़ें : भारत में बीड्स का महत्व है खास, साड़ियों से लेकर टी-शर्ट तक के साथ कर सकती हैं स्टाइल

कैसे स्टाइल करें फिलीग्री ज्वेलरी?

how to style filigree jewellery

वेस्टर्न वियर के साथ पहनें : आपकी ज्वेलरी आपके स्टाइल को दर्शाती है, इसलिए इसे बेहद संजीदगी के साथ चुनना चाहिए। अगर आप इस तरह की एंटीक ज्वेलरी को कैरी कर रही हैं, तो उसके इयररिंग्स, स्टेटमेंट रिंग्स और ब्रेसलेट को वेस्टर्न ड्रेसेस के साथ पहन सकती हैं। लॉन्ग पेंडेंट आपके वेस्टर्न लुक को और भी एन्हांस करेंगे। 

एथनिक वियर के साथ पहनें : चूंकि इन्हें चांदी और सोने से मिलाकर बनाया जाता है तो यह आपके एथनिक वियर पर भी बहुत अच्छी लगती है। अगर आप साड़ी, सूट, अनारकली, गाउन आदि पहन रही हैं तो उनके साथ झुमके, कड़े और नेकलेस आदि एक परफेक्ट चॉइस है। आप इसकी स्टेटमेंट रिंग को एथनिक में कैरी कर एक बोहो लुक तैयार कर सकती हैं।

Recommended Video

ऑफिस वियर के साथ पहनें : आप इससे बनी ज्वेलरी को ऑफिस आउटफिट्स के साथ ट्राई कर सकती हैं। इसके पतले नेकलेस या फिर छोटे इयररिंग्स ब्लेजर के साथ भी बखूबी जा सकते हैं (स्टेटमेंट ज्वैलरी को ऐसे करें स्टाइल)। 

आज न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में इसके प्रशंसक हैं। महिलाएं फिलीग्री ज्वेलरी के साथ-साथ इसकी अन्य वस्तुएं भी लेती हैं। इसके जटिल और यूनिक डिजाइन इस आर्ट फॉर्म को अन्य भारतीय पारंपरिक आभूषणों से अलग बनाती है।

हमें उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। इसे लाइक और शेयर करें और इसी तरह अन्य पारंपरिक आभूषणों के बारे में जानने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथा।

Image Credit : Google Searches

Disclaimer

आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।